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3 साल बाद भी देश की जनता पर चल रहा है मोदी का मैजिक

मोदी जानते हैं कि राजनीति में जनसमर्थन स्थाई नहीं होता. उसे बचाए रखने के लिए उनकी सरकार को सिस्टम के छेद जल्दी भरने होंगे

s. pandey Updated On: May 17, 2017 08:07 AM IST

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3 साल बाद भी देश की जनता पर चल रहा है मोदी का मैजिक

16 मई, 2014 को विराट जनादेश के साथ नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री चुन लिए गए. देखते ही देखते मोदी सरकार ने रायसीना हिल्स पर तीन साल पूरे भी कर लिए. इन तीन सालों में मोदी का डंका ऐसा बजा कि बीजेपी उनके नाम पर ही चुनाव जीतने लगी.

मोदी-मोदी करके बीजेपी देश के 9 राज्यों में अपनी सरकारें बना चुकी है. देश में अब 29 में से 13 राज्यों में बीजेपी की सरकारें हैं या फिर वह गठबंधन की सरकार में शामिल है. यानी भारत की कुल आबादी का 52.7 फीसदी हिस्सा बीजेपी शासन के तहत आता है.

'गूंगे' प्रधानमंत्री का तगमा लिए मनमोहन सिंह के वक्त अखबार और न्यूज़ चैनल - पॉलिसी पैरालिसिस, अटके रणनीतिक प्रोजेक्ट्स, पाकिस्तान को कब मिलेगा जवाब और कमजोर प्रधानमंत्री जैसे जुमलों से भरे रहते थे. मोदी ने आकर इसे काफी हद तक बदला है. अब स्वच्छ भारत, मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और जन धन योजना के जुमले उछाले जाते हैं.

Narendra Modi

सरकार बनने के तीन साल बाद भी नरेंद्र मोदी पहले की तरह जनता में लोकप्रिय बने हुए हैं

मोदी सरकार को जुमलों की सरकार कहती आई

हालांकि, कांग्रेस मोदी सरकार को जुमलों की सरकार कहती आई है. उसने सूट-बूट की सरकार जैसे जुमलों का इस्तेमाल कर मोदी को घेरना चाहा था. पर लगता है कि देश किसी और ही दिशा में सोच रहा है.

लोकल सर्कल्स द्वारा टाइम्स ग्रुप के लिए गए सर्व में यह बात निकल कर आई कि 81 फीसदी लोग मानते है कि दुनिया में भारत की पोजीशन सुधरी है. 64 फीसदी ने पाकिस्तान से निपटने के तरीके को ठीक ठहराया है. 61 फीसदी के हिसाब से सरकार सांप्रदायिकता से अच्छे तरीके से निपट रही है. 51 फीसदी ने माना कि आतंकवाद और उससे जुड़ी गतिविधियों में कमी आई है. देश पर चढ़ा मोदी का बुखार उतरने का नाम नहीं ले रहा.

तस्वीर बड़ी ही सुनहरी दिखती है, पर इसे बदलने में वक्त नही लगेगा. मोदी इसे अच्छी तरह जानते हैं. नोटबंदी की कड़वी दवा पिला कर मोदी ने गरीब को अपने साथ ना मिला लिया होता तो आज तस्वीर कुछ दूसरी होती.

एसी कमरों में बैठ कर जब कुछ नेतागण और विशेषज्ञ आम आदमी के दर्द को बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर रहे थे. तब एटीएम की लाइनों में लगा आम आदमी मोदी के गुण गा रहा था. मोदी ने नोटबंदी से अमीर और गरीब के बीच की लाइन को इतना गहरा कर दिया कि वो खाई नजर आने लगी.

नोटबंदी के दौरान देश भर में बैंकों और एटीएम के आगे घंटों तक लोग खड़े रहे

नोटबंदी के दौरान देश भर में बैंकों और एटीएम के आगे घंटों तक लोगों की लंबी-लंबी कतारें लगी रहती थीं

नोटबंदी का दांव काम कर गया

लाइन के दूसरी तरफ खड़े गरीब को पहली बार यह लगा कि यह सरकार उसके लिए कुछ करना चाहती है. नोटबंदी का दांव काम कर गया और नतीजे में मिली उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की जबरदस्त जीत.

मोदी सरकार का दावा है कि उसने अभूतपूर्व काम किया है. पर उसमें अभी कई छेद है जिन्हें जल्द से जल्द भरना होगा. दो-तिहाई लोगों के लिए मंहगाई अभी भी सबसे बड़ी समस्या है. उपलब्ध रोजगारों के अवसर उम्मीद से कहीं नीचे है. पाकिस्तान आज भी मूंछें उमेठता है. महिलाएं आज भी सम्मान व सुरक्षा से वचिंत हैं. ब्लैकमनी वापस नही आ पाई है. आज भी हर दिन 35 किसान आत्महत्या करने को मजबूर हैं. कश्मीर की हालात नाजुक है. देश में आए दिन नक्सली हमले होते रहते हैं.

लाख कमियों के बावजूद देश आज भी मोदी के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है. क्योंकि विपक्ष कोई सशक्त नेतृत्व खड़ा नही कर सका. बीजेपी मोदी के दम पर उम्मीदों के शिखर पर है. 2019 में उसे कोई प्रतिद्वंदी दिखाई नहीं देता. यह सच है कि आज जहां बीजेपी है उसमें मोदी के जादू के साथ कांग्रेस नेतृत्व की नाकामी का भी बराबर योगदान है.

New Delhi: Congress Vice president Rahul Gandhi with MP's of Opposition parties during a protest outside Parliament against the government’s move to demonetise high tender notes, in New Delhi on Wednesday. PTI Photo by Kamal Kishore (PTI11_23_2016_000036B)

कमजोर विपक्ष के चलते मोदी सरकार के लिए कभी दिक्कत नहीं पेश आई

राजनीति में जनसमर्थन स्थाई नहीं होता

मोदी लंबी राजनीतिक पारी खेल कर यहां तक पहुंचे हैं. इंडिया शाइनिंग की नाकामी से उन्होंने जरूर सबक लिए होंगे. वह जानते होंगे कि राजनीति में जनसमर्थन स्थाई नहीं होता. उसे बचाए रखने के लिए सिस्टम के छेद जल्दी भरने होंगे.

मोदी जरूर जानते होंगे कि नोटबंदी के बाद गरीब, किसान और आम जन का जो अपार समर्थन उन्हें मिला था वह भी स्थाई नहीं है. पेट भरने के लिए जुमले काफी नहीं, पेट के लिए रोटी का जुगाड़ करना ही होगा. नहीं तो वह दिन दूर नहीं जब गरीब खाली पेट किसी दूसरे के जादू में फंस जाएगा.

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