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दिल्ली एमसीडी चुनाव 2017: नतीजे दिल्ली ही नहीं देश की राजनीति के लिए भी अहम

बीजेपी की जीत से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सीधे सदमा लगेगा

Amitesh Amitesh | Published On: Apr 25, 2017 08:34 PM IST | Updated On: Apr 25, 2017 08:34 PM IST

दिल्ली एमसीडी चुनाव 2017: नतीजे दिल्ली ही नहीं देश की राजनीति के लिए भी अहम

एमसीडी चुनाव यूं तो दिल्ली के स्थानीय निकाय का चुनाव है. लेकिन, इस चुनाव परिणाम का असर राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ने वाला है.

बीजेपी इस बात को समझती है कि दिल्ली में जीत न सिर्फ उसकी आगे की रणनीति को नई धार देगी, बल्कि 2019 से पहले बीजेपी विरोधी मुहिम की कवायद को भी काफी पीछे धकेल देगी.

बीजेपी जीती तो क्या होगा?

बीजेपी की जीत से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को सीधे सदमा लगेगा. यह सदमा पंजाब और गोवा की हार के बाद बड़ा होगा क्योंकि इसे केजरीवाल के प्रति जनता के मोह भंग के तौर पर भी देखा जाएगा.

बीजेपी इस गंभीरता को समझती है. लिहाजा पार्टी के सबसे बड़े रणनीतिकार और पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने खुद इस चुनाव की रणनीति भी बनाई थी. स्थानीय निकाय के इस चुनाव में पार्टी के लिए उन्होंने प्रचार भी किया.

हर चुनाव को सीरियस ले रही है बीजेपी

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अमित शाह पहले ही बीजेपी के लिए पंचायत से लेकर पार्लियामेंट तक सत्ता में रहने का लक्ष्य बना चुके हैं, लिहाजा बीजेपी कभी भी किसी भी चुनाव को हल्के में नहीं ले रही है.

लेकिन, दिल्ली को लेकर पार्टी की गंभीरता इस मायने में भी अहम है क्योंकि बीजेपी अबतक उस दर्द को नहीं भुला पाई है जो उसे 2015 के विधानसभा चुनाव में मिला था.

लोकसभा चुनाव से शुरू हुए बीजेपी के विजय रथ को दिल्ली के भीतर अरविंद केजरीवाल ने ही रोक लिया था.

बीजेपी को किस बात का है डर?

पार्टी को इस बात का डर सता रहा था कि कहीं यूपी उत्तराखंड की जीत के बाद एक बार फिर से लहर पर लगाम न लग जाए.

लिहाजा पार्टी की तरफ से चुनाव में खुद पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से लेकर गृह मंत्री राजनाथ सिंह तक ने मतदाताओं को अपनी ओर खींचने का प्रयास किया.

इस चुनाव परिणाम से पहले एग्जिट पोल के नतीजों ने दिल्ली के भीतर भी मोदी लहर पर सवार बीजेपी की बयार को ही बयां किया है.

पहले लोकसभा चुनाव में जीत और उसके बाद एक के बाद एक विधानसभा चुनाव में जीत ने बीजेपी की बढ़ती लोकप्रियता और मोदी लहर पर मुहर लगा दी है.

दिल्ली और बिहार विधानसभा चुनाव की हार को छोड दें तो कमोबेश पूरे देश में मोदी लहर अब भी बरकरार दिख रही है जहां पार्टी दूसरों को पराजित कर फिर से अपने पैरों पर खड़ी हो गई है.

क्या अपनी कुर्सी बचा पाएगी बीजेपी?

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दस साल से एमसीडी में काबिज बीजेपी के लिए इस बार फिर से अपनी कुर्सी बचाने को लेकर कम चुनौती नहीं थी.

लेकिन, अपने सभी पार्षदों का टिकट काटने और पार्टी की तरफ से किए गए चुनाव मैनेजमेंट के बाद लगता है दिल्ली की जनता ने नाराजगी को नजरअंदाज कर बीजेपी को बख्श दिया है.

एक्जिट पोल के नतीजों को अगर सही माने तो बीजेपी को तीन चौथाई सीटों पर जीत मिल रही है.

अगर ऐसा हुआ तो बीजेपी का ग्राफ देश भर में एक बार फिर से काफी तेजी से बढ़ेगा. बीजेपी के पक्ष में माहौल और मजबूत होगा. गुजरात और हिमाचल विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी और ताकतवर होकर उभरेगी.

बीजेपी को मिल सकती है बंपर जीत

एग्जिट पोल के मुताबिक बीजेपी की ऐतिहासिक जीत अगर होती है तो उस हालत में दिल्ली में अरविंद केजरीवाल की सरकार की विफलता के तौर पर भी इसे माना जाएगा.

ऐसी सूरत में केजरीवाल की पार्टी के भीतर बगावत के स्वर भी बुलंद हो सकते हैं. दूसरी तरफ, बीजेपी दिल्ली में नैतिक और राजनीतिक रूप से अपने आप को ज्यादा बड़ी ताकत के रूप में पेश कर सकेगी.

बीजेपी के भीतर की सियासत के लिहाज से भी इस जीत का बड़ा महत्व होगा. सांसद मनोज तिवारी को अध्यक्ष बनाए जाने के बाद पहली बार दिल्ली में एमसीडी का चुनाव हो रहा है.

ऐसे में बीजेपी की जीत का सेहरा मनोज तिवारी के सिर भी बंधेगा और इस जीत के बाद मनोज तिवारी का कद पार्टी के भीतर और भी बड़ा हो जाएगा.

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