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चिदंबरम के राजनीतिक कर्मों का फल भोग रहे हैं कार्ति!

चिदंबरम नेता भी हैं और वकील भी. उन्हें अपने बेटे की करनी से पीछा छुड़ाने और अपना सियासी कद बचाने के लिए काफी दांव-पेंच चलने होंगे

Dinesh Unnikrishnan | Published On: May 16, 2017 04:53 PM IST | Updated On: May 16, 2017 04:53 PM IST

चिदंबरम के राजनीतिक कर्मों का फल भोग रहे हैं कार्ति!

कहते हैं कि कर्मों का फल भुगतना ही पड़ता है. पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदबंरम के मामले में ये बात एक बार फिर सच साबित हुई है. ये शायद पहली बार है कि पी चिदंबरम को सीबीआई के छापों का सामना करना पड़ रहा है.

इस बात की पूरी संभावना है कि दिग्गज कांग्रेसी नेता चिदंबरम अपने बेटे की करनी का फल भोग रहे हैं. और ये मामला सिर्फ मौजूदा आईएनएक्स केस तक सीमित नहीं है. ये लेख लिखे जाने तक सीबीआई ने चिदंबरम और उनके बेटे के चेन्नई स्थित घरों पर छापेमारी की है. सीबीआई की छापेमारी मंगलवार सुबह शुरू हुई. इस बारे में और जानकारी मिलने का अभी इंतजार है.

क्या है मामला?

जिस मामले में ये छापेमारी हुई है वो आईएनएक्स मीडिया कंपनी से जुड़ा हुआ है. आरोप है कि चिदंबरम जिस वक्त यूपीए सरकार में मंत्री थे उस वक्त कार्ती ने आईएनएक्स मीडिया को कई रियायतें दिलवाईं.

आरोप है कि आईएनएक्स मीडिया को क्लियरेंस दिलाने के बदले कार्ती ने दलाली खाई. हालांकि ये पहला मामला नहीं जब केंद्रीय जांच एजेंसियों ने चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई की है.

मीडिया में आई रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल में ही प्रवर्तन निदेशालय ने कार्ती चिदंबरम और एक कंपनी को नोटिस जारी किया था. उन पर विदेशी मुद्रा अधिनियम के खिलाफ जाकर 45 करोड़ रुपए की धांधली का आरोप था.

इस मामले की पिछले दो सालों से जांच चल रही थी. जिसमें चेन्नई की कंपनी वासन हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड पर विदेशी मुद्रा अधिनियम के तहत 2262 करोड़ की हेराफेरी का आरोप है.

आईएनएक्स मीडिया के अलावा भी हैं कई मामले

चिदंबरम और उनके बेटे पर सिर्फ आईएनएक्स मीडिया का केस नहीं है. कार्ती के खिलाफ एयरसेल-मैक्सिस के बीच हुए समझौते में भी अपनी कंपनियों के जरिए काफी फायदा कमाने का आरोप है.

कार्ती की कंपनी का नाम एडवांटेज स्ट्रैटेजिक कंसल्टिंग प्राइवेट लिमिटेड है. जब यह जांच आगे बढ़ेगी तो एयरसेल-मैक्सिस और विदेशी मुद्रा अधिनियम के उल्लंघन के मामले पी चिदंबरम के लिए बड़ा झटका साबित हो सकते हैं.

चिदंबरम के लिए मुसीबत ये है कि उनके बेटे पर जिस वक्त ये आरोप लगे, उस वक्त वो केंद्र में मंत्री थे. कार्ती पर लगे आरोपों में पी चिदंबरम का कितना रोल है, अभी इसकी पड़ताल हो रही है.

पिछले साल जब जुलाई में प्रवर्तन निदेशालय ने कार्ती चिदंबरम को पूछताछ के लिए तलब किया था, तो कहा गया था कि चिदंबरम और उनके बेटे की मुश्किलें आने वाले वक्त में और बढ़ सकती हैं.

क्या है एयरसेल-मैक्सिस केस

चिदंबरम और उनके बेटे के लिए बड़ी चुनौती एयरसेल-मैक्सिस डील है. ये पूरा मामला साल 2006 का है, जब एयरसेल कंपनी को उसके मालिक सी शिवशंकरन ने मैक्सिस को औने-पौने दाम पर बेच दिया. कहा जाता है कि शिवशंकरन ने ऐसा पूर्व केंद्रीय संचार मंत्री दयानिधि मारन के दबाव में किया. इसके बदले में मैक्सिस ने दयानिधि मारन के भाई कलानिधि मारन की कंपनी सन ग्रुप में 47 करोड़ रुपयों का निवेश किया.

कार्ती चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने अपनी कंपनी एडवांस कंसल्टिंग के जरिए ये सौदा कराया था. इस दौरान रिश्वत का भी लेन-देन हुआ. इस मामले में कार्ती के पास खुद के बचाव के लिए कुछ ठोस तर्क हैं, ऐसा लगता नहीं. न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी खास सीरीज के जरिए इस राज पर से पर्दा उठाया था.

अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्ती को ये बात साबित करनी होगी कि दुनिया भर में फैले उनके कारोबार को उन्होंने वाजिब जरिए से जमाया. कार्ती को अपनी कमाई और मुनाफे का ठोस जरिया और सबूत देना होगा.

साथ ही उन्हें तमाम बेनामी संपत्तियों में अपनी हिस्सेदारी को भी जायज साबित करना होगा. फिर जब पुराने मामले सामने आने शुरू होंगे तो बात फिर एयरसेल-मैक्सिस केस तक सीमित नहीं रहेगी.

जांच के जरिए चिदंबरम परिवार की बेपनाह बेनामी संपत्ति के बारे में पता लगाया जा रहा है. इस बारे में चिदंबरम और उनके बेटे को ठोस सफाई तैयार करके रखनी होगी.

कैसे हुई गड़बड़ी?

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक कार्ती ने होल्डिंग कंपनी ऑसब्रिज के जरिए ही एडवांटेज कंपनी में मालिकाना हक हासिल किया हुआ था. लेकिन खुद एडवांटेज कंपनी का मालिकाना हक बेनामी दिखाया गया था.

इस बेनामी मालिक ने बाद में वसीयत के जरिए कंपनी को कार्ती की बेटी के नाम कर दिया. जब इनकम टैक्स विभाग और प्रवर्तन निदेशालय की टीमों ने कार्ती के घर की तलाशी ली थी तो ये वसीयत कार्ती के पास ही मिली थी.

इस वक्त आखिर एडवांटेज कंपनी की कीमत कितनी है. एडवांटेज इंडिया इस वक्त वासन आई केयर कंपनी के डेढ़ लाख में से 90 हजार शेयरों की मालिक है. कंपनी ने ये शेयर 100 रुपए प्रति शेयर की दर से खरीदे थे.

रिपोर्ट के मुताबिक एडवांटेज कंपनी ने हर शेयर के लिए केवल 33 रुपए ही भुगतान किया. इसके बाद कंपनी ने 60 हजार शेयर करके, 30-30 हजार की दो किस्तों में, सिकोइया कैपिटल इनवेस्टमेंट को बेच दिए. ये मॉरिशस की इनवेस्टमेंट फंड कंपनी है.

कैसे हुई शेयरों की बिक्री?

पहली बार में तीस हजार शेयर 7500 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से बेचे गए. इनकी कीमत 22.5 करोड़ रुपए थी. अगर ये मान लें कि दूसरी बार भी 30 हजार शेयर इतने ही दाम में बेचे गए और बाकी के शेयरों की इतनी ही कीमत है, तो वासन आई केयर के शेयरों की कीमत 112.5 करोड़ रुपए बैठती है.

Chidambaram

मगर कार्ती ने इसे सिर्फ पचास लाख रुपए में खरीदा. सोचिए पचास लाख रुपए में खरीदे शेयर की कीमत असल में 112.5 करोड़ ठहरती है. इतना जबरदस्त मुनाफा कार्ती ने कमाया!

कार्ती का कारोबारी साम्राज्य कई देशों में फैला है. जैसे एडवांटेज की सिंगापुर इकाई यानी एडवांटेज सिंगापुर ने पंद्रह देशों में रियल एस्टेट में निवेश कर रखा है. हालांकि प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट के तहत प्रवर्तन निदेशालय इन सब निवेशों की जांच कर सकता है. इसमें वो दूसरे देशों की जांच एजेंसियों की भी मदद ले सकता है.

राजनैतिक बदले के तहत कार्रवाई?

जब भी कार्ती और उनके दोस्तों के खिलाफ जांच होती है तो पी चिदंबरम इसे मौजूदा बीजेपी सरकार की बदले की राजनीति करार देते हैं.

पूर्व वित्त मंत्री चिदंबरम ने कहा था कि, 'अगर सरकार मुझे निशाना बनाना चाहती है तो उसे सीधे मेरे ऊपर वार करना चाहिए, न कि मेरे बेटे और उसके दोस्तों को परेशान करना चाहिए. वो लोग अपना कारोबार करते हैं, उनका राजनीति से कोई वास्ता नहीं'.

लेकिन मामले का राजनीतिकरण करने का चिदंबरम का दांव शायद ही चले. क्योंकि उनकी पार्टी भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उनका बचाव करने से परहेज करेगी.

मोदी सरकार पर भी दवाब?

उधर मोदी सरकार पर भी दबाव है कि वो भ्रष्टाचार, खास तौर से नामचीन लोगों पर लगे आरोपों की जांच में कोई कोताही न करे. अपने तीन साल के राज में मोदी सरकार ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए शोहरत कमाई है.

सरकार इस मामले में भी अपनी इस छवि को नुकसान नहीं पहुंचने देना चाहेगी. सरकार ने चिदंबरम और उनके बेटे के खिलाफ पहले ही जांच एजेंसियों को खुली छूट दे रखी है.

इसमें एयरसेल-मैक्सिस की डील हो या दूसरे मामले. एक बार कार्ती ने मजाक में कहा था कि उनका एयरसेल-मैक्सिस मामले से सिर्फ इतना ताल्लुक है कि उनके पास एयरसेल का सिम कार्ड है.

हालांकि उनके इस मजाक को किसी ने गंभीरता से लिया हो, ऐसा लगता नहीं. दूसरे मामलों में भी चिदंबरम और उनके बेटे की मिलीभगत के आरोप को लोग हल्के में नहीं लेते.

चिदंबरम नेता भी हैं और वकील भी. उन्हें अपने बेटे की करनी से पीछा छुड़ाने और अपना सियासी कद बचाने के लिए काफी दांव-पेंच चलने होंगे.

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