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बिहार: क्या बीजेपी में सुशील मोदी युग का अंत आ गया है?

बिहार में बीजेपी की कमान मजबूत करने के लिए पार्टी में की गई भारी फेरबदल

Amitesh Amitesh Updated On: Apr 06, 2017 04:43 PM IST

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बिहार: क्या बीजेपी में सुशील मोदी युग का अंत आ गया है?

यूपी में ऐतिहासिक जीत के बाद बीजेपी का फोकस अब बिहार पर ज्यादा है. बिहार में पार्टी अबतक पिछड़ती रही है. बिहार में लोकसभा चुनाव-2014 में बेहतर प्रदर्शन करने के बावजूद बीजेपी विधानसभा चुनाव में लालू-नीतीश के गठबंधन के आगे विवश हो गई.

क्या है बीजेपी की कोशिश?

बीजेपी की कोशिश अब इन दोनों की काट के तौर पर एक ऐसे नेतृत्व को बढ़ावा देने की है, जो अगले लोकसभा के साथ-साथ विधानसभा चुनाव में भी पार्टी को नई ऊंचाइयों पर ले जा सके.

इसी रणनीति के तहत बीजेपी ने बिहार के भीतर नए प्रदेश अध्यक्ष नित्यानंद राय को नियुक्त किया और अब एक नई और युवा टीम के जरिए संदेश देने की कोशिश हो रही है.

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नए चेहरों को ज्यादा अहमियत?

अभी हाल ही में घोषित बीजेपी की प्रदेश की टीम और कार्यकारिणी को देखकर ऐसा ही लग रहा है कि पुराने चेहरे के बजाए नए चेहरे को ज्यादा तरजीह दी गई है.

बीजेपी ने सभी चारों महामंत्री को हटाकर टीम नित्यानंद में चार नए महामंत्री बना दिए हैं. पार्टी की तरफ से अब नई टीम में राजेंद्र सिंह, राधामोहन शर्मा, प्रमोद चंद्रवंशी और सुशील चौधरी नए महामंत्री होंगे.

इसके पहले बिहार बीजेपी में विनय सिंह, सुधीर शर्मा, संजीव चौरसिया और सूर्यनंदन कुशवाहा को जगह मिली थी.

हर स्तर पर बदलाव की लहर?

इन सभी महामंत्रियों को बिहार बीजेपी के वरिष्ठ नेता और विधानमंडल दल के नेता सुशील मोदी का करीबी माना जाता था. लेकिन, परिवर्तन केवल महामंत्री के स्तर पर ही नहीं हुआ है, बल्कि, उपाध्यक्ष और सचिव के स्तर पर भी हुआ है.

पार्टी ने पूरी तरह से संगठन का चेहरा बदल दिया है. जहां सात उपाध्यक्षों की छुट्टी कर दी गई है, वहीं, सचिव स्तर पर भी कई नेताओं को बदल दिया गया है.

प्रदेश उपाध्यक्ष के रूप मे सांसद संजय जायसवाल को जगह दी गई है, जबकि महामंत्री पद से हटाए गए विनय सिंह को उपाध्यक्ष बनाया गया है.

इसके अलावा राजेंद्र गुप्ता, मिथिलेश तिवारी, श्यामा सिंह, निवेदिता सिंह, राम नारायण मंडल, रवींद्र चरण यादव, शिवेश राम, गोपालजी ठाकुर और देवेश कुमार को प्रदेश उपाध्यक्ष बनाया गया है.

प्रदेश सचिव के तौर पर अनिल सिंह, के. के. ऋषि, अर्जुन सहनी, रामलखन सिंह, ऋतुराज सिंहा, रूपनारायण मेहता, डीएनए मंडल, प्रवीण तांती, सजल झा, पिंकी कुशवाहा और अमृता भूषण को टीम में जगह दी गई है.

पुराने प्रवक्ता भी रास नहीं आए 

प्रवक्ता के तौर पर भी पुराने चेहरों को बदल दिया गया है. बीजीपी ने सुशील मोदी के करीबी मुख्य प्रवक्ता विनोद नारायण झा को भी इस पद से हटा दिया है.

जबकि प्रवक्ता और उपाध्यक्ष संजय मयूख को नई टीम में जगह नहीं दी गई है. अब मयूख बीजेपी मीडिया की राष्ट्रीय टीम में डिप्टी हेड के बतौर शामिल किए गए हैं.

इसके अलावा युवा मोर्चा अध्यक्ष राजेश वर्मा के बदले पटना से विधायक नितिन नवीन को यह जिम्मेदारी दी गई है. राजेश वर्मा को भी सुशील मोदी का ही करीबी माना जाता रहा है.

sushil modi

सुशील मोदी के समर्थकों से किनारा 

बिहार में लंबे वक्त से बीजेपी की कमान सुशील मोदी के ही हाथों में ही रही है. प्रदेश अध्यक्ष भले ही किसी और के पास रहा हो, लेकिन, सुशील मोदी ही कद्दावर नेता के तौर पर सामने रहते हैं.

बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में जब एनडीए की सरकार बनी तब सुशील मोदी ही उपमुख्यमंत्री बनाए गए. लेकिन नीतीश कुमार के साथ रिश्ते तल्ख होने और गठबंधन टूटने के बाद से सुशील मोदी लगातार नीतीश कुमार के खिलाफ मोर्चा खोले रखे हैं. बावजूद इसके पार्टी आलाकमान की तरफ से उन्हे वो तरजीह नही दी जा रही है जो पहले थी.

बिहार विधानसभा चुनाव के वक्त भी बीजपी ने पार्टी की गुटबाजी के चलते ही किसी को भी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित नहीं किया. लेकिन उस वक्त भी टिकट बंटवारे में सबसे ज्यादा सुशील मोदी की ही चली.

उस वक्त के अध्यक्ष मंगल पांडे को भी सुशील मोदी का ही करीबी माना जाता है.

बदले वक्त में बदली रणनीति?

लेकिन अब हालात इस कदर बदल गए हैं कि मौजूदा टीम में सुशील मोदी के करीबियों की छुट्टी कर दी गई है.

पार्टी आलाकमान की तरफ से युवा सांसद नित्यानंद राय को सामने लाकर लालू-नीतीश के पिछड़ा कार्ड की हवा निकालने की कोशिश की गई है.

नित्यानंद राय भी लालू यादव की ही जाति से आते हैं जिनके आने से बीजेपी ने पिछड़े वर्ग में सेंधमारी की तैयारी की है.

बिहार बीजेपी की नई टीम से तो साफ लग रहा है कि बीजेपी ने सुशील मोदी, नंदकिशोर यादव समेत बिहार बीजेपी के पुराने दिग्गजों की छाया से अब पार्टी को अलग करना शुरू कर दिया है. शायद ये आने वाले भविष्य का कोई बड़ा संकेत है.

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