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क्या वाकई में अरविंद केजरीवाल के कथनी और करनी में अंतर है?

कपिल मिश्रा को मंत्री पद से हटाना आप के अंदर मचे बवाल का किस्सा बयां कर रहा है.

Ravishankar Singh | Published On: May 07, 2017 11:34 AM IST | Updated On: May 07, 2017 11:36 AM IST

क्या वाकई में अरविंद केजरीवाल के कथनी और करनी में अंतर है?

दिल्ली सरकार में मंत्री पद से हटाए गए कपिल मिश्रा रविवार को बड़ा खुलासा करने जा रहे हैं. कपिल मिश्रा, शीला दिक्षित सरकार में हुए टैंकर घोटाले में शामिल कुछ बड़े नामों को सार्वजनिक कर सकते हैं. सूत्र बताते हैं कि आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं के नाम भी टैंकर घोटाले में शामिल हैं.

शनिवार को जल और संस्कृति मंत्री कपिल मिश्रा को मंत्री पद से हटा दिया गया था. सोशल साइट्स पर अरविंद केजरीवाल के इस फैसले की खूब चर्चा हो रही है. राजनीति के जानकारों का मानना है कि अरविंद केजरीवाल की कार्यशैली दर्शाती है कि पार्टी में केजरीवाल सिर्फ अपनी ही चलाते हैं.

AAP

आम आदमी पार्टी में लोकतांत्रिक व्यवस्था या लोकपाल के नाम पर कुछ भी नहीं बचा है. अरविंद का विरोध करने वाले को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है.

यह वाकई एक विचित्र संयोग है कि एक तरफ अरविंद केजरीवाल कुमार विश्वास को छोटा भाई कहते हैं और रात के अंधेरे में कुमार विश्वास के घर जा कर सुलह की बात करते हैं, तो दूसरी तरफ कुमार विश्वास के साथ खड़े रहने वाले एक मंत्री को कुछ दिन बाद यह बोल कर हटा दिया जाता है कि उनका परफॉर्मेंस उम्मीद के मुताबिक नहीं था.

आम आदमी पार्टी के ताजा राजनीतिक घटनाक्रम से यह बात साफ हो गई है कि क्या पिछले दिनों अरविंद केजरीवाल ने पार्टी में टूट को बचाने के लिए जो प्रयास किए थे वह नाटक तो नहीं था. क्या अरविंद केजरीवाल को चुनौती देने वाला या उनके लिए गए फैसले पर राय रखने वाला या फिर विरोध करना पार्टी के खिलाफ जाता है.

आप की अंदरूनी लड़ाई अब खुल कर सामने आने लगी है. जल और पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा को मंत्रीमंडल से हटाना इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है. कपिल मिश्रा पर कार्रवाई को आप के कुछ नेता अरविंद केजरीवाल की कथनी और करनी में अंतर से जोड़ कर देख रहे हैं.

AAP Delegation

शनिवार को पार्टी के विधायकों की बैठक में पार्टी से निलंबित विधायक अमानतुल्लाह खान का आना भी कम चौंकाने वाला नहीं रहा. अमानतुल्लाह खान को एक कमेटी का चेयरमैन सहित 6 कमेटियों का मैंबर भी बनाया गया है.

शनिवार देर शाम कपिल मिश्रा की जगह नजफगढ़ के विधायक कैलाश गहलोत को मंत्री बनाया गया. साथ ही सीमापुरी से विधायक राजेंद्र पाल को भी कैबिनेट में जगह देने की बात कही गई.

पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पार्टी में घटते अपने कद से बौखला गए हैं. एक तरफ कुमार विश्वास को राजस्थान का प्रभारी बना कर उनका कद बढ़ाया तो दूसरी तरफ कुमार विश्वास के समर्थकों के पर कतरने की शुरुआत कर दी.

ताजा राजनीतिक धटनाक्रम से पार्टी दो खेमों बंट गई है. एक खेमा अरविंद केजरीवाल का है, जिसमें पार्टी के नेता और दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, आशुतोष, दिलिप पांडे और दिल्ली के कुछ मंत्रियों का समर्थन मिला हुआ है.

kumar

वहीं दूसरा खेमा कुमार विश्वास का है, जिसमें कपिल मिश्रा, अलका लांबा और सोमनाथ भारती जैसे नेता शामिल हैं. पार्टी के कुछ नेताओं का कहना है कि कपिल मिश्रा को उनके खराब प्रदर्शन के कारण हटाया गया है. एमसीडी चुनाव के दौरान पानी सप्लाई की जबरदस्त समस्या पैदा हो गई थी जिसे संभालने में कपिल मिश्रा नाकाम रहे.

दिल्ली सरकार में मंत्री पद से हटाए जाने के बाद कपिल मिश्रा ने ट्वीट कर कहा, मैं इकलौता ऐसा मंत्री हूं जिस पर भ्रष्टाचार के एक भी मामले नहीं हैं. मैंने किसी बेटी आ रिश्तेदार को पद नहीं दिया. मेरे खिलाफ कोई सीबीआई की जांच नहीं हुई.

इससे पहले कपिल मिश्रा ने दो ट्वीट कर रविवार को टैंकर घोटाले को लेकर बड़ा खुलासा करने की बात कही. कपिल मिश्रा ने कहा कि मैंने आज शाम दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को भ्रष्टाचार के खिलाफ कुछ अहम दस्तावेज दिए हैं जिसका कल खुलासा करूंगा.

kapil mishra

तस्वीर: कपिल मिश्रा के ट्विटर वाल से

कुमार विश्वास का आप में मजबूत होना अरविंद केजरीवाल खेमे के लिए नागवार गुजर रहा है. कपिल मिश्रा को मंत्री पद से हटाना आप के अंदर मचे बवाल का किस्सा बयां कर रहा है. अमानतुल्लाह खान ने पार्टी में नहीं रहते हुए भी 6 समितियों में जगह बना ली और कपिल मिश्रा को कुमार विश्वास को साथ देना भारी पड़ गया.

कपिल मिश्रा के बारे में कहा जाता है कि कभी वे अरविंद केजरीवाल खेमे के जबरदस्त समर्थक रहे हैं. पर पिछले कुछ दिनों से कपिल मिश्रा कुमार विश्वास खेमे के नजदीक आ गए. अरविंद केजरीवाल से धीरे-धीरे मोह भंग होने लगा.

कपिल मिश्रा दिल्ली के करावल नगर सीट से विधायक हैं. कपिल मिश्रा ने एमसीडी चुनाव में हार के बाद कहा था कि ईवीएम को दोष देना गलत है. साथ ही कुमार विश्वास का भी पक्ष लिया था.

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