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दार्जीलिंग प्रदर्शन: बिमल गुरुंग ने जीजेएम के चीफ एग्जीक्यूटिव पद से दिया इस्तीफा

जीटीए से अलग होने का जीजेएम का फैसला पहाड़ों में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद लिया गया

FP Staff | Published On: Jun 23, 2017 05:20 PM IST | Updated On: Jun 23, 2017 05:20 PM IST

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दार्जीलिंग प्रदर्शन: बिमल गुरुंग ने जीजेएम के चीफ एग्जीक्यूटिव पद से दिया इस्तीफा

गौरखा जन्मुक्ति मोर्चा के चीफ बिमल गुरुंग ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया. बिमल पार्टी के चीफ एग्जीक्यूटिव थे. बिमल ने पुलिस फायरिंग में मरे बिमल जनमुक्ति मोर्चा के समर्थकों के लिए सीबीआई जांच की मांग की थी.

बिमल ने कहा कि अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल जारी रहेगी, सभी पार्टियों की मीटिंग की डेट आगे बढ़ा दी गई है. मीटिंग 29 जून तक के लिए बढ़ा दी गई है.

गोरखा जनमुक्ति मोर्चा के महासचिव रोशन गिरि ने भी शुक्रवार को गोरखालैंड क्षेत्रीय प्रशासन की कार्यकारी समिति से इस्तीफा दे दिया.

गिरि ने शुक्रवार को कहा कि उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी को सौंप दिया है और वह इसे जीटीए के प्रधान सचिव को कल सौंपेगी.

पार्टी के फैसले का पालन करते हुए जीटीए से इस्तीफा देने वाले वह पहले व्यक्ति हैं. गिरि ने शुक्रवार को कहा था, 'हमने जीटीए को छोड़ने का फैसला लिया है.'

उन्होंने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल सरकार ने जीटीए को एक तमाशा बनाकर रख दिया है और जीजेएम तथा पहाड़ों के लोग अलग गोरखालैंड राज्य के एकलौते एजेंडे के लिए लड़ते रहेंगे.

जीटीए से अलग होने का जीजेएम का फैसला पहाड़ों में हुई सर्वदलीय बैठक के बाद लिया गया. इस बैठक में फैसला लिया गया था कि पार्टी विपक्षीय जीटीए समझौते से अलग हो जाएगी.

पहाड़ों के सभी 14 प्रभावशाली राजनीतिक दलों और सार्वजनिक संगठनों ने 20 जून को सर्वसम्मति से उत्तर बंगाल में अलग गोरखालैंड की लंबे समय से चली आ रही मांग को अपना समर्थन देने की घोषणा की थी.

अलग राज्य को लेकर आंदोलन की अगुवाई कर रहे जीजेएम और दल की ओर से बुलाए गए अनिश्चितकालीन बंद ने पहाड़ों में जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है.

साल 2012 से जीटीए की कमान जीजेएम के हाथों में थी और इसका पांच साल का कार्यकाल इस साल पूरा होने वाला था.

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