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एमजीआर के बहाने बीजेपी की तमिलनाडु में पैर जमाने की कोशिश कितनी कारगर होगी?

तमिलनाडु की राजनीति का मौजूदा खालीपन बीजेपी के लिए माकूल माहौल बना रहा है, पार्टी हर हाल में इसे भुनाना चाहती है

Amitesh Amitesh Updated On: Sep 13, 2017 02:03 PM IST

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एमजीआर के बहाने बीजेपी की तमिलनाडु में पैर जमाने की कोशिश कितनी कारगर होगी?

मंगलवार को चेन्नई में एआइएडीएमके की आम सभा की बैठक में औपचारिक तौर पर पार्टी के दोनों धड़ों के विलय पर मुहर लग गई. आम सभा की यह बैठक काफी घटनापूर्ण रही क्योंकि इसी दिन पार्टी की नेता शशिकला को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया. इस कदम से साफ है कि एआइएडीएमके में मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम की ही चलेगी.

तमिलनाडु के इस सियासी घटनाक्रम के बीच ही दिल्ली से जो खबर आई उसका निहितार्थ काफी अहम है. वित्त मंत्रालय ने एआइएडीएमके के संस्थापक एम जी रामचंद्रन की इस साल मनाई जा रही जन्म शताब्दी के मौके पर 100 और 5 रुपए के सिक्के जारी करने का फैसला किया है. इस संबंध में अधिसूचना भी जारी हो गई है.

तस्वीर सौजन्य: शशिधरण-एमजीआर ब्लॉग्स्पॉट

एमजी रामचंद्रन (तस्वीर सौजन्य: शशिधरण-एमजीआर ब्लॉग्स्पॉट)

तमिल राजनीति में बीजेपी की बढ़ती हुई रुचि

सरकार के इस कदम को तमिल राजनीति में बीजेपी की बढ़ती रुचि से जोड़कर देखा जा रहा है. एआइएडीएमके की महासचिव और तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयललिता के निधन के बाद से ही तमिल राजनीति में काफी हलचल है. जयललिता की राजनीतिक विरासत को लेकर जंग छिड़ी हुई है. उनकी करीबी शशिकला भ्रष्टाचार के मामले में सलाखों के पीछे हैं, जबकि उनके भतीजे टीटीवी दिनाकरन उस विरासत पर अपना दावा ठोंक रहे हैं.

दूसरी तरफ, शशिकला की पसंद रहे मुख्यमंत्री पलानीस्वामी और जयललिता की पसंद रहे पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम ने आपस में दोस्ती कर ली. दोनों धड़ों ने हाथ मिला लिया और शशिकला और उनके भतीजे को पार्टी से चलता कर दिया गया.

दोनों गुटों के हाथ मिलाने के बावजूद निष्कासित शशिकला के भतीजे दिनाकरन की तरफ से हाथ-पांव मारने की कोशिशें हो रही हैं. लेकिन, इस बात की गुंजाइश बेहद कम ही दिख रही है कि जेल में शशकिला के बंद रहते उनके भतीजे पार्टी के भीतर अपने लिए अब कोई समर्थन जुटा पाएंगे.

सियासी गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि अन्नाद्रमुक के दोनों गुटों के विलय के पीछे बीजेपी ने भी बड़ी भूमिका निभाई है. बीजेपी को लगता है कि इस वक्त जयललिता के निधन के बाद से ही तमिल राजनीति में एक खालीपन दिख रहा है. क्योंकि डीएमके नेता और पूर्व मुख्यमंत्री एम करुनानिधि भी अपने सियासी सफर के अंतिम पड़ाव पर आ पहुंचे हैं. उनके बेटे स्टालिन उनकी सियासत को आगे बढ़ाने में लगे हैं. ऐसे में इस खालीपन का फायदा उठाकर बीजेपी तमिलनाडु में अपने लिए एक बड़ी जमीन तलाश रही है.

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एआईएडीएमके के दोनों धड़ों ने हाल ही में आपस में विलय का औपचारिक ऐलान किया है

बीजेपी को यह जमीन एआइएडीएमके के साथ दोस्ती से ही मिल सकती है. जयललिता के नहीं रहने के बाद एआइएडीएमके के मौजूदा नेतृत्व को बीजेपी आसानी से अपने साथ जोड़ सकती है. हो सकता है जल्दी ही अब एआइएडीएमके एनडीए का हिस्सा भी हो जाए और केंद्र सरकार में भी शामिल हो जाए.

एमजीआर की विरासत को हथियाने की कोशिश

तमिल फिल्मों के साथ-साथ तमिल राजनीति के सुपरस्टार रहे एमजी रामचंद्रन को लेकर तमिलनाडु के लोगों में काफी सम्मान रहा है. करुणानिधि के साथ विवाद के बाद डीएमके से अलग होकर 1972 में एमजीआर ने अपनी नई पार्टी बनाई थी. फिर करुनानिधि के खिलाफ मोर्चा खोलकर 1977 से 1987 तक वो तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी रहे. एमजीआर के निधन के बाद ही जयललिता ने उनकी सियासी विरासत को आगे बढ़ाया था.

लेकिन, अब एमजी रामचंद्रन के साथ-साथ उनकी उत्तराधिकारी जयललिता भी इस दुनिया में नहीं रहीं. ऐसे में एआइएडीएमके के भीतर उस कद का कोई मजबूत नेता नहीं दिख रहा है. बीजेपी को लगता है कि दक्षिण भारत में पांव पसारने का इससे सुनहरा अवसर और नहीं हो सकता है. केंद्र की बीजेपी सरकार ने एमजीआर के सम्मान में सिक्के जारी करने का फैसला कर तमिलनाडु के लोगों का दिल जीतने की कोशिश की है.

हालाकि इससे पहले भी मोदी सरकार की तरफ से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिन के मौके पर स्वच्छ भारत अभियान शुरू किया जा चुका है. इसे भी कांग्रेस की विरासत पर दावे के तौर पर ही देखा गया. इसके पहले सरदार पटेल से लेकर बाबा साहब भीमराव अंबेडकर की भी विरासत को आगे बढ़ाने को लेकर बीजेपी ने वो हर संभव प्रयास किए हैं जिससे उसकी राजनीतिक जमीन मजबूत हो सके.

बीजेपी लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति में अपनी पैठ बनाने की रही है (फोटो: पीटीआई)

बीजेपी लंबे समय से तमिलनाडु की राजनीति में अपनी पैठ बनाने की कोशिशें करती रही है (फोटो: पीटीआई)

एक तरह से कहें तो उत्तर भारत के बाद अब दक्षिण भारत तक बीजेपी की तरफ से हर महापुरुषों की विरासतों पर अपना दावा मजबूत किया जा रहा है. कोशिश है इन महापुरुषों के सच्चे अनुयायी के तौर पर खुद को सामने रखकर उनके चाहने वालों के बीच अपनी पकड़ मजबूत की जाए.

केंद्र सरकार के इस फैसले और तमिलनाडु की सियासत पर वरिष्ठ पत्रकार शेखर अय्यर का मानना है कि ‘जिस दिन चेन्नई में शशिकला का निष्कासन और दोनों धड़ों का विलय होता है उसी दिन केंद्र सरकार की तरफ से एमजीआर के सम्मान में सिक्के जारी करने की घोषणा से साफ है कि वहां बीजेपी अपनी पैठ बनाना चाहती है. तमिलनाडु के मौजूदा हालात और इसका महत्व ध्यान में रखकर किया गया यह फैसला है.’

कमल हासन की भी राजनीति में उतरने की तैयारी

तमिलनाडु की राजनीति में हमेशा से ही तमिल सिनेमा के सुपरस्टार छाए रहे हैं. एमजीआर के बाद जयललिता, फिर विजयकांत ने लगातार तमिल राजनीति में अपने आप को बड़ी ताकत के तौर पर स्थापित किया है. अब कमल हासन भी राजनीति में उतरने की तैयारी में हैं. हालाकि वो किसी पार्टी में शामिल होने के बजाए खुद की नई पार्टी लॉंन्च करने की तैयारी में हैं. माना जा रहा है कि इस साल विजयादशमी या गांधी जयंती के मौके पर उनकी तरफ से इस बारे में ऐलान हो सकता है.

kamal Hasan

तमिल फिल्मों के सुपरस्टार कमल हासन ने तमिलनाडु की राजनीति में उतरने के संकेत दिए हैं

हालाकि बीजेपी के साथ कई बार सुपरस्टार रजनीकांत के भी जुड़ने की खबरें आती रहीं हैं. लेकिन, अब तक इस पर कोई बात बनती दिख नहीं रही है. फिर भी बीजेपी ने उम्मीद नहीं छोड़ी है. दक्षिण भारत में पांव पसारने में लगी बीजेपी के लिए तमिलनाडु की राजनीति का मौजूदा खालीपन एक माकूल माहौल बना रहा है, जिसे वो हर हाल में भुनाना चाहती है.

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