S M L

नेशनल हेराल्ड केस: 'विपक्षी एकता' के कांग्रेसी अरमान पर फैसले ने फेरा पानी

पार्टी के सामने सबसे बड़ा संकट तो गांधी-नेहरू परिवार से जुड़ा केस ऊपरी अदालत में हार जाने का है.

Sanjay Singh Updated On: May 13, 2017 08:14 AM IST

0
नेशनल हेराल्ड केस: 'विपक्षी एकता' के कांग्रेसी अरमान पर फैसले ने फेरा पानी

दिल्ली हाई कोर्ट ने इनकम टैक्स विभाग को सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ नेशनल हेराल्ड केस में जांच की इजाजत दे दी है. हाई कोर्ट का निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाना कांग्रेस और गांधी परिवार के लिए एक और बड़ा सियासी झटका है.

इससे कांग्रेस के लिए चौतरफा चुनौती खड़ी हो गई है. पार्टी के सामने सबसे बड़ा संकट तो गांधी-नेहरू परिवार से जुड़ा केस ऊपरी अदालत में हार जाने का है.

दूसरी चुनौती इनकम टैक्स विभाग की जांच है. जब इनकम टैक्स विभाग, कांग्रेस और गांधी परिवार के खातों की पड़ताल करेगा तो बात कहां तक पहुंच सकती है किसी को अंदाजा नहीं.

इस जांच में कई नई बातें भी सामने आ सकती हैं. इस वक्त जब केंद्र में मोदी सरकार बेहद मजबूत हालत में है ऐसे में कांग्रेस के किसी सनसनीखेज राज से पर्दा उठना पार्टी को गहरी चोट दे सकता है.

हाईकोर्ट के फैसले से जनता का वो शक गहरा हो गया है कि नेशनल हेराल्ड मामले में गांधी-नेहरू परिवार ने कुछ गलत काम किए. ये पार्टी के लिए एक और परेशानी की बात है.

कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी मुसीबत ये है कि पार्टी इस वक्त राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी एकता की कोशिश कर रही थी. इसके लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को आगे करके उनकी इमेज की मदद लेने की कांग्रेस के रणनीतिकार कोशिश कर रहे थे.

SoniaGandhi_Birthday

सोनिया का सहयोगी दलों के साथ मिलकर राष्ट्रपति उम्मीदवार खड़ा करने की कोशिश को झटका

राष्ट्रपति चुनाव

सोनिया ने कई विपक्षी नेताओं के साथ राष्ट्रपति चुनाव में साझा उम्मीदवार उतारने को लेकर मशविरा किया था. गंगाराम अस्पताल में भर्ती होने पर भी सोनिया गांधी संभावित यूपीए-3 की अगुवा के तौर पर देखी जा रही थीं.

कांग्रेस के लिए हाईकोर्ट का आदेश इससे बुरे वक्त पर नहीं आ सकता था. नेशनल हेराल्ड केस में इस वक्त राहुल और सोनिया गांधी जमानत पर हैं. उन पर धोखाधड़ी और भरोसा तोड़ने के आरोप हैं.

सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास यंग इंडिया कंपनी के 76 फीसद यानी 38-38 फीसद शेयर हैं. बाकी के 24 प्रतिशत शेयर गांधी परिवार के वफादार मोतीलाल वोरा, ऑस्कर फर्नांडिस, सुमन दूबे और सैम पित्रोदा के पास हैं.

इस मामले में याचिका सुब्रमण्यन स्वामी ने दाखिल की थी. उनका आरोप था कि सोनिया-राहुल ने गैरवाजिब तरीकों से नेशनल हेराल्ड अखबार की मालिक कंपनी एसोसिएटेड जर्नलिस्ट लिमिटेड पर मालिकाना हक जमा लिया था.

ये भी पढ़ें: राहुल सोनिया को बड़ा झटका, होगी इनकम टैक्स की जांच

आरोपों का लब्बो-लुबाब ये है कि भले ही नेशनल हेराल्ड अखबार बंद हो गया था मगर इसके पास देश के कई शहरों में अहम ठिकानों पर करीब दो हजार करोड़ की अचल संपत्ति थी. सोनिया और राहुल ने कांग्रेस के नेताओं के साथ मिलकर गैरकानूनी तरीके से इस संपत्ति पर कब्जा जमा लिया.

इस वक्त कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का हौसला बेहद कमजोर है. राहुल गांधी को लेकर तमाम शोर-शराबे के बावजूद यूपी में कांग्रेस दहाई के आंकड़े तक भी नहीं पहुंच सकी. वहीं पार्टी ज्यादा सीटें जीतने के बावजूद गोवा और मणिपुर में सरकार नहीं बना सकी.

देश के अलग-अलग राज्यों में हुए स्थानीय निकाय के चुनावों में भी कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है.

कांग्रेस वर्किंग कमेटी की मांग के बावजूद राहुल गांधी अध्यक्ष का पद संभालने के लिए राजी नहीं हैं. राहुल की चौतरफा चुनावी नाकामियों, रॉबर्ट वाड्रा के जमीन के मामले और कई जमीन सौदों में प्रियंका वाड्रा का नाम आने की वजह से कांग्रेस की मुश्किलें और बढ़ गई हैं.

Rahul-Sonia

दोनों मां-बेटे इस केस में फिलहाल जमानत पर रिहा हैं

जमानत पर रिहा हैं राहुल-सोनिया

जब 19 दिसंबर 2015 को राहुल गांधी ने जमानत का बॉन्ड भरा था तो प्रियंका ने उनकी जमानत ली थी. राहुल को दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट से जमानत मिली थी. सोनिया गांधी के जमानतदार पूर्व रक्षामंत्री एके एंटनी बने थे.

जिस वक्त सोनिया और राहुल गांधी को अदालत में पेश होना पड़ा था वो सैकड़ों कांग्रेस समर्थकों के हुजूम के साथ कोर्ट पहुंचे थे. पहले तो सोनिया और राहुल ने निजी तौर पर पेशी से छूट के लिए हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से रियायत मांगी थी. मगर ऐसा नहीं हो सका था.

समर्थकों की नारेबाजी के शोर के बीच सोनिया और राहुल ने अदालत में हाजिरी लगाई थी.

भले ही ये कानूनी मामला था मगर इसे सियासी मुद्दा बनाकर कांग्रेस ने 2015 में संसद के पूरे शीतकालीन सत्र में हंगामा किया था. राहत की बात ये है कि इस वक्त संसद का कोई सत्र नहीं चल रहा था. संसद का अगला सेशन यानी मॉनसून सत्र जुलाई में शुरू होगा.

ये भी पढ़ें: मोदी विरोध की इमारत कैसे बनेगी जब विपक्ष की जमीन ही खिसकी हुई है

कांग्रेस के लिए दिक्कत ये है कि उसके कुछ संभावित और मौजूदा सहयोगी भी भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे हैं. हाल के दिनों में आरजेडी, बीएसपी और टीएमसी के नेताओं के ऊपर तमाम गैरकानूनी काम करने के आरोप लगे हैं.

इन पार्टियों के भ्रष्टाचार को लेकर कई सनसनीखेज बातें सामने आई हैं. कांग्रेस के लिए इस वक्त राहत की सिर्फ एक ही बात है. सोनिया और राहुल की वकालत करने वाले अभिषेक मनु सिंघवी जब शुक्रवार शाम को मीडिया से मुखातिब हुए तो बहुत खुश लग रहे थे.

सिंघवी ने दावा किया कि इनकम टैक्स विभाग को जांच का आदेश देने का हाईकोर्ट का फैसला कांग्रेस के हक में है. सिंघवी ही हाईकोर्ट में सोनिया और राहुल की तरफ से जिरह के लिए पेश हुए थे.

हालांकि, अदालत ने उनके तर्क खारिज कर दिए थे फिर भी सिंघवी का दावा  है कि अदालत के फैसले से उनका पक्ष मजबूत ही हुआ है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi