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कूड़े के मुद्दे भरोसे दिल्ली को कैसे स्वच्छ बनाएंगे केजरीवाल ?

जिन मामलों से आम आदमी पार्टी की साख की किरकिरी हुई है उन्हीं मुद्दाें को अब भुनाना चाहती है

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Apr 23, 2017 05:14 PM IST

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कूड़े के मुद्दे भरोसे दिल्ली को कैसे स्वच्छ बनाएंगे केजरीवाल ?

लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनावों की गरमाहट पहली बार एमसीडी में महसूस की जा रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह ये है कि इस बार हर पार्टी के लिए इस चुनाव के जरिए खुद को साबित करने की चुनौती है.

आम आदमी पार्टी विधानसभा चुनाव में 67 सीटें जीतकर सबको चौंका चुकी है. लेकिन अब दो साल बाद उसके सामने जनता के फैसले को सही साबित करने की चुनौती है. एमसीडी चुनाव के नतीजे आम आदमी पार्टी के भविष्य का फैसला करेंगे.

केजरीवाल को टक्कर देने उतरे उनके पुराने 'अपने'

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हमेशा विवादों से घिरी रहने वाली केजरीवाल सरकार ने कई कामों के न होने का ठीकरा बीजेपी और एमसीडी पर फोड़ा है. लेकिन राजौरी गार्डन में मिली करारी हार जनता के मिजाज का ट्रेलर दिखाने के लिए काफी है. इसके बावजूद पार्टी संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल अपनी जीत का दावा कर रहे हैं.

केजरीवाल के लिए सबसे बड़ी टक्कर उनके पुराने ‘अपनों’ से मिलेगी. जिन लोगों के साथ मिलकर केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी को खड़ा किया और फिर बाहर का रास्ता दिखाया, उन लोगों ने केजरी का पीछा अबतक नहीं छोड़ा है.

आम आदमी पार्टी के भीतर से ही बगावत के बाद फूटी स्वराज इंडिया अरविंद केजरीवाल के लिए परेशानी खड़ी कर सकती है. स्वराज इंडिया ने अपने चुनावी प्रचार में केजरीवाल सरकार की हर नीति और फैसले को निशाना बनाया है. जाहिर तौर पर योगेंद्र यादव और प्रशांत भूषण एमसीडी के जरिए ही हिसाब बराबर करने की कोशिश में है.

yogendra yadav

स्वराज इंडिया ये जरूर चाहेगी कि वो भले ही जीत न सके लेकिन केजरीवाल को न भूलने वाला डैमेज तो दे ही दे. हालांकि खुद केजरीवाल अपनी सरकार के कामकाज और मंत्री-विधायकों की वजह से कई विवादों में घिरे हुए हैं.

जिस तरह से वो बार बार ईवीएम पर छेड़छाड़ का आरोप लगा रहे हैं उससे उनकी हताशा भी दिखाई दे रही है. पंजाब की हार के लिए वो ईवीएम को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. लेकिन वो ये भूल रहे हैं कि इसी ईवीएम ने उनकी पार्टी को भी दिल्ली में 67 सीटें दिलाई थीं, जिसने बीजेपी और कांग्रेस का सूपड़ा साफ किया था.

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वोट हासिल करने के लिए बांटे 'मुफ्त इनाम'

इसके बावजूद दो साल में ही केजरीवाल को एमसीडी चुनाव के वोट हासिल करने के लिए 'मुफ्त इनाम' बांटने की जरुरत पड़ रही है. हाउस टैक्स समाप्त करने का आम आदमी पार्टी का वादा ये साफ कर रहा है कि एमसीडी चुनाव में आम आदमी पार्टी को अपनी जीत का भरोसा नहीं रहा है .

लेकिन सबसे दिलचस्प है आम आदमी पार्टी के मेनिफेस्टो की टैगलाइन- ‘अब हम करेंगे स्वच्छ दिल्ली’. केजरीवाल दिल्ली वालों को उस दिल्ली का सपना दिखा रहे हैं, जिसने एक समय अपने घरों के सामने सड़कों पर कूड़े का ढेर देखा है. उस बदबू में सांस भरी है जो दिल्ली सरकार और एमसीडी के कर्मचारियों के बीच सैलरी विवाद के बाद उठी थी. जाहिर तौर पर न तो केजरीवाल उस कूड़े के ढेर को भूल सके हैं और न ही दिल्ली की जनता.

South Delhi Municipal Corporation's team tries hard to clean the drains at JJ Camp, Tigri

केजरीवाल को उसी कूड़े के ढेर से जीत की आस दिखाई दे रही है. कूड़े के ढेर से उठी राजनीति की दुर्गंध से एमसीडी को जीतने की रणनीति तैयार हुई है. जिसमें डेंगू के मच्छरों को भी हथियार बनाया गया है.

सवाल ये है कि दो साल तक केजरीवाल सरकार को न तो वो कूड़ा दिखा और न ही डेंगू-चिकनगुनिया के शिकार मरीज और अब इन चुनाव में नया वादे और नए फॉर्मूले के साथ वो सामने हैं.

नगर निगम के सफाई कर्मचारियों के साथ उठे सैलरी विवाद से पल्ला झाड़ने वाली दिल्ली सरकार अब ये दावा कर रही है कि न सिर्फ सफाईकर्मियों की  कमी दूर की जाएगी, बल्कि उन्हें परमानेंट भी किया जाएगा. तो साथ ही बड़ा दावा ये है कि तीन साल के भीतर दिल्ली को डेंगू और चिकनगुनिया से मुक्त कराएंगे.

A game of cards is on, next to a hillside of garbage

लेकिन दिल्ली की जनता ने वो दौर भी देखा है जब डेंगू और चिकनगुनिया के फैलते प्रकोप के बावजूद दिल्ली सरकार और बीजेपी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप मढ़ने में जुटी हुई थी. साफ राजनीति का वादा करने वाली आम आदमी पार्टी पर अब हर मामले में राजनीति करने का आरोप है.

आप के मैनिफेस्टो से समझा जा सकता है कि जिन मामलों से उसकी साख और छवि की किरकिरी हुई है उन्हीं को वो मुद्दा बना कर अपने लिए भुनाना चाहती है.

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