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एमसीडी चुनाव: दिल्ली कांग्रेस में बगावत के स्वर उत्तराखंड जैसा हाल न कर दे

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन पर टिकट बंटवारे को लेकर रोज नए आरोप लगाए जा रहे हैं

Ravishankar Singh Ravishankar Singh Updated On: Apr 06, 2017 08:24 AM IST

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एमसीडी चुनाव: दिल्ली कांग्रेस में बगावत के स्वर उत्तराखंड जैसा हाल न कर दे

एमसीडी चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर कांग्रेस पार्टी में मचे घमासान का अंत होता नहीं दिखाई दे रहा है. पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी अब खुलकर सामने आ गई है.

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन पर टिकट बंटवारे को लेकर रोज नए आरोप लगाए जा रहे हैं. शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे कई नेताओं ने अजय माकन के विरोध में आवाज बुलंद कर दी है.

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ऐसा माना जा रहा है कि दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित भी एमसीडी चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर नाराज चल रही हैं. शीला दीक्षित सहित कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के सुझावों की अनदेखी का आरोप अजय माकन पर लग रहे हैं.

शीला दीक्षित के करीबी रहे हैं मंगतराम

Sheila-Dixit

शीला दीक्षित सरकार में उद्योग मंत्री रहे मंगत राम सिंघल ने बुधवार को मीडिया से बात करते हुए अजय माकन पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. मंगत राम सिंघल ने खुलेआम मीडिया के सामने अजय माकन पर टिकट बेचने का आरोप लगाया. सिंघल ने कांग्रेस आलाकमान से अजय माकन को हटाने की मांग की है.

मंगत राम सिंघल एक समय शीला दीक्षित गुट के काफी प्रभावशाली नेता रहे हैं. मंगत राम सिंघल से पहले भी दिल्ली के कई कद्दावर नेताओं और पूर्व मंत्रियों ने अजय माकन के काम करने के तरीके पर सवाल खड़े किए हैं.

ए के वालिया, हारुन यूसुफ, अमरिंदर सिंह लवली, संदीप दीक्षित जैसे कुछ बड़े नाम हैं जिनके बारे में कहा जाता है कि वह अजय माकन के काम करने के तरीके से नाराज चल रहे हैं.

दिल्ली विधानसभा के पूर्व उपाध्यक्ष और कांग्रेस नेता अमरीश गौतम तो नाराजगी जाहिर करते हुए बीजेपी में भी शामिल हो गए. टिकट कटने से नाराज कांग्रेस के कई मौजूदा पार्षद निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतर आए हैं.

दूसरी तरफ कांग्रेस सूत्रों से खबर मिली है कि दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने भी विरोधी नेताओं की एक लिस्ट पार्टी आलाकमान को सौंपी है. दिल्ली की शीला दीक्षित सरकार में मंत्री रहे कई नेताओं पर एमसीडी चुनाव में पार्टी को हरवाने के आरोप लगाए गए हैं.

गौरतलब है कि देश में हाल के कुछ राज्यों में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की लगातार हार हुई है. ऐसे में दिल्ली कांग्रेस का भी हाल उत्तराखंड जैसा नहीं हो जाए, इसका डर पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को सता रहा है.

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हाल ही में संपन्न हुए उत्तराखंड विधानसभा में कांग्रेस की हार की मुख्य वजह पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं का पार्टी छोड़ कर चले जाना भी था.

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन और शीला दीक्षित की अदावत काफी पुराना है. जब शीला दीक्षित दिल्ली की मुख्यमंत्री थी, तब भी अजय माकन उनके विरोधी खेमे के माने जाते थे. राहुल गांधी से नजदीकी की वजह से अजय माकन को तब केंद्र में खेल राज्य मंत्री का स्वतंत्र प्रभार दे दिया गया था.

शीला दीक्षित की नेतृत्व में लड़े गई दिल्ली विधानसभा में पार्टी की हार के बाद अजय माकन फिर मजबूत होने लगे. यूपीए-2 के आखिरी सालों में राहुल गांधी ने अजय माकन को मंत्री पद से इस्तीफा दिला कर पार्टी संगठन का जिम्मा सौंपा. अजय माकन कांग्रेस के मीडिया प्रभारी बनाए गए. बाद में फिर हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में अजय माकन को दिल्ली कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया.

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कांग्रेस के कई नेताओं ने दबी जुबान में बोलना शुरू कर दिया है कि दिल्ली की हालत उत्तराखंड से भी ज्यादा खतरनाक हो गई है. जिस तरह से राहुल गांधी ने हरीश रावत को खुली छूट दे दी थी, वैसे ही हालात दिल्ली में हो गए हैं.

उत्तराखंड के एक दर्जन से भी ज्यादा नेताओं की कहीं सुनवाई नहीं हो रही थी. नतीजा यह हुआ है कि सबके सब बीजेपी में चले गए, जो पार्टी की हार का सबसे बड़ा कारण बना.

उत्तराखंड की तरह ही दिल्ली के भी हालात बनते जा रहे हैं. जिस तरह से इतने विरोध के बाद भी राहुल गांधी का वरदहस्त अजय माकन को हासिह है, उससे पार्टी को आने वाले दिनों में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

इन घटनाओं से अंजान नहीं हैं राहुल

Rahul Gandhi

ऐसा नहीं है कि राहुल गांधी इन सारे घटनाक्रमों से अंजान हैं. राहुल गांधी भी एमसीडी चुनाव के जरिए अजय माकन को परख रहे हैं. ऐसा माना जा रहा है कि राहुल गांधी पार्टी असंतुष्ट नेताओं से बातचीत कर एमसीडी चुनाव तक उन्हें मनाने की कोशिश करेंगे.

एमसीडी चुनाव में अगर अजय माकन का प्रदर्शन ठीक रहा तो उनका कद और बढ़ जाएगा. और अगर प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा तो उनका प्रदेश अध्यक्ष पद से जाना भी तय माना जा रहा है.

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