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यूपी जीत के बाद मोदी का ऐलान, न चैन से बैठूंगा... न बैठने दूंगा

जीत के बाद जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई है अब चैन से बैठने से काम नहीं चलने वाला

Amitesh Amitesh Updated On: Mar 16, 2017 02:43 PM IST

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यूपी जीत के बाद मोदी का ऐलान, न चैन से बैठूंगा... न बैठने दूंगा

उत्तरप्रदेश और उत्तराखंड में भारी जीत और मणिपुर-गोवा में सरकार बनाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से और ज्यादा उम्मीदें जताई जा रही है.

बीजेपी संसदीय दल की बैठक में मोदी ने पार्टी के सभी सांसदों को संबोधित करते हुए साफ कर दिया कि अब और अधिक काम करना पड़ेगा.

मोदी की तरफ से संदेश साफ है कि जीत के बाद जिम्मेदारी और ज्यादा बढ़ गई है लिहाजा अब चैन से बैठने से काम नहीं चलने वाला. पहले भी काम होता रहा है लेकिन, अब तो और भी ज्यादा काम की जरूरत होगी.

न खाउंगा, न खाने दूंगा

संसदीय दल की बैठक में मोदी ने कहा 'न चैन से बैठूंगा, न बैठने दूंगा.' इसके पहले प्रधानमंत्री मोदी ने पद संभालने के साथ ही साफ-साफ नारा दिया था कि 'न खाउंगा, न खाने दूंगा.' ऐसा कर मोदी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अपने इरादे साफ कर दिए थे.

जीत के बाद विनम्रता से काम 

बीजेपी सांसदों को मोदी ने नसीहत भी दी कि इस जीत के बाद हमें और विनम्र होकर काम करना होगा. जाहिर है जीत के जश्न में नेता और कार्यकर्ताओं की तरफ से वो हर गलती करने की कोशिश होती है. जिस गलती का विरोध कर वो सत्ता में पहुंचते हैं. लेकिन, सत्ता मिलते ही वो ही गलती दोहराने लगते हैं.

मोदी का यह संबोधन अपने सांसदों को था लेकिन, संदेश यूपी से लेकर हर जगह पार्टी  के नेताओं और कार्यकर्ताओं के लिए था जिसमें संभलकर चलने और झुककर काम करने की हिदायत दी गई है.

मोदी ने कहा कि हमें काम करने के लिए इतना बड़ा बहुमत मिला है. लिहाजा काम पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है.

मोदी-शाह की रणनीति

चुनाव-प्रचार के दौरान अक्सर बीजेपी के नेताओं की तरफ से जुबानी हमले खूब किए जाते हैं. यूपी चुनाव में भी हमले हुए भी. लेकिन, इस बार मोदी-शाह की सोची समझी रणनीति के तहत ही बयानबाजी हुई.

चुनाव के वक्त यूपी के भीतर कब्रिस्तान से लेकर श्मशान तक पर चर्चा हुई, रमजान से लेकर दीवाली तक तक हावी रहा. लेकिन, सबकुछ यूं ही नहीं था. सबकुछ रणनीति के तहत हुआ था.

मोदी ने की बड़बोले नेताओं की तारीफ

अलबत्ता पार्टी के बड़बोले नेताओं की मोदी तारीफ करते दिखे. लेकिन, तारीफ उनकी बयानबाजी के लिए नहीं बल्कि, उनकी चुप्पी के लिए. बिहार में पार्टी के कई बड़बोले नेताओं ने पूरी रणनीति की हवा निकाल दी थी.

यूपी के भीतर ऐसा हो नहीं पाया. साक्षी महाराज सरीखे नेताओं की तरफ से कुछ बयान आए भी, लेकिन, उतना तूल नहीं पकड़ पाया. लिहाजा पार्टी की जीत के बाद चुप रहने के लिए इन ‘मुंह के लालों’ की तारीफ करते नजर आए.

अब बीजेपी के सांसद पूरे देश में बीजेपी की बड़ी जीत के संदेश को जनता तक पहुंचाने में लगेंगे. मोदी सरकार के काम-काज को जनता तक पहुंचा कर इनकी कोशिश होगी बेहतर छवि पेश की जा सके.

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