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हर सीडी कुछ कहती है: भारतीय राजनेताओं के गुप्त चलचित्रों का विश्लेषण 

देश की राजनीति में कांग्रेस और बीजेपी से लेकर नई-नवेली आप पार्टी के नेताओं की सेक्स सीडी आ चुकी है

Rakesh Kayasth | Published On: May 01, 2017 04:32 PM IST | Updated On: May 09, 2017 05:26 PM IST

हर सीडी कुछ कहती है: भारतीय राजनेताओं के गुप्त चलचित्रों का विश्लेषण 

खबर एकदम ताजा है. चाल चरित्र और चेहरे वाली पार्टी के एक भोले-भोले सांसद सेक्स स्कैंडल में फंस गये हैं. लड़की ने सांसद महोदय को घर पर बुलाया. जनता के बुलावे पर उसके घर जाना ही राजधर्म है. सांसद महोदय का कहना है कि लड़की ने उन्हे फुसलाकर शर्बत पिलाया और नशे की हालत में उनकी इ्ज्ज़त लूट ली.

मैं कनफ्यूज हो गया कि अबला शब्द स्त्रीलिंग है, पुल्लिंग. तो दुखियारे सांसद ने कहा है कि लड़की धमकी दे रही है कि पैसे दो वर्ना सीडी जारी कर दूंगी. ज्यादा वक्त नहीं गुजरा जब केरल की लेफ्ट फ्रंट सरकार के एक मंत्री को सेक्स स्कैंडल में फंसकर अपनी नौकरी गंवानी पड़ी थी. मुझे महसूस हो रहा है कि सीडी का चक्र अब 360 डिग्री घूम चुका है. लेफ्ट, राइट और सेंटर कोई भी इससे बच नहीं पाया है.

बात आगे बढ़ाने से पहले साफ कर दूं कि अब मैं जो कुछ बताने जा रहा हूं कि वह माताओं और बहनों के लिए नहीं है. वैसे जमाना फेमिनिज्म का है, इसलिए हो सकता है कि मेरी बात कुछ लोगो को बुरी भी लगे. खैर जो अपने रिस्क पर पढ़ना चाहें, उनकी मर्जी. रोकने वाला भी मैं कौन होता हूं.

...हां मैने हर तरह की सीडी देखी है

मैं यह कबूल करता हूं कि हाल के बरसों में राजनेताओं की जितने भी नीले चलचित्र आये हैं, उनमें से ज्यादातर मैंने देखे हैं. अगर आपको लगता है कि मैं पोर्न एडिक्ट हूं तो यह आपकी गलतफहमी है. पोर्न देखने वालों के लिए कंटेट की क्या कमी है? थुलथुल नेताओं के भोंडे अंतरंग पल उत्तेजना नहीं जगाते हैं बल्कि मन में इस तरह के भाव पैदा करते हैं कि आदमी हमेशा के लिए संन्यासी हो जाए.

 

नेताओं की सीडी मैं पेशेवर वजह से देखता हूं, ताकि आपके सामने वो विश्लेषण पेश कर सकूं जो आज तक किसी ने नहीं किया है. नेता हर काम देश के भले के लिए करते हैं. मंदिर और मजार भी जाते हैं तो अपने लिए नहीं, देश के लिए दुआएं मांगते हैं. इसलिए मैं यही मानकर चल रहा हूं कि वह कैमरे पर जो कुछ करते हुए पाए गए, वह भी उन्होंने देश की खातिर ही किया होगा.

उनके इस नेक काम में देश की कौन सी भलाई छिपी थी, यह तो सीडी देखने के बाद ही पता चलेगा. विश्लेषण शुरू करने से पहले एक छोटा सा डिस्क्लेमर. कुछ नेताओं के नाम गायब कर दिये गये हैं और कुछ के नाम मामूली रूप से बदल दिए गए हैं क्योंकि ना तीर से ना तलवार से, बंदा डरता है तो सिर्फ मुकदमों की मार से...

सबका साथ, सबसे सहवास

शुरुआत भारतीय राजनीति के सीनियर सिटिजन से. वह देश की सबसे पुरानी पार्टी के सबसे पुराने नेता हैं. पितृत्व भाव से परिपूर्ण हैं. कइयों के जैविक पिता हैं और जो बच गये उन सबके मानस पिता. आज तक उन्होंने कभी च्यवनप्राश या शिलाजीत की मॉडलिंग नहीं की. लेकिन `मेरा जीवन ही मेरा संदेश है’ वाले महान दर्शन में आस्था रखते हैं.

कहने वाले कहते थे कि जब उनके यौवन की एक्सपायरी डेट खत्म हुई, तब जाकर स्पाइकैम और सीडी का आविष्कार हुआ. इसलिए उनके ज्यादातर महान कृत्य दर्ज नहीं हैं लेकिन पंडीजी ने इस तथ्य को निराधार साबित कर दिया. दरअसल विवाद स्पाइकैम और सीडी के आविष्कार पर नहीं बल्कि उनके यौवन की एक्सपायरी डेट पर था. बाबा ने बता दिया कि टेक्नोलॉजी भले ही परिवर्तनशील हो, लेकिन उनका यौवन शाश्वत है.

उनकी सीडी तब आई जब वह एक राजभवन की शोभा बढ़ा रहे थे. वह कहा करते थे, मैं हमेशा सबको साथ लेकर चला हूं. सीडी में भी वह यही कर रहे थे, हम एक, हमारे दो वाले अंदाज में! भय या पक्षपात के बिना पंडीजी दोनों पक्षों के साथ समान रूप से एकदम बराबर-बराबर न्याय करते देखे जा सकते थे. लेकिन उनका न्यायपूर्ण व्यवहार शत्रुओं को पसंद नहीं आया.

सीडी मार्केट में आ गई तो लोगों ने कहना शुरू किया. नारायण-नारायण! ऐसा व्यक्ति राज्यपाल होने के लायक नहीं है. पुराने जमाने के नेताओं में नैतिकता इस कदर भरी होती थी कि वह बात-बात में यूं ही छलक जाया करती थी. पंडीजी ने ये कहते हुए इस्तीफा दे मारा कि मेरी सेहत ठीक नहीं रहती, मैं इतनी बड़ी जिम्मेदारी नहीं उठा सकता. हालांकि सेहत का सार्टिफिकेट सीडी में कैद था, लेकिन वह मानने को तैयार नहीं हुए.

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पंडीजी फिलहाल सभी सांसारिक तापों से मुक्त होने की तैयारी में हैं. उनकी आखिरी चिंता यही है कि न्यायालय द्वारा प्रमाणित उनके सबसे छोट जैविक पुत्र का किसी तरह राजनीतिक करियर बन जाये.

सीडी में 'ओरल कोड ऑफ कंडक्ट'

पंडीजी की एक पार्टी के एक और नेता की सीडी देखने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ. सीडी तब बनी थी, जब नेताजी उस समय अपनी पार्टी के आधिकारिक प्रवक्ता थे. मनु के कानून से लेकर आधुनिक भारत के संविधान तक उन्होंने दुनिया भर की तमाम न्यायिक प्रक्रियाओं का गहरा अध्ययन कर रखा था.

वह मानते आये हैं कि कानून और संविधान के विकास में मौखिक परंपराओं का भी उतना ही योगदान है, जितना लिखित परंपराओं का. उनकी सीडी में मौखिक परंपरा का पूरी तरह पालन किया जा रहा था. कर्तव्यपरायण महिला सहयोगी को पार्टी प्रवक्ता महोदय मौखिक रूप से कुछ आश्वासन भी दे रहे थे- एडवोकेट जनरल बनवा दूंगा वगैरह-वगैरह.

सीडी आई तो पार्टी आलाकमान के कान खड़े हुए. प्रवक्ता महोदय से कहा गया... पार्टी में 'मोरल कोड ऑफ कंडक्ट' लागू था. लेकिन आप तो 'ओरल कोड ऑफ कंडक्ट' पर उतारू हो गये. खैर कुछ समय के लिए मुंह बंद कर लीजिये. उसके बाद कुछ समय तक प्रवक्ता महोदय ने प्रेस को ब्रीफ नहीं किया. बाद में मामला ठंडा हो गया क्योंकि बाजार में कुछ नई सीडी आ गई.

पुरुष पर पौरुष दिखाने वाले महापुरुष

अगर आप सोच रहे हैं कि सीडी देश की सबसे पुरानी और सेक्युलर पार्टी में ही बनती है. तो इसका मतलब यह है कि आपने कुछ नहीं सुना, देखने का तो सवाल ही नहीं पैदा होता. राष्ट्रवादी सीडी के नमूने भी मार्केट में मौजूद हैं. अजब एमपी के एक गजब मंत्री हुआ करते थे. नाम था शायद माधवजी. लीक से हटकर कुछ करने में यकीन रखते थे.

माधवजी की सीडी में दो पुरुषों के बीच पौरुष के प्रदर्शन की जंग छिड़ी थी. जिसमें एक कापुरुष (कायर) था और दूसरा महापुरुष यानी स्वयं माधवजी. पीठ दिखाना माधवजी को मंजूर नहीं था. वह तो दूसरे पुरूष की पीठ पर सवार होकर अपने पौरुष का प्रदर्शन कर रहे थे. मामला वीररस से ओत-प्रोत था. सीडी बनाने वाले ने शुरू से शूट नहीं किया था, इसलिए यह पता नहीं चल पाया कि पौरूष के प्रचंड प्रदर्शन से पहले माधवजी ने कामदेव की आरती गाई थी या नहीं.

सीडी उजागर होने के बाद इस मामले में छिछोरी ट्वीट्स का सिलसिला शुरू हो गया और माधवजी जैसे महापुरुष को जेल तक जाना पड़ा. सिद्धांत की खातिर माधवजी हंसते-हंसते जेल गये और कुछ दिन बाद रिहा होकर लौट आए. पुरूष से अगर महापुरुष जीत गया तो कौन सी आफत आ गई? लेकिन माधवजी सीडी के लाखों को दर्शकों को ये बात समझायें तो कैसे?

आम आदमी के `निष्काम’ काम वाली सीडी

देश की नई नवेली ईमानदार पार्टी का सीडी प्रकरण उसके राजनीतिक प्रयोग की तरह अनोखा था. सीडी में एक मंत्री था और राशन कार्ड बनवाने आई एक दुखियारी थी. शुरू में ऐसा लगा कि दोनों पक्ष सेवा भाव से प्रेरित हैं. लेकिन ठीक से देखने पर सीडी की विचित्रता समझ में आई.

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दिल्ली का मंत्री दुनिया को बता रहा था कि `काम’ भी इस तरह निष्काम हो सकता है. कमबख्त अपनी जगह से हिलने तक को तैयार नहीं. कभी लगता था कि मंत्री होने की अकड़ में है, कभी लगता था कि किसी दार्शनिक चिंतन में है. वह तो खैर अलग किस्म का लेन-देन था. लेकिन ऐसी घनघोर उदासीनता के साथ वह कुछ और करता तब भी ईमानदार मुख्यमंत्री जी कान पकड़कर निकाल देते. सामने वाले आदमी को नींद आ जाये, ऐसा आचरण देखकर.

एब्सट्रेक्ट किस्म की फिल्में बनाकर गोल्डन पीकॉक जीतने वाला कोई इंटरनेशल फिल्म मेकर इस सीडी से प्रेरणा ग्रहण कर सकता है. पूरी फिल्म में सिर्फ एक डायलॉग है, जो क्लाइमेक्स पर बोला गया है. अपना फर्ज निभाकर जब दुखिया विदा हो रही थी, तब मंत्री ने कहा- किसी को बताना मत.

सांवरी- वी लव यू

मैं शुरू से कह रहा हूं कि हर सीडी कुछ कहती है. नेताओं की तमाम सीडी की अपनी-अपनी कहानियां हैं. राजस्थान के दबंग नेता और मंत्री मदनलाल मदेरणा की सीडी को भाषा के अनोखे प्रयोग के लिए याद रखा जाएगा. मदनलाल जी के साथ डांसर कम नर्स सांवरी देवी थीं. दोनों जब अतरंग हुए तो मंत्रीजी ने कहा- सांवरी वी लव यू. हिंदी में मतलब यह कि सांवरी हम तुम्हें प्यार करते हैं. मैनेजमेंट की कक्षाओं में पढ़ाया जाता है- नेवर से आई, ऑलवेज यूज वी.

सामूहिकता की यह भावना मदनलाल जी सबसे अतंरग पलों में भी नहीं भूले, इसलिए आई को वी बना दिया. सीडी आने के बाद सांवरी गायब हो गई. इल्जाम है कि नेताजी ने उसकी हत्या करवा कर लाश को किसी नहर में फिंकवा दिया, लेकिन बरसों बाद भी पुलिस के हाथ कुछ नहीं लग पाया है.

सीडी अभी बाकी है...

लोकतंत्र है तो नेता हैं. नेता हैं तो उनके कारनामे हैं. कारनामे हैं तो स्पाइकैम और सीडी भी हैं. सीडी आगे भी आती-जाती रहेंगी. विधानसभा में ब्लू फिल्म देखने से लेकर फोन पर अश्लील बातचीत तक की ना जानी कितनी कहानियां हर रोज मीडिया में आती हैं.

भारत एक उदार देश है. पहले चटखारे लेकर किस्से सुनता है और बाद में उन्हें पूरी तरह भुला देता है. नेता अक्सर इल्जाम लगाते हैं कि मीडिया उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश करता है. मेरा कहना है कि नेताओं के बयान ठीक से और पूरा सुनें. उनकी सीडी भी शुद्ध अंतकरण: और सात्विक भाव से देखें. हो सकता है, आपको वह सब नजर न आए जो मैंने अब तक देखा है.

(लेखक जाने-माने व्यंग्यकार हैं)

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