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सृजन घोटाला: खुद को बेदाग कैसे साबित करेंगे नीतीश कुमार

शातिर दिमाग मनोरमा देवी सरकारी खजाने को लूटकर केवल 10 साल में अरबपति बन गई और सिस्टम टुकुर-टुकुर देखता रहा

Kanhaiya Bhelari Kanhaiya Bhelari Updated On: Aug 21, 2017 10:51 AM IST

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सृजन घोटाला: खुद को बेदाग कैसे साबित करेंगे नीतीश कुमार

भागलपुर का चर्चित सृजन घोटाला ‘हरि अनंत हरि कथा अनंता’ के अवतार में दिख रहा है. पापड़, चरौरी, दनौरी, तिलौड़ी बेचने और सिलाई-कढ़ाई सिखाने वाली शातिर दिमाग की मनोरमा देवी सरकारी खजाने को लूटकर केवल 10 साल में अरबपति बन गई और सिस्टम टुकुर-टुकुर देखता रहा.

कई छुटभैया नेता, सरकारी हुक्मरान भी करोड़पति बन गए

इस गड़बड़झाले में भागलपुर की गलियों में धूल फांकने वाले कई छुटभैया नेता और सरकारी हुक्मरान भी करोड़पति बन गए. लूट कितनी बड़ी है इसका अंदाजा इस पक्की खबर से लगाया जा सकता है कि घोटाले में गिरफ्तार 15 अभियुक्तों में से एक ने पिछले साल दीवाली पर एक प्रभावशाली व्यक्ति की बीवी को 40 लाख की हार गिफ्ट की थी. हीरा जड़ित सोने की हार भागलपुर में ही नेशनल फेम के एक ब्रांडेड ज्वेलरी शाॅप से खरीदी गई थी.

मनोरमा देवी को जनता के पैसे को लूटकर कुबेर बनाने में जिस बड़े नेता का सबसे बड़ा योगदान रहा है वो अब मीडिया को सफाई देते फिर रहे हैं कि ‘किसी के ललाट पर थोड़े न लिखा होता है कि वो चोर है.’ पाठकों की जानकारी के लिए बताना जरूरी है कि यह वही नेता जी हैं जिनके आवास से पुलिस ने 2014 में करोड़ों के कैश बरामद किए थे. जांच में पुलिस को पता चला है कि वह नोट सृजन से ही 'सृजित' किया गया था.

Srijan Scam

नेता जी बताएंगे कि क्या बिना ललाट की लिखावट पढ़े ही मनोरमा देवी का नाम देश की सम्मानित पुरस्कार पद्मश्री के लिए अनुमोदित कर-करवा दिया गया था? जानकारी के मुताबिक कम से कम 5 ओहदेदार नेताओं ने मनोरमा देवी का नाम अपने लेटर हेड पर लिखकर इस पुरस्कार के लिए रेकमेंड किया था. क्या बिना ललाट पढ़े ही ऐसा किया गया?

दरअसल, मनोरमा देवी के पास ऐसी ‘टॉफी‘ थी जिसे चखने के बाद नेता और हाकिम उसके गुलाम हो जाते थे. मदारी और खिलाड़ी दोनों को ही बराबर का फायदा होता था. जनता की गाढ़ी कमाई को लूटने और मिल-बांट कर खाने का मजा ही कुछ और है. रिस्क भी कम है और साथ ही हैंगओवर भी नहीं होता है.

कहते हैं कि सरकारी पैसे को सृजन के खाते में जमा कराने का फलदार आयडिया नेता जी का ही था. तब वो बिहार सरकार में अहम पद पर विराजमान थे. इस बातूनी माननीय के आग्रह पर ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 2008 में सृजन की ‘वीरांगना’ को सम्मानित करने के लिए पटना में आयाजित एक समारोह में शिरकत करने पहुंचे थे. कहते हैं सीएम को इसपर अफसोस हो रहा है. पर अब पछताए होत का, जब चिड़िया चुग गई खेत.

सृजन घोटाले के चार महत्वपूर्ण किरदार ‘फरार’ हैं

लगभग एक हजार करोड़ के सृजन घोटाले के चार महत्वपूर्ण किरदार ‘फरार’ हैं. ये हैं मनोरमा देवी के बेटे और बहू अमित कुमार और प्रिया कुमारी. इनके अलावा बाकी दो बीजेपी किसान प्रकोष्ठ के राज्य स्तरीय उपाध्यक्ष रहे विपिन शर्मा और एक ट्रैवल एजेंट निशांत है. जितनी मुंह उतनी बातें. किसी को ये बात हजम नहीं हो रही है कि ये चारों धुरंधर घोटालेबाज सरकार द्वारा गठित जांच टीम को चकमा देकर फुर्र हो जाएं. इसमें जरूर कोई पेंच है. कहीं किसी के दबाव में इन लोगों को भगाने के लिए सेफ पैसेज तो नहीं दिया गया?

बिहार सरकार ने घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को 17 अगस्त को सिफारिश कर दी है. अभी तक सीबीआई ने केस को टेकअप नहीं किया है. विपक्ष आरजेडी चाहती है कि चारा घोटाले की तरह सृजन घोटाले की भी जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो. आरजेडी के सीनियर नेता और पूर्व सांसद जगदानंद सिंह का आरोप है कि ‘सृजन स्कैम जिस समय हुआ है तब राज्य के सीएम और वित मंत्री नीतीश कुमार और सुशील कुमार मोदी थे. इन दोनों की जानकारी से ही इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया गया है’. जगदानंद सिंह यह भी दावा करते हैं कि ‘बतौर विधायक मैं विधानसभा में 2008 में ही खजाने की लूट की बात को सरकार के संज्ञान में लेकर आया था.‘

Jagdanand singh

आरजेडी नेता जगदानंद सिंह ने सृजन घोटाले को लेकर नीतीश कुमार और सुशील मोदी पर बड़े आरोप लगाए हैं

बहरहाल, अगस्त के पहले सप्ताह में घोटाला उजागर होने के बाद सीएम नीतीश कुमार ने फौरन कार्रवाई करते हुए एसआइटी की गठन की. चार्टर हवाईजहाज से जांच टीम को भागलपुर भेजा गया. एसआइटी चीफ जीतेंद्र सिंह गंगवार पूर्व में बतौर भागलपुर एसएसपी अनगिनत बार सृजन संस्था के समारोह में शरीक हो चुके हैं. उनकी पहचान एक सूझबूझ और पुलिसिया दांव-पेंच में माहिर एक जांबाज पुलिस ऑफिसर के तौर पर होती है. उम्मीद की जाती है कि वह घोटालेबाजों को कोई रियायत नहीं देंगे. सरकार का फैसला है कि सीबीआई जांच के बावजूद भी एसआइटी अपने स्तर पर जांच जारी रखेगा.

अभियुक्तों ने राजनीतिक दलों की तीमारदारी में पैसे खर्च किए

फरार चारों अभियुक्तों के पास घोटाले से जुड़ी काफी जानकारी है कि किस तरह से सरकारी खजाने को चूना लगया गया. किन-किन अफसरों और सफेदपोश लोगों ने इसमें डुबकी लगाई है. पता चला है कि ट्रैवल एजेंट निशांत ने सृजन के खाते के पैसे से अलग-अलग राजनीतिक दलों के दर्जन भर बड़े नेताओं के परिवारवालों को देश-विदेश में सैर-सपाटे के लिए हवाई जहाज की टिकटों का इंतजाम किया.

पहले इनमें से कई नेताओं की माली हालत खस्ताहाल थी पर आज कई लोकसभा में पहुंच चुके हैं. एक कर्मकांडी नेता, जिसने एक बार आई प्राकृतिक आपदा के समय खुद को बचाने के लिए अपने सगे रिश्तेदार और सिक्योरिटी जवानों को मरने के लिए छोड़ दिया था, ने तो परिवार के तीर्थ यात्रा के लिए भी सृजन से पेमेंट करवाया है.

जवानी के दिनों में ये नेताजी राजधानी पटना के राजेंद्र नगर इलाके में रहते थे. किराये के लिए एक बार मकान मालिक से इनकी जमकर मारपीट हुई थी. ये खबर पटना के अखबारों में प्रमुखता से छपी थी. बिहार सरकार में जब मंत्री थे तो इन्होंने अपने परिवार के सारे सदस्यों को बिरला सन लाइफ इंश्योरेंस कंपनी का एजेंट बनवाकर विभाग के सारे मुलाजिमों को जबरन पॉलिसी दिलवाए थे.

sushil kumar modi

बिहार के डिप्टी सीएम सुशील मोदी पर सृजन घोटाले के आरोपियों से सांठगांठ रखने के आरोप लग रहे हैं

घोटाले के एक और मजबूत किरदार हैं जो अंग प्रदेश के नागरिकों के बीच भांजते रहते हैं कि ‘मेरा कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता है.’ जनाब के बड़े भाई नीतीश कुमार के परम मित्र हैं और कहते हैं इस दोस्ती का नाजायज फायदा उठाकर वो सृजन से माल अर्जित कर झारखंड के कई शहरों, जिनमें बाबा की नगरी देवघर भी शामिल है, में रियल एस्टेट में इनवेस्ट किए हैं.

नीतीश कुमार ने सृजन घोटाले की जांच CBI को रेफर कर दिया

बिहार के सत्ता के गलियारे में चर्चा है कि नीतीश कुमार को जब एसआईटी हेड जी एस गंगवार ने घोटाले से जुड़े गुरु घंटालों की लिस्ट दी तो सीएम के होश उड़ गए. कहते हैं कि छवि के प्रति सजग नीतीश कुमार ने उसी समय मन बनाया कि ‘सांप की माला’ पहनने से बेहतर है कि मामले को सीबीआई को रेफर कर दिया जाए.

भागलपुर के एक जनकवि की सलाह है कि जब तक सीबीआई इस मामले में गुनहगारों को बेनकाब नहीं कर देती तब तक लुटी हुई जनता यही गीत गाती-गुनगुनाती रहे कि ‘हमें तो लूट लिया मिल के सब दल वालों ने. गोरे-गोरे गालों ने और काले-काले बालों ने.'

( लेखक के निजी सूत्रों पर आधारित)

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