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दो दशक बाद सुमो के डंक से लालू फिर घायल, बदले हालात में बचना आसान नहीं!

सुशील मोदी ने लालू यादव और उनके परिवार के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ लंबे समय से मोर्चा खोल रखा है

Ravishankar Singh Ravishankar Singh | Published On: May 17, 2017 11:29 PM IST | Updated On: May 18, 2017 11:32 AM IST

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दो दशक बाद सुमो के डंक से लालू फिर घायल, बदले हालात में बचना आसान नहीं!

दो दशक बाद लालू यादव के घर परेशानियों का दौर फिर लौट आया है. इस बार भी वह सुशील मोदी के रचे व्यूह में फंसते नजर आ रहे हैं. राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के सुप्रीमो और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव के 22 ठिकानों पर मंगलवार को आयकर विभाग का छापा पड़ा था. 20 साल पहले भी 21 जून, 1997 को लालू यादव और उनके रिश्तेदारों के ठिकानों पर सीबीआई की रेड पड़ी थी.

ये महज संयोग ही है कि 20 साल पहले जब चारा घोटाला मामले में लालू यादव के ठिकानों पर सीबीआई की रेड हुई थी, तब वह बिहार की सत्ता पर काबिज थे. और आज भी उनकी पार्टी आरजेडी बिहार की गठबंधन सरकार में हिस्सेदार है.

Lalu prasad yadav

पहले और अब पड़ी रेड में काफी अंतर

पहले पड़ी सीबीआई की रेड में और अब के आयकर विभाग की रेड में काफी अंतर है. दो दशक पहले लालू देश के बड़े ताकतवर राजनीतिक हस्तियों में से एक होते थे. एक फर्क यह भी है कि उस समय लालू यादव राज्य के मुख्यमंत्री थे और अब उनके दोनों बेटे बिहार सरकार में मंत्री हैं.

शायद देश के राजनीतिक इतिहास में यह पहली घटना थी जब किसी मुख्यमंत्री के सरकारी आवास पर सीबीआई का छापा पड़ा था. केंद्र में उस समय जनता दल के नेतृत्व वाली सरकार थी और इंद्र कुमार गुजराल देश के प्रधानमंत्री थे.

सीबीआई के तत्कालीन निदेशक जोगिंदर सिंह ने हर तरह के दबावों को दरकिनार कर लालू को गिरफ्तार किया था. लालू ने गिरफ्तारी से ठीक पहले अपनी पत्नी राबड़ी देवी को मुख्यमंत्री बना कर सबको हैरान कर दिया था.

स्थिति कमोवेश एक जैसी ही है. 90 के दशक में हुए चारा घोटाले ने लालू यादव को चुनाव लड़ने से दूर कर दिया. इसके चलते लालू आसमान से सीधे जमीन पर आ गिरे थे.

Lalu Yadav Residence in Patna

आयकर छापेमारी के दौरान पटना स्थित लालू यादव के घर के बाहर मौजूद मीडियाकर्मियों की भीड़ (फोटो: पीटीआई)

बेटे-बेटियों के सहारे लालू सियासी तौर पर उठने की कोशिश कर ही रहे थे कि सुशील मोदी उन्हें लेकर फिर हमलावर हो गए. इससे लालू एक बार फिर 20 साल पहले वाली हालत में पहुंचते दिख रहे हैं.

कारगुजारियों की सजा बेटे-बेटियों को मिलने वाली है

लालू यादव इस बार रिंग मास्टर की भूमिका में थे और उनके बेटे रिंग के अंदर हैं. राजनीतिक जानकार मानते हैं कि लालू की कारगुजारियों की सजा अब उनके बेटे और बेटियों को मिलने वाली है. इसका अंदेशा इस बात से और प्रबल होता है कि इस बार भी लालू यादव को वही व्यक्ति घेर रहा है जो पहले भी उन्हें घेरा करता था.

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता सुशील कुमार मोदी 20-25 साल पहले भी लालू यादव के खिलाफ मोर्चा खोल कर संघर्ष करते थे. यही काम वो फिर कर रहे हैं. उन्होंने लालू के भ्रष्टाचार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है.

sushil modi

सुशील मोदी लंबे समय से लालू यादव और उनके परिवार के कथित भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं

सुशील मोदी को 90 के दशक के दौर में केंद्र का समर्थन नहीं मिलता था. सिर्फ मीडिया के उनके कुछ साथी लालू यादव के खिलाफ दायर की गई याचिकाओं का जिक्र अपने अखबारों के किसी हिस्से में कर देते थे.

लेकिन, अब वक्त और हालात दोनों बदल गए हैं. सुशील मोदी भी बदले हैं. अब वह 20 साल पहले वाले सुशील मोदी नहीं हैं. केंद्र से भी उन्हें खूब समर्थन मिल रहा है. मीडिया भी पहले की तुलना में ज्यादा पावरफुल हो गई है.

चारा घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी

आपको बता दें कि 11 मार्च, 1996 को सुशील मोदी और अन्य की याचिका की सुनवाई करते हुए पटना हाईकोर्ट ने 950 करोड़ रुपए के चारा घोटाले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी.

सुप्रीम कोर्ट ने भी 19 मार्च, 1996 को पटना हाईकोर्ट के फैसले की पुष्टि की थी. और पटना हाईकोर्ट के दो जजों को मामले की निगरानी के आदेश दिए थे.

Patna High Court

पटना हाईकोर्ट ने 1996 में सीबीआई को बहुचर्चित चारा घोटाला मामले की जांच सौंपी थी (फोटो: फेसबुक से साभार)

अब 20 साल बाद एक बार फिर से सुशील मोदी के ही अभियान पर आयकर विभाग ने बेनामी संपत्ति मामले में लालू और उनके सहयोगियों के यहां रेड डाली है. कहा जा सकता है कि जिस तरह परेशानियों ने बिहार के ताकतवर नेता लालू को फिर घेर लिया है उससे निकल पाना उनके लिए कतई आसान नहीं होगा.

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