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यमुना सफाई विवाद: एनजीटी और श्रीश्री रविशंकर के बीच घमासान शुरू

श्री श्री रविशंकर की फेसबुक पोस्ट के बाद और तेज हुआ विवाद

Ravishankar Singh Ravishankar Singh | Published On: Apr 27, 2017 11:17 PM IST | Updated On: Apr 27, 2017 11:17 PM IST

यमुना सफाई विवाद: एनजीटी और श्रीश्री रविशंकर के बीच घमासान शुरू

पिछले साल दिल्ली के यमुना किनारे हुए विश्व सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन को लेकर श्रीश्री रविशंकर और एनजीटी(नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल) के बीच टकराव बढ़ गया है. एनजीटी ने आध्यात्मिक गुरु श्रीश्री रविशंकर के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी किया है.

पिछले कुछ दिनों से एनजीटी और श्रीश्री रविशंकर के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा था. आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी होना इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है.

श्रीश्री रविशंकर ने एनजीटी पर कई आरोप लगाए थे. नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल ने पिछले साल आर्ट ऑफ लिविंग को यमुना किनारे सांस्कृतिक महोत्सव के आयोजन की अनुमति दी थी. यह महोत्सव दिल्ली के यमुना किनारे आयोजित किया गया था.

श्रीश्री रविशंकर ने ट्रीब्यूनल के एक्सपर्ट कमेटी पर पूर्वाग्रह से प्रेरित होने का आरोप लगाया था. जिसके बाद एनजीटी ने आर्ट ऑफ लीविंग को कहा था कि उनका रवैया गैरजिम्मेदाराना है. एनजीटी ने कहा कि श्रीश्री रविशंकर को जो भी मन में आए बोल नहीं सकते.

फेसबुक पोस्ट के जरिए एनजीटी पर लगाए आरोप

17 अप्रैल को श्रीश्री रविशंकर ने अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट लिखी थी कि जिसमें कहा गया था कि अगर विश्व सांस्कृतिक महोत्सव से पर्यावरण को नुकसान पहुंचा है तो इसके लिए सरकार और एनजीटी को जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए.

इसके साथ ही आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्रीश्री रविशंकर ने लिखा था कि एक एतिहासिक कार्यक्रम को अपराध की तरह पेश किया जा रहा है.

श्रीश्री रविशंकर के आरोप पर एनजीटी ने भी कहा कि पूर्वाग्रह का आरोप चौंकानेवाला है. श्रीश्री रविशंकर को कुछ भी बोलने की छूट नहीं मिली हुई है.

एनजीटी ने मामले की अगली सुनवाई 9 मई को तय की है. एनजीटी ने याचिकाकर्ता से कहा है कि वह श्रीश्री रविशंकर के बयानों का पूरा ब्यौरा दें ताकि उसको रिकॉर्ड में लिया जा सके.

रविशंकर के कार्यक्रम के बाद एनजीटी ने बनाई थी कमेटी

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एनजीटी ने श्रीश्री रविशंकर के कार्यक्रम के बाद पर्यावरण को कितना नुकसान पहुंचा है, यह जानने के लिए एक एक्सपर्ट कमिटी का गठन किया था. कमेटी ने सांस्कृतिक कार्यक्रम से यमुना ग्रीन एरिया के नुकसान की भरपाई में 13.29 करोड़ रुपए खर्च होने की बात की थी.

कमेटी ने जो रिपोर्ट तैयार की है उसमें कहा गया है कि महोत्सव की भरपाई के लिए 10 साल लग जाएंगे. पर्यावरण को जो नुकसान हुआ है उसके लिए बहुत काम करना पड़ेगा. रिपोर्ट में यमुना के दाएं किनारे लगभग 300 एकड़ और बाएं किनारे 120 एकड़ जमीन को भारी नुकसान पहुंचा है.

कमेटी की 47 पेज की रिपोर्ट में यह भी कह गया है कि लगभग 500 एकड़ जमीन की उपजाऊ क्षमता में भारी कमी आई है. जिस जगह पर आयोजन हुआ है और उसके नजदीक कई एकड़ जमीन अब पेड़ों और घासों को उपजाने लायक भी नहीं बची है.

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