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मोदी पर बदजुबानी: आखिर गलतियों से क्यों नहीं सीखते कांग्रेसी?

कांग्रेसी नेताओं की मोदी के बारे में की गई टिप्पणी को बीजेपी फिर से गुजराती अस्मिता से जोड़ने में सफल हो गई तो कांग्रेस की गुजरात में वापसी का इंतजार और लंबा हो सकता है

Amitesh Amitesh Updated On: Sep 18, 2017 05:48 PM IST

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मोदी पर बदजुबानी: आखिर गलतियों से क्यों नहीं सीखते कांग्रेसी?

लगता है कांग्रेस के नेता इतिहास से सबक लेने के मूड में नहीं हैं. जिन गलतियों के कारण उन्हें कई मोर्चों पर हार का सामना करना पड़ा उन्हीं गलतियों को फिर से दोहराते दिख रहे हैं.

कांग्रेस नेता और पूर्व सूचना-प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बारे में किए गए अमर्यादित ट्वीट देखकर तो यही लग रहा है. मनीष तिवारी ने अपने ट्वीट में मोदी और मोदी समर्थकों के लिए जिस भाषा का इस्तेमाल किया है, उसे किसी भी तरह से जायज नहीं ठहराया जा सकता.

हालांकि मनीष तिवारी पहले भी इस तरह के बयान देते रहे हैं. अन्ना आंदोलन के वक्त भी मनीष तिवारी ने कुछ इसी अंदाज में अन्ना पर हमला किया था, जिसकी वजह से कांग्रेस को भारी सियासी नुकसान भी हुआ था.

मनीष तिवारी ने तब कहा था कि 'तुम किस मुंह से भ्रष्टाचार की बात करते हो, जबकि तुम खुद सिर से पांव तक भ्रष्टाचार में डूबे हुए हो. ये बात हम नहीं कहते, बल्कि उच्चतम न्यायालय के एक न्यायाधीश की अगुवाई में बना हुआ जांच आयोग कहता है.'

लेकिन मनीष तिवारी गलतियों से सबक लेते नहीं दिख रहे हैं. तमाम राजनीतिक विरोध और विचारधारा के स्तर पर टकराव के बावजूद धुर-विरोधी भी एक-दूसरे को जन्मदिन के मौके पर बधाई देते रहे हैं. लेकिन, यहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री के जन्मदिन के मौके पर कुछ इस अंदाज में ट्वीट करते नजर आए जिसे देखकर उनकी राजनीतिक परिपक्वता पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं.

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पिछले हफ्ते ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर ऐसा ही ट्वीट किया था. दिग्विजय के ट्वीट को लेकर भी काफी आलोचना हुई थी. उनकी भाषा पर सवाल भी उठे थे.

लेकिन, कांग्रेसी नेताओं को इससे लगता है कोई फर्क नहीं पड़ता दिख रहा है. अगर फर्क पड़ता तो फिर मनीष तिवारी भी दिग्विजय सिंह की भाषा नहीं बोल रहे होते.

digvijaya singh narendra modi

बयानों से मोदी को होता है फायदा

कांग्रेसी नेताओं की राजनीतिक सूझ-बूझ पर सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि जब-जब कांग्रेस के नेताओं ने मोदी पर इस तरह का व्यक्तिगत हमला बोला है तब-तब फायदा मोदी को ही हुआ है. कांग्रेसी नेताओं की तरफ से किए गए ‘बिलो द बेल्ट’ वार ने मोदी को और मजबूत ही बनाया है.

2007 के गुजरात विधानसभा चुनाव के वक्त नवसारी जिले में चिकली की एक रैली में कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने मोदी के लिए मौत का सौदागर वाला बयान दिया था. सोनिया ने कहा था कि ‘इस वक्त गुजरात में जो लोग शासन कर रहे हैं वो बेईमान और मौत के सौदागर हैं.’

सोनिया गांधी के इस बयान का मोदी ने खूब फायदा उठाया. उस वक्त गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस बयान को गुजराती अस्मिता से जोड़ दिया था. मोदी को सत्ता से बेदखल करने की कांग्रेस की सारी रणनीति धरी की धरी रह गई.

गुजरात विधानसभा चुनाव जीतने के बाद मौत का सौदागर वाले बयान पर  मोदी की तो वाहवाही होने लगी. जनवरी 2008 में चेन्नई के एक कार्यक्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ पत्रकार चो रामास्वामी ने मोदी को आतंकवाद के खिलाफ, भ्रष्टाचार के खिलाफ, अधिकारियों के नकारापन के खिलाफ, अंधकार और हताशा के खिलाफ मौत का सौदागर बताया था.

उस वक्त लगा कि कांग्रेस अपनी गलतियों से सबक लेगी. लेकिन, कांग्रेस गलतियों से सबक लेने के बजाए आगे गलती पर गलती करती गई. जब 2014 के लोकसभा चुनाव के वक्त नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर दिया गया था, उस वक्त कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने भी कुछ ऐसी ही गलती कर दी थी.

मणिशंकर का बयान पड़ा था कांग्रेस पर भारी

जनवरी 2014 में दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में कांग्रेस का बड़ा अधिवेशन हो रहा था, कोशिश थी कि कैसे कार्यकर्ताओं में उर्जा का संचार कर मोदी से मुकाबला के लिए तैयार किया जाए. लेकिन, कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने ऐसा बयान दिया कि अधिवेशन का पूरा एजेंडा ही मोदी केंद्रित हो गया. यहां भी चर्चा मोदी की ही होने लगी. उस अधिवेशन में मणिशंकर अय्यर ने मोदी को अधिवेशन के बाहर चाय का स्टाल लगाने की सलाह दी थी.

मणिशंकर अय्यर ने कहा था ‘21वीं सदी में वह (मोदी) प्रधानमंत्री बन पाएं, ऐसा मुमकिन नहीं है... लेकिन यदि वह यहां (कांग्रेस अधिवेशन में) आकर चाय बेचना चाहें तो हम उनके लिए जगह बना सकते हैं.’

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मोदी ने इस बयान को लोकसभा चुनाव के दौरान खूब भुनाया था. बीजेपी जनता को यह बताने की कोशिश करने लगी कि जब एक चाय बेचने वाले का बेटा देश के प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार है तो कांग्रेस के लोग उस बात को पचा नहीं पा रहे. मणिशंकर अय्यर का बयान कांग्रेस की गले की हड्डी बन गया था.

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लेकिन, लोकसभा चुनाव में करारी हार के बावजूद भी लगता है पिछली गलतियों से कांग्रेस के नेता सबक लेते नहीं दिख रहे हैं. उनकी तरफ से वही गलती फिर से दोहराई जा रही है.

बीजेपी के मुखपत्र कमल संदेश के कार्यकारी संपादक डॉ. शिवशक्ति बख्शी कांग्रेस नेताओं की बदजुबानी को उनका मानसिक दिवालियापन बता रहे हैं. शिवशक्ति बख्शी ने फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में कहा कि  ‘कांग्रेस के पास देश के लिए ना कोई एजेंडा है, ना विजन. कांग्रेस मोदी विरोध पर राजनीति करना चाहती है. अपशब्दों का प्रयोग कर ये अपने मानसिक दिवालियापन का परिचय दे रहे हैं. पहले भी जनता ने इन्हें इसी भाषा के लिए चुनावों में धूल चटाया था. आने वाले दिनों में इन्हें और कड़ा सबक मिलेगा.’

अब गुजरात में दो महीने बाद विधानसभा का चुनाव होना है लेकिन, कांग्रेसी नेताओं की तरफ से मोदी के बारे में की गई टिप्पणी को बीजेपी फिर से गुजराती अस्मिता से जोड़ने में सफल हो गई तो कांग्रेस की गुजरात में वापसी का इंतजार और लंबा हो सकता है.

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