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क्या केजरीवाल की रुखसती का काउंटडाउन शुरू हो गया है?

अरविंद केजरीवाल के लिए अब सत्ता में बने रहना आसान नहीं होगा

Akshaya Mishra | Published On: May 08, 2017 08:42 AM IST | Updated On: May 08, 2017 08:53 AM IST

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क्या केजरीवाल की रुखसती का काउंटडाउन शुरू हो गया है?

अब तक निशाने पर अरविंद केजरीवाल के मंत्री और विधायक हुआ करते थे. इस बार अरविंद केजरीवाल खुद ही घिर गए हैं. लेकिन ये ताजा मामला और आरोप लोगों को हैरान कर रहे हैं? ऐसा होना नहीं चाहिए. आम आदमी पार्टी में फैली सड़ांध और पार्टी के भीतर चल रहे तीखे सत्ता संघर्ष को देखते हुए यह आशंका तो पहले से ही थी कि उस पर हमला पार्टी के अंदर से ही होगा.

केजरीवाल के खिलाफ अपने सीधे आरोप के साथ एक दिन पहले ही पूर्व मंत्री बन जाने वाले कपिल मिश्रा ने न सिर्फ एक व्यक्ति को बल्कि नई पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा झटका दिया है. बीजेपी को शायद इससे दिल्ली के मुख्यमंत्री को सीधे निशाने पर लेने के लिए जरूरी हथियार मिल गया है.

भले ही मंत्री सत्येंद्र जैन के जरिए केजरीवाल को 2 करोड़ रुपये के भुगतान करने के मामले को साबित करने में समय लगे, लेकिन कपिल मिश्रा वाले घटनाक्रम से एक बात तो तय हो गयी है कि अरविंद केजरीवाल के लिए अब सत्ता में बने रहना आसान नहीं होगा. उनके सत्ता से बाहर होने की उलटी गिनती शुरू हो सकती है.

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पिछले ही हफ्ते पार्टी के वरिष्ठ नेता कुमार विश्वास ने अपने खिलाफ विधायक अमानतुल्ला खान की टिप्पणी के बाद विद्रोह कर दिया था. लेकिन केजरीवाल और उनकी टीम विश्वास के साथ एक असहज समझौता करने में कामयाब रही थी. यह आम आदमी पार्टी में विरोधी गुटों के बीच गहरे विभाजन को दूर करने की एक कागजी कोशिश थी और यह कोशिश कमजोर ही नजर आ रही थी.

कुमार विश्वास को राजस्थान में एक बड़ी भूमिका दे दी गई थी, लेकिन यह साफ था कि शतरंज की बिसात पर अभी और चालें चली जानी बाकी थी. वरिष्ठ नेता संजय सिंह के करीबी माने जाने वाले अमानतुल्ला को पार्टी में उनकी कई भूमिकाओं से अलग नहीं किया गया था.

पार्टी में सबकुछ ठीक तो नहीं है

माना जाता है कि पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक कपिल मिश्रा, कुमार विश्वास के करीबी हैं. माना जा सकता है कि केजरीवाल पर किया गया उनका हमला पिछले सप्ताह के घटनाक्रम का ही विस्तार है.

हालांकि उनके ट्वीट्स की एक श्रृंखला से उन्होंने एक तरह से संकेत तो दे ही दिया था कि वो किसी भी तरह की कड़ी कार्रवाई का सामना करने के लिये तैयार हैं. साफ तौर पर पार्टी को नहीं पता कि इस मामले में कपिल मिश्रा के साथ वह कैसे निपटेगी.

ये भी पढ़ें: सबसे संगीन आरोप और संकट के जिम्मेदार केजरीवाल खुद

साफ है कि मिश्रा का हमला पार्टी के भीतर और बाहर भी केजरीवाल की स्थिति को कमजोर करता है. जिस आदमी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने अभियान से अपना राजनीतिक करियर बनाया हो, उस शख्स पर इस तरह के आरोप लगना दरअसल एक अजीबोगरीब स्थिति ही है.

शुरू से ही पार्टी के पास कोई स्पष्ट विचारधारा नहीं थी और उनके ज्यादातर विधायकों की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में थी. यह उनका भ्रष्टाचार विरोधी इमेज ही थी, जिसके बूते आम आदमी पार्टी को बड़ा समर्थन मिला था. केजरीवाल की ईमानदारी पर उठते सवाल से पार्टी उस खास पहचान को भी खो रही है.

अरविंद केजरीवाल

तो क्या यह केजरीवाल के अंत की शुरुआत है?

कहते हैं कि राजनीति में किसी भी संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है. लेकिन क्या उनका अंत वास्तव में शुरू हो गया है? एमसीडी चुनाव में उनकी पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद यह दीवारों पर लिखी इबारत की तरह साफ था.

हर कोई उम्मीद कर रहा था कि अब केजरीवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संभावित चुनौती देने या 2019 में संयुक्त विपक्ष के नेता होने की बड़ी महत्वाकांक्षा छोड़ देंगे. साथ ही बीजेपी से टकराने के लिए अकेले दिल्ली पर ध्यान केंद्रित करते हुए वो अपने घर को ही पहले दुरूस्त करेंगे.

लेकिन हालात अब बद से भी बदतर हो गए हैं. जैसा कि कई पूर्व सदस्य कह सकते हैं कि पार्टी सांप का बिल बनती जा रही है. यह पार्टी एक ऐसी भयानक जगह है, जहां हर कोई एक दूसरे में ताक-झांक करने और एक दूसरे को छोटा साबित करने में व्यस्त है. विश्वास एपिसोड और कपिल मिश्रा वाले घटनाक्रम ने अब यह साफ कर दिया है कि पार्टी इतने दांव-पेंचों और साजिश में फंस गई है कि उसका अस्तित्व बने रह पाना नामुमकिन लगता है.

तो केजरीवाल के लिए आगे क्या विकल्प है? ऐसा लगने लगा है कि उन्होंने पार्टी चलाने के लिए नैतिक अधिकार खो दिया है. लेकिन यह भी एक हकीकत है कि वह पार्टी के एकमात्र ताकतवर नेता हैं. वह अपना अस्तित्व बचा सकते हैं लेकिन यह इतना आसान भी नहीं होगा. बीजेपी निश्चित रूप से कपिल मिश्रा की ओर से लगाए गए आरोप से पैदा होने वाले मौके को ऐसे ही नहीं गंवाना चाहेगी.

यानी आम आदमी पार्टी और केजरीवाल के लिए खेल का अंत अब नजदीक है.

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