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‘चक्रव्यूह’ से कैसे बाहर निकल पाएंगे केजरीवाल ?

केजरीवाल आरोपों पर सफाई देने के बजाए अपना बचाव करते नजर आ रहे हैं.

Amitesh Amitesh Updated On: May 22, 2017 04:56 PM IST

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‘चक्रव्यूह’ से कैसे बाहर निकल पाएंगे केजरीवाल ?

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल इन दिनों चक्रव्यूह में घिरे हैं. केजरीवाल के उपर उनके ही साथी कपिल मिश्रा ने एक के बाद एक आरोपों के ऐसे तीर छोड़े हैं जिनसे उभर पाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है.

केजरीवाल की तरफ से कपिल मिश्रा के सवालों पर लगी चुप्पी को लेकर भी पहले सवाल खड़े होते रहे. लेकिन केजरीवाल आरोपों पर सफाई देने के बजाए अपना बचाव करते नजर आ रहे हैं.

कपिल मिश्रा के अनशन से लेकर सीबीआई दफ्तर में शिकायत के बावजूद केजरीवाल चुप रहे. अब उनकी तरफ से जवाब दिया जा रहा है. कपिल मिश्रा के आरोपों को अरविंद केजरीवाल वाहियात बता रहे है. केजरीवाल का कहना है कि कपिल के आरोप तो जवाब देने लायक तक नहीं हैं. यहां तक कि विरोधी भी कपिल के आरोपों पर भरोसा नहीं कर रहे हैं.

कपिल मिश्रा के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब देने के बजाए केजरीवाल की तरफ से गोल-मोल जवाब देने की तैयारी हो रही है. केजरीवाल कहते हैं 'अगर मेरे उपर लगाए गए आरोपों में दम होता तो मैं अबतक जेल में होता'.

केजरीवाल की तरफ से इस तरह से आरोपों की धार को कुंद करने की कोशिश हो रही है और वो भी अपने समर्थकों के बीच में.

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(फोटो: पीटीआई)

मुख्यमंत्री के हवाले से आप के ट्वीटर हैंडल से कहा गया है कि 'हमारे आंदोलन को पिछले कुछ दिनों में बड़े हमलों का सामना करना पड़ा है. यह अच्छी खबर है क्योंकि इससे ये साबित होता है कि हम  उनके  लिए बड़ा खतरा हैं'.

अरविंद केजरीवाल हर तरह से अपनी बात से अब जनता को समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके बारे में कही गई सारी बातें गलत हैं. आरोपों में दम नहीं है. केवल राजनीतिक पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर विरोधियों के इशारे पर उनके अपने सवाल खड़े कर रहे हैं.

जनता के समर्थन और आंदोलन की उपज केजरीवाल अब जनता के दरबार में जाने की पूरी तैयारी में हैं. केजरीवाल दिल्ली की जनता के बजाए पिछले कुछ महीनों से पंजाब, गोवा और गुजरात की जनता का ज्यादा ही ख्याल रखने लगे थे. शायद अब उन्हें अपनी गलती का अहसास हो रहा है कि दिल्ली की जनता ने उन्हें अपने ख्याल रखने के लिए चुना है.

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एमसीडी चुनाव में शिकस्त के बाद दिल्ली की जनता के दर पर केजरीवाल फिर से मत्था टेकने की तैयारी कर रहे हैं. अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भी जोश भर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि एक बार फिर दिल्ली की जनता उनकी गलतियों को भुला कर माफ कर देगी तो साथ ही कार्यकर्ता भी नए जोश के साथ पार्टी की मजबूती बढ़ाने का काम करें.

सूत्रों के मुताबिक आप के भीतर हर हलचल पर मंथन हो रहा है. कम से कम दिल्ली की सल्तनत न खिसके इसको लेकर अभी से ही रणनीति बनाई जाने लगी है. खास बात ये है कि लगातार पीएम मोदी पर हमला कर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने वाले अरविंद केजरीवाल और उनकी पार्टी अब इस रणनीति पर काम करने की योजना बना रही है कि मोदी पर हमला करने से बचा जाए. दरअसल एमसीडी चुनावों में  मिली करारी हार के बाद ये फैसला अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों की मुख्य रणनीति बन सकता है.

केजरीवाल एंड कंपनी को लगता है कि ज्यादा फोकस दिल्ली पर ही किया जाए वरना दिल्ली की जनता में संदेश यही जाता है कि इन्हें दिल्ली के बजाए दूसरी जगहों की ज्यादा फिक्र रहती है. हो सकता है कि इसका असर भी दिखाई पडे क्योंकि पार्टी अब गुजरात के बजाए दिल्ली में ज्यादा फोकस करती दिखाई दे  रही है.

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लेकिन केजरीवाल के लिए सबसे बड़ी चुनौती है कि उन्हें अपनी पार्टी के भीतर के नाराज विधायकों को भी एकजुट करना है. अब इसके लिए फिर से हर विधानसभा क्षेत्र में जाकर केजरीवाल कार्यकर्ताओं के साथ-साथ जनता के सवालों का समाधान करते नजर आएंगे. आप सूत्रों के मुताबिक केजरीवाल अब किसी एक विधानसभा क्षेत्र में महीने के पहले रविवार को पार्टी कार्यकर्ताओं से रूबरू होंगे.

केजरीवाल हर तरह से इस वक्त चक्रव्यूह में फंसे हैं. लेकिन जमीन से जुड़े आंदोलन की उपज केजरीवाल अब एक बार फिर से हवा में उड़ने के बजाए जमीन पर आकर अपने चक्रव्यूह को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. लेकिन सबकुछ लुटा कर होश में आने के बाद भी केजरीवाल उन आरोपों से पल्ला नहीं झाड़ सकते जो उन पर उनके ही पूर्व साथी और मंत्री ने लगाए हैं. आरोप केजरीवाल की नजर में वाहियात हैं तो जनता को जवाब तो देना ही होगा.

 

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