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सीमा पर तनाव के बीच चीन ने नहीं दी भारत को स्वतंत्रता दिवस की बधाई

रक्षा सूत्र मानते हैं कि सीमा तनाव का मुद्दा अब सीमा पर बैठकों से कहीं आगे जा चुका है

FP Staff Updated On: Aug 15, 2017 08:24 PM IST

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सीमा पर तनाव के बीच चीन ने नहीं दी भारत को स्वतंत्रता दिवस की बधाई

डोकलाम विवाद से भारत-चीन रिश्तों में आई कड़वाहट के बीच सरहद की कई कूटनीतिक रस्में भी टूट रही हैं.

सीमा तनाव और संबंधों में तल्खी का ही नतीजा है कि बीते 1 अगस्त को जब चीनी सेना ने अपनी 90वीं सालगिरह का जश्न मनाया तो इस बार रस्मी बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (बीपीएम) के लिए भारत को कोई न्योता तक नहीं भेजा. इतना ही नहीं भारत की आजादी यानी 15 अगस्त को हुई बीपीएम की रस्म को भी दरकिनार कर दिया.

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कूटनीतिक सद्भावना निभाते हुए भारत की ओर से 15 अगस्त को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर स्वाधीनता दिवस कार्यक्रम और बीपीएम के लिए चीनी पीएलए सेना को न्यौता दिया गया था. बताया जाता है कि चीनी सेना ने इसमें शिरकत से असमर्थता जता दी. हालांकि चीन के इस रुख पर रक्षा मंत्रालय की ओर से कोई भी आधिकारिक टिप्पणी नहीं की गई है.

इस चुप्पी का ही सबूत था कि हर बार की तरह भारत-चीन बीपीएम बैठक पर इस बार रक्षा मंत्रालय की ओर से न तो कई तस्वीर जारी की गई और न ही प्रेस विज्ञप्ति. मगर, संयम का परिचय देते हुए भारतीय खेमा इस मामले को अधिक तूल देने से परहेज कर रहा है.

इससे पहले चीनी सेना की तरफ से इस बार 1 अगस्त को मनाए जाने वाले 'पीएलए डे' के लिए किसी बीपीएम बैठक का कोई न्यौता भी भारत को नहीं भेजा गया. जबकि यह सीमा-सौहार्द की परंपरा रही है कि दोनों मुल्क एक-दूसरे के राष्ट्रीय पर्व पर बधाई देने के लिए पहुंचते हैं.

मुलाकातें जारी रहती तो कम होता तनाव

इस बीच रक्षा सूत्र मानते हैं कि सीमा तनाव का यह मुद्दा अब सीमा पर बीपीएम बैठकों से कहीं आगे जा चुका है. मगर इतना जरूर है कि अगर बीपीएम बैठकों का सिलसिला और ऐसी रस्मी मुलाकातों का सिलसिला जारी रहता तो तनाव घटाने और माहौल को सुधारने में कुछ मदद जरूर मिलती.

जून 2017 में चीनी सैनिकों के कथित सड़क निर्माण कार्य को लेकर शुरु हुए डोकलाम विवाद को भी बॉर्डर पर्सनल मीटिंग से सुलझाने की कोशिश की गई.

डोकलाम विवाद को छोड़ दें तो भारत और चीन के बीच कमोबेश बीपीएम और फ्लैग मीटिंग की यह व्यवस्था ठीक तरीके से चलती भी आई है. इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि साल 2015 में भारत और चीन सेना के बीच 30 बीपीएम और 40 फ्लैग मीटिंग हुई.

सितंबर 2016 में पहली बार चुशूल के साथ-साथ दौलतबेग ओल्डी इलाके के चीनी क्षेत्र में पहली बार दोनों देशों के बीच बीपीएम आयोजित की गई थी. मौका था चीनी मिड ऑटम फेस्टिवल.

(साभार: न्यूज़18)

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