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तमिलनाडु: एआईएडीएमके के नाटक की स्क्रिप्ट बीजेपी लिख रही है?

फिलहाल जो संकेत हैं उससे ऐसा लगता है कि बीजेपी पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है

T S Sudhir Updated On: Apr 20, 2017 11:43 AM IST

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तमिलनाडु: एआईएडीएमके के नाटक की स्क्रिप्ट बीजेपी लिख रही है?

तमिलनाडु में इस वक्त भयंकर लू चल रही है. राज्य सरकार ने लोगों को लू से बचने के लिए घरों में रहने और खूब पानी पीने की सलाह जारी की थी.

राज्य सरकार की इस एडवाइजरी को सबसे ज्यादा ईमानदारी से सत्ताधारी एआईएडीएमके के नेताओं ने ही पालन किया. वो पूरा दिन बंद दरवाजों के भीतर रहते थे. और राज्य में बह रही गर्म सियासी बयार के थपेड़ों से बचने के लिए रात के वक्त ही बाहर निकलते थे.

रात में एआईएडीएमके के नेताओं को काले सायों के साथ मिलकर राजनैतिक गोटियां फिट करने में सहूलत रहती थी. पर रात-रात भर की कोशिशों के बावजूद राज्य में अभी एआईएडीएमके की सियासी गोटियां पूरी तरह फिट नहीं हो सकी हैं.

सबको ऐसा लगा था कि शशिकला और उनके भतीजे दिनाकरन को पार्टी से निकालने के बाद एआईएडीएमके के दोनों गुटों में सुलह हो जाएगी. पर ऐसा हुआ नहीं. नया पेंच फंस गया.

पूर्व मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम गुट मौजूदा मुख्यमंत्री पलानीसामी के गुट के रवैए से हैरान है. मंगलवार की रात को जब वित्त मंत्री डी. जयकुमार मीडिया से मुखातिब हुए, तो ऐसा लगा था कि वो शशिकला-दिनकरन को पार्टी से निकालने का श्रेय पन्नीरसेल्वम गुट को देंगे. लेकिन बीस मंत्रियों की बैठक के बाद हुई इस प्रेस कांफ्रेंस में वित्त मंत्री डी. जयकुमार ने पन्नीरसेल्वम गुट की उम्मीदों को तगड़ा झटका दिया.

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उन्होंने ऐसा जाहिर किया कि ईपीएस गुट यानी मुख्यमंत्री पलानिसामी गुट ने खुद ही 'मन्नारगुडी कुनबे' यानी शशिकला-दिनाकरन को पार्टी से बाहर करने का फैसला किया है. इसमें पन्नीरसेल्वम गुट का कोई रोल या दबाव नहीं था.

ऐसा लग रहा था कि मुख्यमंत्री पलानिसामी ने ही सुलह की पहल की थी. लेकिन कहानी कुछ और ही थी. शशिकला और दिनाकरन को किनारे लगाकर ईपीएस गुट ने अपने ऊपर लगे दाग धोने की कोशिश की है.

दाग ये कि वो चिनम्मा यानी शशिकला के करीबी हैं. मुख्यमंत्री पलानीसामी और उनके समर्थक विधायक फरवरी में एक हफ्ते तक शशिकला के कहने पर गोल्डन बे रिजॉर्ट में ठहरे थे. उनकी इस करतूत की वजह से उन्हें कूवाथुर ब्वॉयज नाम दिया जाता है. ये नाम गोल्डेन बे रिजॉर्ट के इलाके का है. लेकिन अब शशिकला-दिनाकरन को पार्टी से निकालकर ईपीएस गुट खुद को पाक-साफ जाहिर करने की कोशिश कर रहा है.

सुलह की कोशिशों के बीच मंगलवार सुबह पन्नीरसेल्वम गुट ने अपना रुख कड़ा कर लिया था. उन्होंने दोनों गुटों के एकजुट होने के लिए दो शर्तें रखी थीं. पहली ये कि शशिकला-दिनाकरन को पार्टी से बाहर किया जाए. दूसरी ये कि जयललिता की मौत की जांच के लिए आयोग बनाया जाए. ईपीएस गुट ने पहली शर्त मानकर शशिकला-दिनाकरन को पार्टी से बाहर कर दिया. अब पन्नीरसेल्वम के पास लड़ने के लिए कुछ खास नहीं बचा है. वो अब जयललिता की मौत की जांच की मांग का शोर ही मचा रहे हैं.

असल में दोनों ही गुट एक दूसरे पर भरोसा नहीं कर पा रहे हैं. पन्नीरसेल्वम गुट को ऐसा लग रहा है कि शशिकला-दिनाकरन को बाहर करके पलानिसामी खुद को केंद्र सरकार के करीब लाना चाह रहे हैं. दिनाकरन के समर्थक पहले से ही बीजेपी पर आरोप लगा रहे हैं कि वो एआईएडीएमके के अंदरूनी मामले में दखल दे रही है.

बहुत से जानकार मानते हैं कि केंद्र के दबाव में ही तमिलनाडु की राजनीति में सियासी चालें चली जा रही हैं. पलानिसामी गुट का मानना है कि शशिकला-दिनाकरन को पार्टी से बाहर करके वो बीजेपी को खुश कर लेंगे. ऐसा करके मुख्यमंत्री पलानिसामी केंद्र सरकार से नजदीकी बढ़ाने में लगे हैं.

दोनों गुटों के विलय में सबसे बड़ा पेंच इस बात का फंसा है कि किसको क्या मिलेगा? पन्नीरसेल्वम गुट चाहता है कि ओपीएस दोबारा मुख्यमंत्री बनें और पार्टी के महासचिव भी बनें. लेकिन ईपीएस गुट को ये बात मंजूर नहीं. वो मानते हैं कि पन्नीरसेल्वम तो 'घर वापसी' कर रहे हैं. उन्हें इसमें शर्तें लगाने की क्या जरूरत है.

पलानीसामी vs पन्नीरसेल्वम

पलानीसामी भी पन्नीरसेल्वम की बराबरी के नेता हैं, वो मुख्यमंत्री की गद्दी पन्नीरसेल्वम को सौंपने को राजी नहीं. इसी वजह से दोनों गुट एकता के मुद्दे पर राजी नहीं हो पा रहे हैं.

उधर, दिनाकरन के लिए दिल्ली में दर्ज केस मुश्किल होता जा रहा है. दिल्ली पुलिस की एक टीम, दिनाकरन से पूछताछ के लिए चेन्नई पहुंची है. वो अपने साथ दलाली के आरोपी सुकेश चंद्रशेखर को भी ले आई है. सुकेश पर आरोप है कि उसने चुनाव आयोग के अधिकारियों को रिश्वत देने के लिए दिनाकरन से पैसे लिए थे. ताकि वो एआईएडीएमके का चुनाव चिन्ह दिनाकरन को दिला सके. फिलहाल इस केस की सच्चाई का किसी को ठीक-ठीक पता नहीं.

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एफआईआर में भी कई झोल दिखते हैं. लेकिन फिलहाल दिनाकरन, इस केस के दबाव में दिख रहे हैं. तभी तो उन्होंने आसानी से हथियार डाल दिए. उनके समर्थन में खड़े आठ विधायक भी पार्टी में वापस जा सकते हैं. इसके बाद तो पलानीसामी को बहुमत के लिए पन्नीरसेल्वम गुट की जरूरत ही नहीं रह जाएगी.

लेकिन एआईएडीएमके के ईपीएस गुट की दिक्कत ये है कि सिर्फ दिनाकरन ही नहीं, पलानिसामी मंत्रिमंडल के पांच मंत्री भी कानूनी पचड़े में फंसे हैं. इसके अलावा पार्टी के एक राज्यसभा सांसद का नाम भी चुनाव में वोटरों को लुभाने के लिए पैसे खर्च करने के मामले में आ रहा है. स्वास्थ्य मंत्री सी. विजयभास्कर के यहां पड़े छापों में कई दस्तावेज ऐसे मिले हैं, जो ये बताते हैं कि इन मंत्रियों को दिनाकरन को जिताने की जिम्मेदारी दी गई थी. आर के नगर उप चुनाव में इन नेताओं को पैसे देकर वोट जुटाने को कहा गया था.

बीजेपी क्या चाहती है?

आज की तारीख में एआईएडीएमके का कोई भी नेता ऐसे आरोपों से बचना चाहेगा. इसके लिए जरूरी है कि वो केंद्र में सत्ताधारी पार्टी से बनाकर चले. जब तक उनके खिलाफ जांच का आदेश नहीं होता, या अचानक चुनाव का एलान नहीं होता, तो मुख्यमंत्री ओपीएस हों या ईपीएस, इन नेताओं को फर्क नहीं पड़ता.

फिलहाल जो संकेत हैं उससे ऐसा लगता है कि बीजेपी पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बनाना चाहती है. बीजेपी को लगता है कि पन्नीरसेल्वम ही जयललिता के असली उत्तराधिकारी हैं. उनके पास प्रशासनिक तजुर्बा भी है. मुख्यमंत्री बनने की सूरत में पन्नीरसेल्वम, बीजेपी के एहसानमंद भी होंगे. इस तरह बीजेपी एक बड़ी क्षेत्रीय पार्टी को रिमोट कंट्रोल कर सकेगी.

तमिलनाडु में इस वक्त जिस तरह की सियासी बयार बह रही है उसमें कमोबेश हर एआईएडीएमके नेता ने अपने सुर बदल लिए हैं. लोकसभा उपाध्यक्ष एम थाम्बीदुरई ने 2 जनवरी को चिट्ठी लिखकर शशिकला से मुख्यमंत्री बनने की गुजारिश की थी. आज वो शशिकला को पार्टी से बाहर करने के फैसले के साथ हैं.

'स्वच्छ एआईएडीएमके अभियान' में शामिल पार्टी का हर नेता कभी शशिकला के सामने साष्टांग दंडवत था. आज ये सब मिलकर उन्हें पार्टी से बाहर निकाल चुके हैं. कभी किसी के ख्वाब में भी ये बात नहीं आई होगी. लेकिन राजनीति तो नामुमकिन को मुमकिन बनाने का खेल है.

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