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पानी की सियासत: संगम विहार को केजरीवाल ने क्यों ठगा ?

क्या आप सरकार संगम विहार को उसी वजह से पेयजल मुहैया नहीं करा रही है जिस वजह से कांग्रेस ने ऐसा किया था?

Kangkan Acharyya Updated On: May 13, 2017 07:14 PM IST

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पानी की सियासत: संगम विहार को केजरीवाल ने क्यों ठगा ?

अब तक कोई नहीं जानता कि अरविंद केजरीवाल पर वाटर माफिया से दो करोड़ रुपए बतौर रिश्वत लेने के कपिल मिश्रा के आरोप का सच क्या है? लेकिन ये आरोप निश्चित रूप से राजधानी की सियासत की अंधेरी कोठरी की ओर इशारा करते हैं यानी पानी की राजनीति.

क्या है संगम विहार का दर्द?

दिल्ली में पानी का मतलब है ताकत. यहां इसका अर्थ पैसा भी होता है. करीब दस लाख की आबादी वाला दक्षिण दिल्ली का संगम विहार इलाका इस कड़वी वास्तविकता का एक दुखद उदाहरण है.

'हम निजी जल आपूर्तिकर्ताओं से रोजाना उपयोग के पानी का एक-एक बूंद खरीदते हैं. यहां जल निगम से पानी की सप्लाई नहीं होती.' यह रशीद खान का कहना है जो संगम विहार में सड़क के किनारे एक दुकान में पराठे बेचते हैं.

अनधिकृत कॉलोनी होने की वजह से भी संगम विहार दिल्ली जल बोर्ड के पानी की आपूर्ति के दायरे से बाहर है. संगम विहार आम आदमी पार्टी के ‘बिजली हाफ, पानी माफ’ के नारे को मजाक साबित करता है.

एक ग्राहक को एक प्लेट पराठा देते हुए रशीद खान ने कहा, 'हमें 2,000 लीटर पानी की आपूर्ति के लिए निजी सप्लायर को 500 रुपए का भुगतान करना पड़ता है.'

दिल्ली जल बोर्ड के पानी के कनेक्शन के दायरे से बाहर के क्षेत्रों में निजी जल आपूर्तिकर्ता जबरदस्त कारोबार करते हैं. ये आपूर्तिकर्ताओं ज्यादातर दिल्ली, नोएडा और गुड़गांव के निजी बोरवेल से पानी लाते हैं और इसे फोन कर पानी मंगाने वालों को महंगे दामों पर बेचते हैं.

Slum dwellers carry drinking water containers which they filled from a water tanker provided by the state-run Delhi Jal (water) Board on a hot summer day in New Delhi, India, May 11, 2015. Temperature in Delhi on Monday reached 42.3 degree Celsius (108.14 degree Fahrenheit), according to India's metrological department website. REUTERS/Anindito Mukherjee - RTX1CFZ5

दिल्ली जल बोर्ड भी फोन कॉल पर पानी के टैंकरों के साथ इन क्षेत्रों में पहुंचना शुरू कर दिया है.

लेकिन एक कसाई के यहां काम करने वाले उमर नईस ने फर्स्टपोस्ट से कहा, 'यह सेवा हमेशा उपलब्ध नहीं है. आमतौर पर सरकारी टैंकर आठ से दस दिन के अंतराल पर हमारे क्षेत्र में आते हैं. इसलिए हम मुख्यतया निजी जल आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहते हैं.'

जाहिर तौर पर यह गरीबों का दर्द है, जिनकी इलाके की आबादी में बहुलता है. इलाके के मुट्ठी भर समृद्ध परिवार पानी के संकट से पैसा कमा रहे हैं.

नईस ने आगे कहा, 'जो लोग अपने लिए बोरवेल खोदने में सक्षम हैं, उन्हें कभी पानी की दिक्कत नहीं होती. इसके विपरीत वे टैंकरों को पानी बेचते हैं. टैंकर उनके घर से 300 रुपए में 2,000 लीटर पानी भरते हैं और 500 रुपए में बेचते हैं.'

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दिल्ली जल बोर्ड के वाटर कनेक्शन विभाग के सदस्य राधेश्याम त्यागी ने फर्स्टपोस्ट से कहा, 'बोर्ड ने घरों के बाहर खोदे गए सभी बोरवेल अपने कब्जे में ले लिये हैं. फिर भी कुछ ऐसे बोरवेल होंगे जो घरों के अंदर चल रहे हों.'

दिल्ली में निजी इस्तेमाल के लिए बोरिंग करने पर पाबंदी लगी है. लेकिन सामुदायिक उद्देश्य से बोरिंग की अनुमति है.

इलाके के कुछ अमीर भूजल का दोहन करते हैं और पकड़े भी नहीं जाते. गरीबों की विशाल आबादी के मुकाबले इनकी जल स्रोतों तक पहुंच है.

पानी के स्रोत की कमी भी इस क्षेत्र के गरीबों को दक्षिण दिल्ली के चितरंजन पार्क, मालवीय नगर और ग्रेटर कैलाश जैसे अधिकृत कॉलोनियों के निवासियों से अलग करती है, जो दिल्ली जल बोर्ड से प्रति माह 20,000 लीटर पानी नि:शुल्क पाते हैं.

जब संगम विहार के निवासी रोजाना सुबह टैंकर से पानी की आपूर्ति पाने के लिए जद्दोजहद करते हैं, उसी समय अमीरों के बरामदे में लग्जरी कारें मुफ्त के पानी से धोई जाती हैं.

पानी की राजनीति

दिल्ली जल बोर्ड के राधेश्याम त्यागी बताते हैं, 'दिल्ली में संगम विहार जैसी कुल 1669 अनधिकृत कॉलोनियां हैं. इन सभी कॉलोनियों में पानी का संकट है.'

दिल्ली जल बोर्ड के रिकॉर्ड के अनुसार, शहर में प्रति दिन 800 मिलियन गैलन पानी की खपत होती है. हर रोज 150 मिलियन गैलन की कमी रहती है जिसके कारण लाखों लोग पानी से वंचित रहते हैं.

चुनाव के वक्त पानी से वंचित लोग राजनीतिक दलों के लिए विशाल वोट बैंक होते हैं. नईस ने कहा, 'हर चुनाव के दौरान राजनीतिक दल हमारे पास आते हैं और हमारे लिए पाइप के जरिए पानी की आपूर्ति कराने का वादा करते हैं. लेकिन जब वे सत्ता में आ जाते हैं तो टालमटोल का रवैया अपना लेते हैं.'

2015 के विधानसभा चुनाव में पानी एक प्रमुख राजनीतिक मुद्दा था, जिस पर सवार होकर आम आदमी पार्टी दिल्ली की सत्ता में आई.

अरविंद केजरीवाल ने अपने चुनाव अभियान में दिल्ली में जल संकट का मुद्दा जोरशोर से उठाया था और हर घर के लिए 20,000 लीटर तक मुफ्त पानी सुनिश्चित करने के साथ ‘जल स्वराज’ का वादा किया था.

Residents crowd around a municipal tanker to fill water in their containers in New Delhi, India, February 23, 2016. A political ally of Indian Prime Minister Narendra Modi was shouted down on Tuesday by a crowd angered by rioting in a northern state that destroyed businesses, paralyzed transport and cut water supplies to metropolitan Delhi. REUTERS/Anindito Mukherjee TPX IMAGES OF THE DAY - RTX28628

उन्होंने लगातार तीन बार से दिल्ली में राज कर रही कांग्रेस पर टैंकर माफिया से मिलीभगत करने और लोगों को पाइप के जरिए पानी की आपूर्ति से वंचित करने का आरोप लगाया था.

कांग्रेस पर वार करते हुए आप के घोषणापत्र में कहा गया था, 'आप दिल्ली के प्रभावशाली टैंकर माफिया पर नकेल कसने और उन्हें संरक्षण देने वाले नेताओं पर मुकदमा चलाने के लिए प्रतिबद्ध है.'

हालांकि दिल्ली के चुनावों में पानी हमेशा एक चुनावी मुद्दा रहा है, लेकिन आप ने पानी के वितरण में असमानता को खत्म करने का वादा कर 2015 में ऐसा माहौल बनाया जो लोगों को रास आ गया.

ऐसे में कोई अचरज की बात नहीं कि 2015 के विधानसभा चुनाव में संगम विहार में एक लाख से ज्यादा वोट पड़े और आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दिनश मोहनिया करीब 65 फीसदी वोट हासिल कर चुनाव जीते.

पानी का मुद्दा दिल्ली में आप की भारी जीत की एक बड़ी वजह थी. बावजूद इसके जल वितरण व्यवस्था में असमानता बरकरार है. दिल्ली में आप की सरकार बनने के दो साल बाद भी संगम विहार और दूसरी अनधिकृत कॉलोनियां दिल्ली जल बोर्ड की जल आपूर्ति स्कीम से बाहर हैं. निजी जल टैंकर अब भी यहां के निवासियों से मनमानी धनराशि वसूलते हैं.

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दिल्ली सरकार की पहल पर जल बोर्ड के टैंकरों से नि:शुल्क पानी की आपूर्ति भी कारगर साबित नहीं हुई. आरोप है कि आप के स्थानीय नेता मतदाताओं पर अपना प्रभाव बरकरार रखने के लिए इस स्कीम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.

नईस कहते हैं, 'इस स्कीम से पानी सिर्फ सरकार और आप से घनिष्ठ संबंध रखने वाले लोगों को ही मिलता है. बाकी निवासियों को निजी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ता है.'

दिल्ली जल बोर्ड के एक सूत्र ने इस आरोप की पुष्टि की और कहा, 'जब हम संगम विहार में पानी की आपूर्ति करने जाते हैं तो हमें विधायक के लोगों के निर्देश का पालन करना पड़ता है कि किसे पानी देना है और किसे नहीं देना है. उनता निर्देश न मानने पर हमें विरोध झेलना पड़ता है. ऐसे में उनके निर्देशों का पालन करना हमेशा सुरक्षित होता है.'

ऐसा लगता है कि जल वितरण व्यवस्था में असमानता आप के लिए दिल्ली की सत्ता हासिल करने में मददगार साबित हुई ही, इस समस्या के बने रहने से भी उन्हें मदद मिल रही है.

संगम विहार में जल संकट के प्रमुख मुद्दे को हल करने में नाकाम रहने के बावजूद आप यहां के पांच एमसीडी वार्डों में से दो पर जीत हासिल करने में कामयाब रही. बाकी तीन सीटों में से दो पर बीजेपी और एक पर स्वतंत्र उम्मीदवार की जीत हुई.

पानी के कारोबार का सच

पाइप के जरिए पानी की आपूर्ति संगम विहार और अन्य अनधिकृत कॉलोनियों में जल संकट का एकमात्र समाधान है. लेकिन जल बोर्ड के राधेश्याम त्यागी कहते हैं, 'जब तक सरकार इन्हें अधिकृत नहीं करती, तब तक हम इन कालोनियों में पानी की आपूर्ति नहीं कर सकते. हम सरकार के नीतिगत फैसले के बाद ही आगे बढ़ सकते हैं.'

ऐसे में यह बड़ा सवाल है कि सत्ता में आने के दो साल बाद भी आप सरकार ने हर घर तक पाइप के जरिए पानी पहुंचाने के अपने वादे को पूरा करने के लिए इस तरह का कोई फैसला क्यों नहीं किया?

फर्स्ट पोस्ट ने संगम विहार के स्थानीय विधायक से इस बारे में दो बार संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया.

2015 के विधानसभा चुनावों से पहले संगम विहार में आयोजित एक सार्वजनिक मीटिंग में अरविंद केजरीवाल ने शीला दीक्षित के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार और पानी टैंकर लॉबी के बीच नापाक रिश्ता होने का आरोप लगाया था.

Residents of Sanjay Colony, a residential neighbourhood, crowd around a water tanker provided by the state-run Delhi Jal (water) Board to fill their containers in New Delhi June 30, 2009. Delhi Chief Minister Sheila Dikshit has given directives to tackle the burgeoning water crisis caused by uneven distribution of water in the city according to local media. The board is responsible for supplying water in the capital. REUTERS/Adnan Abidi (INDIA SOCIETY) - RTR256UB

 

उन्होंने कहा था, 'संगम विहार में पाइप के जरिए पानी की आपूर्ति करने में सिर्फ 24 घंटे लगेंगे. लेकिन सरकार ऐसा नहीं कर रही है क्योंकि ऐसा करने से वाटर माफिया का 1,000 करोड़ रुपये का व्यवसाय खत्म हो जाएगा.'

जाहिर है कांग्रेस को घेरने के लिए आम आदमी पार्टी ने संगम विहार को दिल्ली में जल संकट के प्रतिनिधि के तौर पर पेश किया था.

सत्ता में आने के बाद केजरीवाल की सरकार ने शीला दीक्षित के शासन के दौरान जल टैंकर की खरीद में 400 करोड़ रुपए के घोटाले को खोज निकालने का दावा किया. यह आप के उस दावे को और पुख्ता करता था कि जल संकट से परेशान शहर के गरीबों की कीमत पर कांग्रेस के नेता मालामाल हुए.

लेकिन अब कपिल मिश्रा ने तोपों का मुंह अरविंद केजरीवाल की ओर मोड़ दिया है और उन पर पानी माफिया से रिश्वत लेने का आरोप लगाया है. ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या आप सरकार संगम विहार को उसी वजह से पेयजल मुहैया नहीं करा रही है जिस वजह से कांग्रेस ने ऐसा किया था?

इस सवाल का जवाब सिर्फ अरविंद केजरीवाल ही दे सकते हैं. उनके लिए इन इलाकों में पाइप के जरिए पानी पहुंचाना सबसे अच्छा जवाब हो सकता है.

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