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अगर पीएम मोदी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो सीएम केजरीवाल क्यों नहीं? 

सीबीआई ने मनीष सिसोदिया से ‘टॉक टू एके’ कार्यक्रम मामले में पूछताछ की है

Debobrat Ghose Debobrat Ghose | Published On: Jun 17, 2017 07:44 PM IST | Updated On: Jun 17, 2017 07:44 PM IST

अगर पीएम मोदी सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर सकते हैं, तो सीएम केजरीवाल क्यों नहीं? 

'अगर प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार ऐसा कर सकती है तो अरविंद केजरीवाल और उनकी लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई दिल्ली सरकार क्यों नहीं कर सकती?'

ये वो बुनियादी सवाल है, जो सोशल मीडिया के मंच से नागरिकों से संवाद करने के विवाद में आम आदमी पार्टी की दिल्ली सरकार पूछ रही है. आप सीधे तौर पर पीएम मोदी की सोशल मीडिया पर सक्रिय मौजूदगी का हवाला दे रही है. मिसाल के तौर पर ट्वीटर पर मोदी के 30 मिलियन फॉलोअर हैं.

दिल्ली सरकार की चिंता सिर्फ इतनी है कि उन्हें सोशल मीडिया पर जनता से संवाद करने से क्यों रोका जा रहा है?

विवाद उस समय शुरू हुआ जब शुक्रवार सुबह दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के मीडिया सलाहकार अरुणोदय प्रकाश ने एक ट्वीट किया. यह ट्वीट मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई के दौरे को लेकर था जिसमें सीबीआई ने उनसे ‘टॉक टू एके’ कार्यक्रम मामले में पूछताछ की.

प्रकाश ने ट्वीट किया, 'जब मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल अस्पतालों के निरीक्षण में व्यस्त हैं, केंद्र उत्पीड़न में व्यस्त है! उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई का छापा.'

सीबीआई की इस कार्रवाई ने देश की इस प्रमुख जांच एजेंसी की प्रत्यक्ष कार्यशैली को एक बार फिर चर्चा में ला खड़ा किया है.

Arvind kejriwal

आप विधायक और पार्टी की दिल्ली इकाई के सचिव सौरभ भारद्वाज ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा, 'टॉक टू एके अभियान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल का एक संवाद सत्र पर आधारित कार्यक्रम है, जिसके द्वारा जनता सोशल मीडिया, जैसे गूगल, फेसबुक, यू ट्यूब का इस्तेमाल कर उन तक पहुंच सकती है. हम प्रक्रिया के हरेक चरण में लागू नियमों और पारदर्शिता का पालन करते हैं. सीबीआई ने उपमुख्यमंत्री से पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग की एक शिकायत के आधार पर पूछताछ की, जिसका कोई ठोस आधार नहीं था.'

सौरभ ने सवाल किया, 'अगर पीएम मोदी ऐसा कर सकते हैं, तो लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई दिल्ली सरकार क्यों नहीं कर सकती.'

एलजी की शिकायत क्या थी?

उपमुख्यमंत्री कार्यालय के एक अधिकारी के मुताबिक, पूर्व लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग ने सीबीआई में एक शिकायत दर्ज कराई थी कि दिल्ली सरकार ने सोशल मीडिया पर जनसंपर्क का कार्यक्रम प्रसारित करने के लिए एक पीआर कंपनी को किराए पर लिया था, ताकि उसे वित्तीय लाभ पहुंचाया जा सके.

अधिकारी ने आगे कहा, 'पूर्व एलजी ने सीबीआई से कहा था कि वह पता करे कि क्या दिल्ली सरकार ने उस विशेष पीआर एजेंसी को कार्यक्रम के लिए वित्तीय लाभ पहुंचाने के मकसद से किराये पर लेने का प्रयास किया था. लेकिन इसके पीछे असली मकसद दिल्ली सरकार को तंग करना था.

Jung resigns

‘टॉक टू एके’ कार्यक्रम क्या है?

‘टॉक टू एके’ (टॉक टू अरविंद केजरीवाल) अभियान दिल्ली के मुख्यमंत्री का एक संवाद का सत्र था जिसमें सोशल मीडिया, जैसे-गूगल, फेसबुक और यू ट्यूब के जरिए जनता सीएम अरविंद केजरीवाल तक पहुंच सकती थी.

इसका मकसद सोशल मीडिया पर संवाद स्थापित कर अलग-अलग मुद्दों पर जनता के सवाल आमंत्रित करना था, जिनके जवाब अरविंद केजरीवाल को देने थे. मामले से संबंधित एक आधिकारिक टिप्पणी के मुताबिक, जो फ़र्स्टपोस्ट को मिली है, दिल्ली सरकार ने ‘टॉक टू एके’ अभियान के लिए दिलीप चेरियन की पीआर एजेंसी परफेक्ट रिलेशंस को किराए पर लिया था.

8 जुलाई2016 को कार्यक्रम तय था और दिल्ली सरकार ने अपने पब्लिसिटी विंग डायरेक्टरेट ऑफ इनफॉर्मेशन एंड पब्लिसिटी(डीआईपी) को इसकी तैयारियों में जुटने को कहा था.

पूर्व अनुभव की कमी के कारण डीआईपी ने सोशल मीडिया पर कार्यक्रम के प्रसार से हाथ खड़े कर दिए.

दिल्ली सरकार ने परफेक्ट रिलेशंस, जो पहले ही सरकार के साथ काम कर रही है, से कहा कि वह इसके लिये पहल करे जिसमें कई शर्तें थीं. जैसे- एजेंसी को इस काम के लिए एडवांस भुगतान नहीं होगा, कोई रियायत नहीं दी जाएगी, कोई कमीशन नहीं दिया जाएगा. वास्तविक राशि जो गूगल, फेसबुक वगैरह को भुगतान की जाएगी, वह एजेंसी को कार्यक्रम के बाद दी जाएगी.

डीआईपी के साथ पूर्व समझौते से अलग एजेंसी को किसी तरह का अतिरिक्त भुगतान नहीं किया जाएगा.

6 जुलाई को परफेक्ट रिलेशंस ने दिल्ली सरकार को अपना प्रस्ताव दिया.

8 जुलाई को डीआईपी ने कार्यक्रम से संबंधित फाइल संबंधित वित्त विभाग को फॉरवर्ड कर दी, जिसे 1 सितंबर को कैबिनेट ने स्वीकृति दे दी.

सीबीआई का क्या कहना है?

सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, मीडिया अभियान से जुड़े कामों को लेकर अनुचित तरीके अपनाने और नियमों-व्यवस्थाओं के उल्लंघन के आरोपों को लेकर आप नेताओं और दिल्ली सरकार के अधिकारियों के खिलाफ शुरुआती जांच दर्ज की गई थी. सीबीआई ने नई दिल्ली स्थित सिसोदिया के आवास पर छापे या तलाशी से इनकार किया.

एक सीबीआई अधिकारी ने आईएएनएस से कहा, 'टॉक टू एके’ कार्यक्रम ‘घोटाले' को लेकर दर्ज मामले में शुरुआती जांच के लिए अधिकारियों का एक दल सिसोदिया का बयान रिकॉर्ड करने के लिए उनके आवास पर गया था.

दिल्ली सरकार का क्या कहना है?

ArvindKejriwal-ManishSisodia

भारद्वाज ने कहा, 'चूंकि डीआईपी ने फेसबुक लाइव जैसी किसी परियोजना पर पहले कभी काम नहीं किया था इसलिए डीआईपी के माध्यम से इसकी जिम्मेदारी परफेक्ट रिलेशंस को दे दी गई. गूगल, एफबी, ट्वीटर, यू ट्यूब आदि के प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं और ये स्वतंत्र तरीके से काम करते हैं इसलिए उन्होंने टेंडर नहीं मांगे.

ये कंपनियां, भुगतान करो और सेवाएं लो, किस्म की हैं. हमारे भुगतान का तरीका उनके लिए स्वीकार्य नहीं है.

इसलिए, हमें उनके नियमों के मुताबिक ही चलना होगा. लेकिन हमने अपनी एजेंसी को यह साफ कर दिया कि भुगतान कार्यक्रम के बाद ही होगा. इस पूरी प्रक्रिया में कहीं भी कोई अनियमितता नहीं हुई.'

उन्होंने यह भी कहा, 'हमने केंद्र से इस संबंध में सुझाव मांगे थे कि सोशल मीडिया पर इस तरह के कार्यक्रम कैसे किए जाएं, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला.'

आप सरकार ने सीबीआई की पूछताछ को बदले की भावना से की गई कार्रवाई बताया है. इसे अनुचित बताते हुए आप सरकार ने सिसोदिया से सीबीआई की पूछताछ को, 'डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआई का छापा! मोदी सरकार द्वारा बदले की भावना का एक और मास्टर स्ट्रोक!' के रूप में व्याख्या की है.

अरुणोदय प्रकाश का आरोप है, 'पहले अरविंद केजरीवाल के दफ्तर पर छापा मारा गया. केंद्र पिंजड़े के तोते का इस्तेमाल अपने विरोधियों की आवाज दबाने के लिए कर रहा है. यह साफ तौर पर बदले की भावना से उठाया गया कदम है.'

दिसंबर 2015 में, सीबीआई ने प्रमुख सचिव राजिंदर कुमार पर आरोपों को लेकर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के दफ्तर पर छापा मारा था और इसे सील कर दिया था.

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