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रेनकोट स्नान कला के आदर्श हैं शिवराज चौहान!

पचमढ़ी के प्रशिक्षण शिविर में मुख्यमंत्री ने अपने विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को जमीन-दुकान के चक्कर में नहीं पड़ने की सलाह दी

Dinesh Gupta Updated On: Feb 21, 2017 07:14 PM IST

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रेनकोट स्नान कला के आदर्श हैं शिवराज चौहान!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते हैं कि ‘न खाउंगा और न खाने दूंगा’. इसके विपरीत मोदी की पार्टी के ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपनी पार्टी के विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को कुछ अलग ही ‘गुरू मंत्र’ दिया है.

मुख्यमंत्री ने कहा कि, ‘खाओ और कमाओ ऐसे कि जनता की नजर में न आए’. उन्होंने सलाह दी कि विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं को जमीन-दुकान के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए. यह जनता की नजर में आ जाता है.

मध्य प्रदेश भाजपा के प्रवक्ता दीपक विजयवर्गीय ने पचमढ़ी के प्रशिक्षण में मुख्यमंत्री के मकान दुकान संबंधी बयान पर कहा कि बैठक में सोशल मीडिया के उपयोग पर चर्चा हुई. मकान दुकान संबंधी खबरें तथ्यों पर आधारित नहीं है.

मुख्यमंत्री ने यह सलाह पचमढ़ी में विधायकों के लिए आयोजित किए गए प्रशिक्षण शिविर में दी. शिवराज ने खुद अपना उदाहरण देते हुए कहा कि, 'मैंने संयुक्त परिवार से अपने आपको अलग कर लिया है. संयुक्त परिवार होने से कोई भी सदस्य बाहर से भी फोन लगाकर कह सकता था कि मैं सीएम हाउस से बोल रहा हूं'.

फौरन पल्ला झाड़ लिया

यहां यह बताना जरूरी है कि हाल ही में सीहोर जिले के खनिज विभाग ने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के भतीजे प्रद्युमन सिंह के डंपर अवैध रेत खनन के मामले में जब्त किए थे. मुख्यमंत्री ने फौरन इससे अपना पल्ला झाड़ लिया था. जबकि शिवराज के मुख्यमंत्री बनने से पहले तक परिवार के किसी भाई-भतीजे के पास डंपर नहीं था.

Modi and Shivraj

पीएम नरेंद्र मोदी पूर्व में कई बार शिवराज सिंह चौहान के कामकाज की तारीफ कर चुके हैं

मुख्यमंत्री ने अपना उदाहरण देते हुए विधायकों को समझाया कि मैने फूलों की खेती की. मुझ पर कोई उंगली नहीं उठती. मुख्यमंत्री के खेत विदिशा जिले में हैं. इस बार उन्होंने अपने खेत में टमाटर के फसल लगाए थे. बाजार में इनकी कीमत न मिलने के कारण इन्हें सड़क पर फेंकने पड़े थे. वन मंत्री डॉक्टर गौरीशंकर शेजवार फलों की खेती करते हैं. मुख्यमंत्री ने उनका उदाहरण भी एक आदर्श नेता के तौर पर दिया.

शिवराज सिंह चौहान अपने भाषणों में अक्सर इस बात का जिक्र करते हैं कि उनकी सरकार का फोकस खेती को लाभ का धंधा बनाने पर है. मुख्यमंत्री के लगातार ऐसे बयानों के बाद भी प्रदेश में खेती लाभ का धंधा नहीं बन सका है. कर्ज में डूबे किसान खुदकुशी कर रहे हैं. दो दिन पहले हरदा में एक किसान ने आत्महत्या कर ली.

खनन माफिया पर लगाम नहीं

मुख्यमंत्री ने कुछ इसी तरह के बयान खनन माफिया के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी दिए थे. इसके बावजूद भी खनन माफिया पर लगाम नहीं कसा जा सका है.

शिवराज सिंह चौहान द्वारा विधायकों को दिए गए ‘गुरू मंत्र’ पर मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अरूण यादव ने कहा कि इसका मतलब मुख्यमंत्री कह रहें हैं कि कंबल ओढ़कर घी पिओ, ऐसे में मोदी जी के ‘ना खांउगा और ना खाने दूंगा’ वादे का क्या हुआ.

Shivraj Singh

शिवराज सिंह चौहान काफी लोकप्रिय मुख्यमंत्री के तौर पर जाने जाते हैं (फोटो: रॉयटर्स)

शिवराज सिंह चौहान के खाते में बीजेपी को लगातार तीसरी बार मध्य प्रदेश की सत्ता में बनाए रखने का श्रेय जाता है. मध्य प्रदेश बीजेपी के अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान कहते हैं कि, ‘बीजेपी शिवराज सिंह चौहान के तंबू के नीचे खड़ी है. नंदकुमार चौहान के बेटे हर्ष सिंह का नाम कटनी के हवाला कारोबारियों के साथ लिया जा रहा है. इस मामले की जांच प्रवर्तन निदेशालय कर रहा है.

नोटबंदी के बाद राज्य की महिला एवं बाल विकास मंत्री अर्चना चिटनीस के सहकारी बैंक में करोड़ों रूपए जमा होने की जांच भी इनकम टैक्स विभाग द्वारा की जा रही है.

कद लगातार बढ़ रहा

राजनीतिक तौर पर शिवराज सिंह चौहान का कद लगातार बढ़ रहा है. इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले दिनों अपने भोपाल प्रवास के दौरान संघ प्रमुख मोहन भागवत उनसे मिलने खुद मुख्यमंत्री निवास पहुंचे थे. संघ की परंपरा के अनुसार संवैधानिक पद पर बैठे स्वयं सेवक को भी प्रचारक से मिलने के लिए कार्यालय जाना होता है.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का यह 'गुरू मंत्र' कुछ उसी तरह का है जिस तरह एक दशक से पूर्व अपनी सरकार पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोपों पर तत्कालीन सीएम दिग्विजय सिंह ने कहा था कि आटे में नमक के बराबर भ्रष्टाचार चलता है.

Shivraj Singh

शिवराज सिंह चौहान की पत्नी साधना सिंह उनके कामों में बढ़-चढ़कर साथ देती हैं

मध्य प्रदेश में अगले साल के आखिर में विधानसभा के चुनाव होने हैं. विधायक तबादले और पोस्टिंग को लेकर सक्रिय हैं. मुख्यमंत्री का मानना है कि इस तरह के प्रयासों से जनता में छवि खराब होती है. छवि अच्छी रखने के लिए उन्होंने कहा कि, 'मीठा बोलो, कोई मुझे यदि मूत्र की थैली पकड़ा देता है तो भी मैं उसे मुस्कराते हुए हाथ में पकड़े रहता हूं.

 

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