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राजनीति से बाहर रहकर भी बिग ‘बी’ करते हैं ‘सॉफ्ट’ राजनीति!

बिग बी के संवाद प्रभावित करते हैं और उनके द्वारा दिया गया संदेश असरदार होता है

Pramod Joshi Updated On: Jun 20, 2017 07:25 PM IST

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राजनीति से बाहर रहकर भी बिग ‘बी’ करते हैं ‘सॉफ्ट’ राजनीति!

राष्ट्रीय ध्वज के तीन रंगों के सामने खड़े होकर अमिताभ बच्चन कहते हैं, ‘ये तीन रंग सिर्फ रंग नहीं, एक पहचान है, जो हमें एक सूत्र में बांधती है. जीएसटी सिर्फ एक टैक्स नहीं, एक पहल है, देश के बाजार को एक सूत्र में बांधने की. जीएसटी एक राष्ट्र, एक टैक्स, एक मार्केट.’

केंद्र सरकार ने 1 जुलाई से लागू होने वाली जीएसटी कर प्रणाली के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए महानायक अमिताभ बच्चन की मदद ली है. वित्त मंत्रालय ने एक ट्वीट के साथ इस वीडियो को नत्थी कर के प्रसारित किया है. जीएसटी की अभी तक ब्रांड एंबेसडर बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु थीं, जो बताती थीं कि किस तरह जीएसटी टैक्स प्रणाली को जंजीरों से बाहर करेगा. बहरहाल वे खुद इस जंजीर से बाहर हो गईं हैं.

अमिताभ बच्चन यानी बिग बी का ऐसे अभियानों में शामिल होना कोई नई बात नहीं है. वह राष्ट्रीय अभियानों में शामिल होेने के लिए अक्सर पैसे भी नहीं लेते हैं. पल्स पोलियो और गुजरात अभियान में उन्होंने पैसा नहीं लिया. सच है कि उनके संवाद प्रभावित करते हैं और संदेश असरदार होता है. ऐसे अभियानों के लिए वह पीवी सिंधु के मुकाबले कहीं बेहतर पात्र हैं.

अलबत्ता अमिताभ बच्चन की ‘ब्रांड एंबेसडर’ राजनीति को लेकर पिछले कुछ साल में सवाल जरूर उठे हैं. पीएम नरेंद्र मोदी ने कुछ समय पहले ट्विटर पर एक ऑडियो फाइल साझा की थी, जिसमें वह अमिताभ की कविता सुन रहे हैं, 'स्वच्छ भारत मिशन पर अमिताभ बच्चन का खास संदेश.' मोदी के इस ट्वीट पर अमिताभ ने ट्वीट कर मोदी का आभार व्यक्त किया. बिग बी ने लिखा, 'माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा मेरे छोटे-से योगदान को स्वीकार करने के लिए धन्यवाद.'

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केंद्र सरकार ने 30 जून की आधी रात से देश भर में जीएसटी लागू करने का निर्णय लिया है

गुजरात के प्रचार के लिए मैं अपनी आवाज और चेहरा दे सकता हूं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बिग बी के रिश्ते साल 2009 या उसके पहले बन चुके थे. उस दौर में जब कोई कह नहीं सकता था कि मोदी देश के प्रधानमंत्री बनेंगे. जनवरी 2010 में अमिताभ की फिल्म ‘पा’ के गांधीनगर में विशेष प्रदर्शन के मौके पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूद थे. तब बिग बी ने कहा था, गुजरात का प्रचार होना चाहिए. मैं अपनी आवाज और चेहरा दे सकता हूं.’

यह वह दौर था जब केंद्र की कांग्रेस सरकार राष्ट्रीय राजनीति में मोदी को घेर रही थी. अमिताभ बच्चन सक्रिय राजनीति छोड़ चुके थे और कांग्रेस के साथ उनके रिश्ते बीते दिनों की बात हो चली थी. अलबत्ता मुलायम सिंह की समाजवादी पार्टी के साथ उनके रिश्ते थे. जया बच्चन उस वक्त राज्यसभा में समाजवादी पार्टी की ओर से सदस्य थीं.

बहरहाल इसके बाद बिग बी गुजरात के ब्रांड एंबेसडर बने. टीवी स्क्रीन पर उनकी यह बात खूब चली, ‘कुछ दिन तो गुजारो गुजरात में!’ कहना मुश्किल है कि गुजरात मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्धि दिलाने में इस विज्ञापन की भूमिका थी या नहीं, पर इस अभियान की वजह से अमिताभ भी मोदी विरोधियों के निशाने पर आ गए.

पिछले साल गुजरात के ऊना में हुए दलित-अत्याचार के बाद अमिताभ बच्चन को पोस्टकार्ड भेजने का अभियान चला. अमिताभ बच्चन ने 'खुशबू गुजरात की' कैंपेन किया था. दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने कहा कि हम उन्हें 'बदबू गुजरात की' भी दिखाना चाहते हैं.

कई सरकारी अभियानों में शामिल हुए

मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद अमिताभ बच्चन कई सरकारी अभियानों में शामिल हुए हैं. हाल में वह ‘स्वच्छ भारत’ अभियान में थे. अनुष्का शर्मा के साथ उनका वीडियो आया, जिसमें वह शौच के लिए गांववालों को दरवाजा बंद रखने की नसीहत देते नजर आ रहे हैं. आमिर के हटने के बाद पर्यटन विभाग ने उन्हें ‘अतुल्य भारत’ का ब्रांड एंबेसडर बनाया. पिछली सरकार के दौरान वह पोलियो के निवारण के सरकारी अभियान के प्रमोशन से भी जुड़े रहे. एक चैनल पर वह कंपोस्ट खाद के अभियान में भी दिेखे.

सामुदायिक विकास और जन-जागृति के कार्यों में सितारों का आगे आना अच्छा लगता है. अमिताभ चाहे चॉकलेट बेचें या केश तेल, पेंट, पल्स पोलियो या मोबाइल फोन हर जगह वह प्रभावशाली हैं. औपचारिक रूप से वह राजनीति में नहीं हैं, पर आज किस काम को राजनीति से बाहर करेंगे? जिस बात का जनता पर असर है, वह राजनीति है. यह भी राजनीति है, ‘ब्रांड बिग बी’ की ‘सॉफ्ट’ राजनीति.

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