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भीड़ द्वारा हिंसा मामला: गृह मंत्रालय का राज्यों से रिपोर्ट मांगने से इनकार

गृह मंत्रालय ने कहा- घटनाएं कानून और व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं जिन्हें देखना राज्य सरकार का काम है

FP Staff | Published On: Jun 28, 2017 07:16 PM IST | Updated On: Jun 28, 2017 07:16 PM IST

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भीड़ द्वारा हिंसा मामला: गृह मंत्रालय का राज्यों से रिपोर्ट मांगने से इनकार

देश के अलग-अलग हिस्सों से पीटकर मार डालने की घटनाएं सामने के बावजूद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इसपर दखल देने से इनकार किया है. मंत्रालय ने पहले की तरह हरियाणा और झारखंड से कोई रिपोर्ट नहीं मांगा है. जबकि, इन दोनों राज्यों से भीड़ द्वारा हिंसा की खबरें आई हैं.

गृह मंत्रालय के प्रवक्ता अशोक प्रसाद ने कहा कि राज्यों से रिपोर्ट तभी मांगा जाता है जब घटना के बड़े पैमाने पर फैलने या फिर आतंरिक सुरक्षा के लिए खतरा पैदा होने और फोर्स तैनात करने की बात हो.

पिछले सप्ताह हरियाणा के बल्लभगढ़ में ट्रेन में सफर कर रहे 15 साल के जुनैद खान की भीड़ द्वारा धारदार हथियारों से हत्या कर दी गई थी. भीड़ ने कथित तौर पर उसके खिलाफ सांप्रदायिक टिप्पणी भी की थी.

बुधवार को ही, झारखंड के गिरिडीह में उस्मान अंसारी नाम के शख्स के घर के बाहर मृत गाय मिलने पर गुस्साई भीड़ ने हमला कर उसका घर जला दिया.

घटनाएं कानून और व्यवस्था से जुड़ी हुईं

अशोक प्रसाद ने कहा कि यह घटनाएं कानून और व्यवस्था से जुड़ी हुई हैं जिन्हें देखना राज्य सरकार का काम है.

हालांकि अक्टूबर, 2015 में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने दादरी में मोहम्मद अखलाख की पीटकर हुई हत्या मामले में उत्तर प्रदेश सरकार से विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा था. मंत्रालय ने तब समाजवादी पार्टी की तत्कालीन सरकार से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि भविष्य में ऐसी घटनाएं फिर न हों.

देश के कई हिस्सों में भीड़ द्वारा अल्पसंख्यको और दलितों के साथ मारपीट और उत्पीड़न के मामलों में तेजी आई है

देश के कई हिस्सों में भीड़ द्वारा अल्पसंख्यको और दलितों के साथ मारपीट और उत्पीड़न के मामलों में तेजी आई है

20 जुलाई, 2016 को गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने संसद में उना दलित हमले मामले में बयान दिया था. ऐसा उन्होंने गुजरात सरकार से रिपोर्ट मिलने के बाद किया. उन्होंने संसद को बताया कि इस मामले में कार्रवाई करते हुए 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है.

राजनाथ सिंह ने संसद में कहा कि 'पकड़े गए आरोपियों में से सात न्यायिक हिरासत में हैं जबकि, दो पुलिस की हिरासत में है. इस मामले में राज्य सरकार ने चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया है जिनमें से एक इंस्पेक्टर है. सभी के खिलाफ ड्यूटी में लापरवाही बरतने के मामले में कार्रवाई की जा रही है.'

विपक्ष ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वो आने वाले संसद के सत्र में भीड़ द्वारा पीटकर मार डालने और हिंसा की घटनाओं को जोरशोर से उठाएगा. अगर विपक्ष सरकार से इस बारे में जवाब की मांग करेगा तो गृह मंत्रालय को अपने रूख में बदलाव लाते हुए घटना वाले राज्य सरकारों से इस बारे में विस्तृत रिपोर्ट मांगना पड़ेगा.

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