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केजरीवाल ने फौरी ‘विश्वास’ जीता, उबाल अब भी बाकी है

शांति फार्मूला सांत्वना पुरस्कार से ज्यादा कुछ नहीं है

Sanjay Singh | Published On: May 05, 2017 03:30 PM IST | Updated On: May 05, 2017 03:30 PM IST

केजरीवाल ने फौरी ‘विश्वास’ जीता, उबाल अब भी बाकी है

बुधवार की रात कुमार विश्वास को मनाने उनके वसुंधरा, गाजियाबाद स्थित घर जाने से पहले केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को अपमान का घूंट पीना पड़ा होगा. शायद उनके पास कोई और विकल्प था भी नहीं.

एक दिन में अपना अगला कदम तय करने की कुमार विश्वास की धमकी सच लग रही थी. स्थापना के पांच साल से भी कम समय के भीतर यह आम आदमी पार्टी के लिए सबसे बड़ा संकट था. पार्टी दो फाड़ होने के कगार पर थी.

फ़र्स्टपोस्ट के पास आप से जुड़े तमाम वाट्सएप ग्रुपों में पोस्ट किए गए संदेश हैं, जिनसे पता चलता है कि आप के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच उस समय क्या चल रहा था. ज्यादातर संदेश हिंदी में थे जिनमें पार्टी सुप्रीमो पर सवाल उठाए गए थे. इनमें व्यक्तिपूजा और पार्टी के कामकाज के तरीके पर कुमार विश्वास के उठाए गए सवालों पर भी चर्चा थी. कुछ संदेशों में ‘दिल्ली चलो’ का नारा दिया गया था.

kumarvishwas

‘दिल्ली चलो’ का कार्यक्रम कुछ इस तरह था: तारीख - 7 मई, समय - सुबह 11 बजे, स्थान– जंतर मंतर. इस संदेश में कहा गया था कि अगर कुमार विश्वास आप छोड़ देते हैं तो लड़ाई फिर से जंतर मंतर पर पहुंच जाएगी. जंतर मंतर यानी वही जगह जहां आप के गठन की नींव पड़ी थी.

संदेश में आगे कहा गया था: 'अगर कुमार विश्वास पार्टी छोड़ते हैं तो सभी साथियों को 7 मई को जंतर मंतर पहुंचना होगा. आप स्थानीय स्तर पर संगठन से बात करिए और अपना कार्यक्रम तय करिए. हमें देश को बचाने की खातिर अपने निजी काम कुछ समय के लिए छोड़ने होंगे. अगर पार्टी ही नहीं बचेगी और कोई उम्मीद ही नहीं रहेगी तो अनुशासन को लेकर क्या करेंगे? देश को बचाने के लिए अनुशासन को भूलना होगा. यह कुमार विश्वास या अरविंद केजरीवाल के लिए नहीं, बल्कि देश के भविष्य को बचाने की लड़ाई है.'

दूसरे संदेश में आप के संस्थापक सदस्य कुमार विश्वास के योगदान और उनकी अच्छाई की चर्चा थी. इसमें लिखा था : 'उन्होंने (कुमार विश्वास) सियासत की गंदगी से खुद को दूर रखा. वे अपने खिलाफ चल रही साजिशों को भलीभांति जानते थे. फिर भी धैर्य का परिचय दिया. वे निराश थे, फिर भी पार्टी के लिए पूरे जोश के साथ काम करते रहे. उन्हें पार्टी से प्यार था जिसे उन्होंने खून-पसीने से सींचा था. लेकिन मौजूदा हालात में उनके खिलाफ सियासत का गंदा खेल हो रहा है. जब उनका धैर्य खत्म हो गया तो उन्होंने सच बोलने की हिम्मत जुटाई. दोस्तों, आप ही बताइए, क्या कुमार विश्वास के सवाल गलत हैं?

संदेश में आगे लिखा था: 'उन्होंने जो कहा है उस पर गौर कीजिए. पहला, पार्टी में ताकत और विश्वास की बहाली हो. दूसरा, हमें उन मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए जिनके आधार पर पार्टी का गठन हुआ था और जनता ने उसे पसंद किया था. तीसरा, चुनाव में पैसा खर्च करने की क्षमता टिकट देने का आधार नहीं होना चाहिए. चौथा, गणेश परिक्रमा करने या करवाने वाले लोगों से बचें. पांचवां, जनता पर अपनी आवाज न थोपें बल्कि जनता की आवाज बनें.'

ArvindKejriwal-ManishSisodia

एक अन्य संदेश में मनीष सिसोदिया और संजय सिंह के बयान का जवाब दिया गया है. इन नेताओं ने कहा था कि कुमार विश्वास को पार्टी मंच पर अपनी बात रखनी चाहिए थी. संदेश में कहा गया है कि कुमार विश्वास इतने अनाड़ी नहीं हैं कि पार्टी मंच पर अपनी बात न उठाएं. लेकिन तथाकथित अनुभवी नेताओं ने उनकी बातों को खारिज कर दिया. इसका नतीजा यह निकला कि कुमार विश्वास ने अनुशासित तरीके से इन मुद्दों को सार्वजनिक मंच पर उठाया ताकि वे पार्टी कार्यकर्ताओं तक पहुंच सकें.

संदेश में आगे कहा गया है कि पार्टी उस व्यक्ति की पहचान करे जो तमाम प्रतिभाशाली लोगों को पार्टी से अलग करने के लिए जिम्मेदार है. लेकिन यह काम करने की बजाय पार्टी के नेता कुमार विश्वास के पीछे पड़े हैं. संदेश में आगे समझाया गया है कि कैसे केजरीवाल के इर्द-गिर्द निहित स्वार्थी तत्वों का घेरा बन गया है. हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि कार्यकर्ताओं का बलिदान व्यर्थ न जाए.

अब भी वक्त है कि केजरीवाल एक ईमानदार नेता के रूप में अपनी विश्वसनीयता को फिर से स्थापित करें. सभी को संकल्प लेना होगा कि दलालों को पार्टी से निकाल फेंका जाए. यह अपनी गलतियों को सुधारने का वक्त है. ऐसा नहीं किया गया तो बाद में सभी वरिष्ठ नेता पछताएंगे.

ऐसे कई संदेश हैं जिनमें पंजाब, गोवा और दिल्ली नगर निगम की हार के लिए ईवीएम को जिम्मेदार बताने पर केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य नेताओं पर कटाक्ष किये गये हैं. एक संदेश में पूछा गया है कि अगर ईवीएम से छेड़छाड़ हुई तो पार्टी के कुछ उम्मीदवार कैसे जीत गए. इसमें आगे कहा गया है कि पार्टी की हार हमारे कार्यकर्ताओं के वोट डालने के लिए बाहर न निकलने से हुई.

कुमार विश्वास की काट में सिसोदिया ने कहा था कि आप का गठन कि 3-4 नेताओं ने नहीं, बल्कि लाखों कार्यकर्ताओं ने की थी. इसके जवाब में एक संदेश में कहा गया है कि यह बात बिल्कुल सही है, फिर भी पार्टी के फैसले 6-7 लोग बंद कमरे में लेते हैं.

कुछ संदेश आप की शैली के अनुरूप बेहद तीखे हैं.

Kejriwal

मौजूदा घटनाक्रम को करीब से देखने वाले आप के कुछ नेताओं से बातचीत के बाद इस लेखक को बुधवार को केजरीवाल के कुमार विश्वास के घर जाने की असली वजह मालूम हुई थी.

दरअसल, केजरीवाल को अहसास हो गया था कि पूरी योजना उल्टी पड़ गई है, और मामला हाथ से निकलता जा रहा है. अपने दोस्त और पार्टी में अपने बड़े आलोचक के घर जाने का फैसला केजरीवाल ने सियासी विवेक और मौजूदा हालात को समझते हुए लिया था. समय की मांग थी कि कुमार विश्वास को किसी भी कीमत पर मनाया जाए ताकि केजरीवाल अपनी साख के साथ ही पार्टी को टूटने से बचा सकें और कुछ वक्त भी हासिल कर सकें.

पार्टी के एक नेता ने बताया कि एक शांति फार्मूला घोषित किया गया लेकिन कुमार विश्वास के लिए यह सांत्वना पुरस्कार से ज्यादा कुछ नहीं है. केजरीवाल और उनकी टीम ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है. उन्होंने रास्ता दिखा दिया है कि किस तरह पार्टी के नेता और कार्यकर्ता बिना अनुशासन तोड़े अपनी बात कह सकते हैं. इस पार्टी के नेता ने कहा कि चुनाव आयोग जल्द ही लाभ के पद हासिल करने के मामले आप के 21 विधायकों के भविष्य पर फैसला करेगा. इस मौके पर एक बार फिर से आप में सार्वजनिक सिर फुटौव्वल शुरू हो सकती है.

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