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अमित शाह का मिशन 350+: टारगेट सेट और चुनाव की तैयारियां शुरू

बीजेपी के 'चाणक्य' अमित शाह की हर शह से विरोधियों की हर चाल की कई मात होती है

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Aug 17, 2017 08:42 PM IST

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अमित शाह का मिशन 350+: टारगेट सेट और चुनाव की तैयारियां शुरू

साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारियों के लिए बीजेपी ने बिगुल फूंक दिया है. बीजेपी के चाणक्य कहलाने वाले अमित शाह ने 31 मंत्रियों के साथ बैठक के बाद साल 2019 के चुनाव के लिए 350 सीटों का टारगेट रखा है.

जाहिर तौर पर ये टार्गेट चौंकाने वाला हो सकता है. लेकिन अब तक 3 साल में बीजेपी के मुख्य रणनीतिकार ने जितने भी टार्गेट रखे हैं वो चौंकाने वाले ही रहे हैं.

साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जब उन्होंने 350 सीटों का लक्ष्य रखा था तब किसी को इसकी उम्मीद भी नहीं रही होगी. लेकिन जिस तरह से संगठन से लेकर बूथ स्तर तक शाह ने पसीना बहाया और कार्यकर्ताओं को एकजुट कर मेहनत की तो नतीजों ने सबको चौंका कर रख दिया. ठीक इसी तरह यूपी चुनाव के लिये भी अमित शाह ने मिशन 300 रखा था.

विरोधियों के लिये ये खुशफहमी थी कि जिस यूपी में बीजेपी सत्ता का पंद्रह साल से वनवास झेल रही हो वहां 300 तो क्या 50 सीटें भी नहीं जीत सकेगी. इसकी बड़ी वजह बीएसपी का दलित वोटबेस था तो समाजवादी पार्टी के लिए मुस्लिम-यादव वोटबैंक की जुगलबंदी.

Amit Shah

लेकिन तमाम सियासी और जातीय समीकरणों को धराशाई करते हुए अमित शाह की रणनीति ने यूपी में इतिहास रच दिया. यूपी में जीती गई सीटों ने बीएसपी और एसपी के भविष्य पर सवाल खड़े कर दिए.

अमित शाह के लिए मिशन 350 बड़ी बात नहीं

ऐसे में साल 2019 के लिए अमित शाह का ‘मिशन 350’ संदेह की नजर से नहीं देखा जा सकता है. अमित शाह खुद अपने और पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण टास्क ही सेट करते आए हैं और उसे हासिल करके भी दिखाया है.

ऐसा पहली बार हो रहा है कि सत्ता में रहने वाली पार्टी चुनाव से दो साल पहले ही चुनाव की तैयारियों को लेकर इतनी गंभीर है. अमित शाह के पास अभी दो साल का वक्त है लेकिन कहा जाता है कि उन्होंने साल 2019 के लोकसभा चुनाव की तैयारी साल 2014 का लोकसभा चुनाव जीतने के बाद से ही शुरू कर दी थी.

इस बार उनका जोर उन 150 सीटों पर ज्यादा है जहां बीजेपी की हार हुई. अमित शाह एक-एक सीट जोड़कर 350 सीटों का टार्गेट हासिल करना चाहते हैं. उनकी यही रणनीति उन्हें पूर्वी उत्तर राज्यों में ले गई तो दक्षिण में भी उन्होंने बीजेपी का बेस बढ़ाने का काम किया.

amit shah in raipur

अमित शाह देश के अलग अलग राज्यों का दौरा कर रहे हैं. उनकी योजना बीजेपी के विस्तार की है और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को जोड़ने की है. अबतक अमित शाह पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा और ओडिशा जा चुके हैं.

एक लाख किमी की यात्रा के टारगेट में हर महीने करीब 20 हजार किमी का सफर कर रहे हैं. उनके ‘मिशन 350’ के तहत 19 राज्य ऐसे हैं जहां वो 3 दिन तक रुकेंगे तो 7 राज्य ऐसे हैं जहां वो दो दिन का दौरा करेंगे बल्कि 3 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक दिन रहने का कार्यक्रम है.

जहां-जहां पार्टी कमजोर वहां-वहां पुरजोर मेहनत

अमित शाह की देशभर में बीजेपी के विस्तार कार्यक्रम की योजना पीएम मोदी की मौजूदगी में तैयार हुई है. बीजपी का खास ज़ोर केरल, तमिलनाडु, ओडिशा, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक,पश्चिम बंगाल और उत्तर पूर्वी राज्यों की 200 लोकसभा सीटों पर है.

अमित शाह के दौरे में मध्यप्रदेश, राजस्थान और गुजरात जैसे वो राज्य भी हैं जहां बीजेपी पूरी तरह से मजबूत है. इसके बावजूद अमित शाह कोई कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहते हैं.

इस साल के आखिर में गुजरात का विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण है. हालांकि गुजरात में बीजेपी सत्ता में है लेकिन इस बार पीएम मोदी के जादू को बरकरार रखने की अमित शाह पर बड़ी जिम्मेदारी होगी. गुजरात में हार पार्टी के लिए लोकसभा चुनाव में बड़ा झटका साबित हो सकती है. ऐसे में अमित शाह गुजरात को लेकर अपनी खास रणनीति तैयार कर चुके हैं.

अमित शाह हर राज्य में धीरे-धीरे अपने सहयोगी बढ़ाते जा रहे हैं. बिहार में उन्होंने जेडीयू को नीतीश कुमार की वापसी के साथ एनडीए से जोड़ा तो दूसरे राज्यों में भी उन्हें नए सहयोगी मिल रहे हैं.

ओडिशा में अमित शाह ने सोशल इंजीनियरिंग के फॉर्मूले पर चलते हुए न सिर्फ दलित परिवार के घर भोजन किया बल्कि बीजेडी के गढ़ कहलाने वाले गुंजम से दौरे की शुरुआत की.

Amit Shah

दक्षिण में भी वो सोशल इंजीनियरिंग के जरिए दूसरे समुदायों को बीजेपी से जोड़ने का काम कर रहे हैं. हालांकि केरल में संघ की मौजूदगी के बावजूद बीजेपी के लिये मुश्किलें हैं तो तमिलनाडु में सत्ताधारी एआईएडीएमके के घटक दलों से उम्मीदें बांध रखी है. माना जा रहा है कि दक्षिण के सुपरस्टार रजनीकांत पर भी बीजेपी की नजर टिकी हुई है. वहीं आंध्रप्रदेश में टीडीपी के सहयोगी रहने के बावजूद बीजेपी जनाधार बढ़ाने में लगी हुई है. हालांकि तेलंगाना में बीजेपी को अभी काफी मेहनत करनी होगी.

अमित शाह की चाणक्य नीति का कोई जवाब नहीं

असम में मिली जीत के बाद बीजेपी के हौसले बढ़े हुए हैं और वो उत्तर-पूर्वी राज्यों पर अपनी खास रणनीति के साथ काम कर रही है.

जिन राज्यों में बीजेपी का झंडा तक नहीं होता था अब उन राज्यों में अमित शाह कमल खिलाने के लिए कमर कस चुके हैं. अमित शाह की यही रणनीति उन्हें बीजेपी का चाणक्य साबित कर चुकी है क्योंकि शाह की हर शह से विरोधियों की हर चाल की कई मात होती है.

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