S M L

बीफ वाला बयान यूपी में भी दे सकते हैं मनोहर पर्रिकर?

पर्रिकर बीजेपी के नेता न होकर किसी विपक्षी पार्टी के नेता होते तो न जाने क्या होता

Arun Tiwari Arun Tiwari Updated On: Jul 20, 2017 05:33 PM IST

0
बीफ वाला बयान यूपी में भी दे सकते हैं मनोहर पर्रिकर?

भारत की विविधता को समझने के लिए इस समय केंद्र में सत्तासीन बीजेपी से बेहतर शायद ही कोई पाठशाला मौजूद हो. बीजेपी नेताओं के बयानों को 'भारत में विविधता : एक अध्ययन' का नामक किताब के रूप में प्रकाशित कराई सकती है. पार्टी नेता अपने बयान राज्य के हिसाब से बदलते हैं. यानी यूपी की गौमाता गोवा जाकर बीफ में तब्दील हो जाती हैं.

देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में गोमाता पार्टी एजेंडे में दूर-दूर तक नहीं दिखाई देतीं. जबकि पार्टी की बुनियादी नीति 'एक देश, एक विधान' पर चलती है.

देश के जिन राज्यों में गौवंश को लेकर थोड़ी भी संवेदनशीलता है वहां पर बीजेपी जबरदस्त तरीके से गौहत्या का विरोध करती है. सरकार आने के बाद अवैध बूचड़खाने बंद करने का निर्णय पार्टी एजेंडे में शीर्ष पर होता है. लेकिन जिन राज्यों में ऐसा नहीं है वहां बीजेपी बिलकुल उलट दिखाई देती है. मतलब पार्टी वही नेता भी वही, बस जगह बदली और बयान बदला. कई बार टीवी के दर्शक और अखबारी पाठक भी हैरान हो जाते हैं कि आखिर चल क्या रहा है?

Manohar Parrikar

गोवा में मनोहर पर्रिकर कह रहे हैं बीफ की कमी नहीं होगी

देशभर में मॉब लिंचिंग पर आलोचना झेल रही पार्टी के गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का बयान आया है कि गोवा में बीफ की कमी नहीं होने दी जाएगी. शुक्र है कि ये बयान मनोहर पर्रिकर ने किसी उत्तरी राज्य में नहीं दिया है. और ये भी शुक्र है कि वो एक ब्राह्मण नेता हैं. और ये भी सौभाग्य की बात है कि वो सीएम हैं. इसकी सिर्फ कल्पना ही की जा सकती है कि अगर पर्रिकर बीजेपी के नेता न होकर किसी विपक्षी पार्टी के नेता होते तो न जाने क्या होता? अल्पसंख्यक होते तो अल्ला ही मालिक था.

2015 में गृहराज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी ऐसा ही बयान देकर लोगों को आश्चर्य में डाल दिया था. उन्होंने कहा था कि मैं बीफ खाता हूं, मुझे इससे कौन रोक सकता है? हालांकि जब बाद भद पिटी तो उन्होंने सफाई दी कि मैंने ऐसा बयान नहीं दिया. मीडिया ने मेरे बयान तो तोड़-मरोड़ कर पेश किया. लेकिन उनके इस बयान की वजह से भी बीजेपी की खूब आलोचना हुई थी. किरेन रिजिजू के बयान के समय भी पार्टी आलाकमान ने दूरी बना ली थी. अब पर्रिकर के समय में भी यही हो रहा है.

MEAT

बीफ रखने मात्र के शक में जान ले ली गई

मनोहर पर्रिकर का बयान बीजेपी की तरफ आलोचनाओं को और भी ज्यादा इसलिए खींचता है क्योंकि नोएडा के अखलाक से लेकर राजस्थान के फाहिम खान तक सिर्फ इसलिए मार दिए गए क्योंकि इन पर गौमांस रखने मात्र को लेकर शक था.

मॉब लिंचिंग जैसे टर्म बीजेपी की सरकार के केंद्र में आने के बाद ही सुनाई देने शुरू हुए अन्यथा शायद ही किसी को याद हो कि भारत में गौमांस को लेकर मॉब लिंचिंग भी होती है.

हाल में मॉब लिंचिंग के विरोध में दिल्ली के जंतर-मंतर पर 'नॉटइनमाईनेम' के नाम तले सामाजिक संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया था जिसमें कई पार्टियों के नेता भी शामिल हुए थे.

बीजेपी के नेताओं को गौमांस को राजनीतिक मुद्दा बनाने को लेकर जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को जरूर याद करना चाहिए जिन्होंने एक देश एक कानून के लिए अपनी जान तक दे दी. लेकिन शायद पिछले छह-सात दशक के दौरान देश की राजनीति और खुद बीजेपी (पहले जनसंघ) की भी राजनीति में इतना बदलाव आ चुका है कि कोई सैद्धांतिक समीकरणों में फंसना नहीं चाहता. जहां जो मुद्दा जनता को मोटिवेट कर सकता है, उससे काम चलाया जा रहा है.

Manohar_Parrikar

बीजेपी के राज्य-दर-राज्य नए विधान

इसलिए जिन्हें इस बात पर यकीन हो कि भारत विविधताओं से भरा देश है उन्हें बीजेपी की राजनीति को गौर से देखना चाहिए. क्योंकि पार्टी राज्य दर राज्य नए विधान सिर्फ इसलिए कायम करना चाहती है कि उसका वोटबैंक न खिसके.

यानी बीजेपी की राजनीति देश की आम जनता लिए कश्मीर से कन्याकुमारी तक और गुजरात से सिक्किम तक राजनीति को समझने की एक पूरी किताब है. क्योंकि अगर मनोहर पर्रिकर से यही बयान गोवा की बजाए यूपी में देने के लिए कहा जाए तो शायद वो किनारा कर लेंगे. वो इसे यह कहते हुए शायद जायज भी ठहरा दें कि यूपी की संस्कृति और गोवा की संस्कृति में फर्क है.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi