विधानसभा चुनाव | गुजरात | हिमाचल प्रदेश
S M L

मिशन 2019: मोदी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल, बड़े बदलाव की तैयारी    

जेडीयू के एनडीए में शामिल होने और एआईएडीएमके के दोनों धड़ों में विलय के बाद इसी हफ्ते कैबिनेट विस्तार की तैयारी

Amitesh Amitesh Updated On: Aug 21, 2017 11:13 PM IST

0
मिशन 2019: मोदी मंत्रिमंडल में संभावित फेरबदल, बड़े बदलाव की तैयारी    

मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है. नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू के एनडीए में शामिल होने और एआईएडीएमके के दोनों धड़ों के विलय के बाद अब इस संभावना को बल मिला है. सरकार के सूत्रों के मुताबिक, इसी हफ्ते मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है.

बिहार में नीतीश कुमार के साथ मिलकर बीजेपी ने फिर से सरकार बना ली है. अब केंद्रीय मंत्रिमंडल में जेडीयू के शामिल होने की बारी है. माना जा रहा है कि इस बार कैबिनेट विस्तार में जेडीयू कोटे से एक कैबिनेट और एक राज्यमंत्री को जगह दी जाएगी.

जेडीयू के इस वक्त राज्यसभा में 10 और लोकसभा में 2 सांसद हैं. शरद यादव की जगह संसदीय दल के नेता बने आरसीपी सिंह को कैबिनेट मंत्री जबकि लोकसभा सांसद संतोष कुशवाहा को राज्यमंत्री बनाया जा सकता है. हालाकि जननायक कर्पूरी ठाकुर के बेटे राज्यसभा सांसद रामनाथ ठाकुर का नाम भी चर्चा में है. लेकिन, बिहार के जातीय समीकरण के हिसाब से संतोष कुशवाहा बाजी मार सकते हैं.

क्या हैं अटकलें?

कैबिनेट विस्तार को लेकर सबसे ज्यादा खलबली मोदी कैबिनेट में शामिल बिहार के मंत्रियों के भीतर है. इन मंत्रियों को डर सता रहा है कि जेडीयू कोटे के दो मंत्रियों के शामिल होने के चलते ना जाने किन दो मंत्रियों का पत्ता कट जाए.

इन अटकलों को बल तब मिला जब बिहार के दो मंत्रियों ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से पार्टी दफ्तर जाकर मुलाकात की. बीजेपी कोटे से स्किल डेवेलपमेंट मंत्री राजीव प्रताप रूडी और आरएलएसपी के अध्यक्ष और मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की बीजेपी अध्यक्ष से मुलाकात के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि इन दोनों की मोदी कैबिनेट से छुट्टी हो सकती है.

बीजेपी की सहयोगी आरएलएसपी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा को लेकर बीजेपी आलाकमान पहले से ही खुश नहीं है. बिहार विधानसभा चुनाव में भी आरएलएसपी के प्रदर्शन के बाद से ही बीजेपी उपेंद्र कुशवाहा को साथ लेकर चलने के लिए ज्यादा उत्साहित नहीं दिख रही है. नीतीश कुमार के साथ आने के बाद बीजेपी उपेंद्र कुशवाहा को ज्यादा अहमियत देने के मूड में नहीं है.

ऐसे में उपेंद्र कुशवाहा की अगर कैबिनेट से छुट्टी होती है तो फिर जेडीयू कोटे से संतोष कुशवाहा को राज्य मंत्री बनाकर जातीय समीकरण को साधा जा सकता है.

दूसरी तरफ, राजीव प्रताप रूडी की भी विदाई को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मुलाकात के बाद माना जा रहा है कि रूडी को कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है.

हालाकि, राजीव प्रताप रूडी के कार्यालय की तरफ से फर्स्टपोस्ट को बताया गया कि 'मंत्री जी एक कार्यक्रम के सिलसिले में न्योता देने के लिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के पास गए थे. अगले महीने 6 से 12 सितंबर तक रूडी के संसदीय क्षेत्र सारण में अवधेशानंद का अखंड रामायण का पाठ है, जिसमें 6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों और कई कैबिनेट मंत्रियों को न्योता दिया गया है. राजीव प्रताप रूडी इसी कार्यक्रम में बुलाने के लिए पार्टी अध्यक्ष अमित शाह से मिलने गए थे.'

बिहार के कई दूसरे मंत्री भी इस बात से डरे हुए हैं. उन्हें भी इस बात का डर सता रहा है कि जेडीयू कोटे के दो मंत्रियों के शामिल होने पर ना जाने किसका पत्ता कट जाए.

उधर, एआईएडीएमके के भी एक कैबिनेट और चार राज्य मंत्रियों को मोदी कैबिनेट में जगह दी जा सकती है. दोनों धड़ों के विलय के बाद एनडीए में शामिल होना अब महज औपचारिकता है, क्योंकि इस विलय के पीछे बीजेपी की ही रणनीति थी, जो पर्दे के पीछे काम कर रही थी.

खाली पड़े पदों को भरने की कवायद

मोदी कैबिनेट में कई महत्वपूर्ण मंत्रालय हैं जिनका कोई फुल टाइम मंत्री नहीं है. मनोहर पर्रिकर के गोवा के मुख्यमंत्री बनने के बाद से ही रक्षा मंत्री का अतिरिक्त प्रभार वित्त मंत्री अरूण जेटली संभाल रहे हैं. पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे के निधन के बाद विज्ञान और तकनीकी मंत्री डॉ. हर्षवर्धन के पास पर्यावरण मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार है.

इसके अलावा वेंकैया नायडू के उपराष्ट्रपति बनने के बाद शहरी विकास मंत्रालय का प्रभार ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के पास है, जबकि सूचना प्रसारण मंत्रालय की जिम्मेदारी कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी संभाल रही हैं.

ऐसे में कैबिनेट विस्तार के बाद इन मंत्रालयों को फुल टाइम मंत्री मिल जाएगा. खासतौर से चीन और पाकिस्तान से जारी विवादों के बीच इस वक्त देश के लिए फुल टाइम रक्षा मंत्री की जरूरत महसूस की जा रही है.

2019 की लड़ाई के पहले आखिरी विस्तार !

अगले लोकसभा चुनाव में अब महज बीस महीने का वक्त बचा है. ऐसे में सरकार अब पूरी तरह से एक्शन मोड में दिखना चाहती है. अपने साढ़े तीन साल के कार्यकाल के आकलन के आधार पर मोदी सरकार सभी लूपहोल्स को ठीक करना चाहती है. इस कार्यकाल के दौरान बेहतर प्रदर्शन ना करने वाले मंत्रियों की छुट्टी भी हो सकती है, जबकि कुछ उर्जावान नए मंत्रियों की इंट्री भी हो सकती है.क्षेत्र, जाति और प्रदर्शन के आधार पर मोदी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल संभव है.

संगठन को भी मजबूत करने की तैयारी

मोदी कैबिनेट के विस्तार के साथ-साथ पार्टी की तरफ से तैयारी संगठन को भी चुस्त करने की हो रही है. पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने पहले ही पार्टी के लिए मिशन 350 का लक्ष्य तय कर दिया है. अब उस लक्ष्य को पाने के लिए शाह अपना सबकुछ दांव पर लगाने को तैयार हैं.

शाह की तरफ से केंद्रीय मंत्रियों को चार-चार लोकसभा क्षेत्रों में जीत दिलाने की जिम्मेदारी दी गई है. पार्टी पदाधिकारी भी इस काम में पहले से ही लगे हुए हैं.  पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने उन लोकसभा सीटों पर ज्यादा फोकस करने का फैसला किया है जहां पार्टी पिछले चुनाव में नंबर दो, तीन या चार पर रही थी.

इससे पहले पार्टी संगठन में भी व्यापक फेरबदल संभव है. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, मोदी कैबिनेट विस्तार के बाद अमित शाह जल्द ही संगठन में भी बड़ा बदलाव कर सकते हैं.

पार्टी के एक नेता ने फर्स्टपोस्ट से बातचीत में दावा किया कि मिशन 350 को हासिल करने के लिए अमित शाह संगठन में आमूल चूल परिवर्तन कर सकते हैं.

ऐसे में कैबिनेट विस्तार के वक्त सरकार से संगठन में कुछ नेताओं के भेजे जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

0

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi