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1993 मुंबई बम धमाकों ने कैसे बदल दी अंडरवर्ल्ड की तस्वीर

अब तक अंडरवर्ल्ड के साए में जी रहे मुंबई ने पहली दफे 1993 में आतंकवादी हमलों का दंश झेला था.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Jun 16, 2017 06:24 PM IST

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1993 मुंबई बम धमाकों ने कैसे बदल दी अंडरवर्ल्ड की तस्वीर

इंसाफ के एलान में 24 साल का वक्त जरूर लगा लेकिन अब अदालत के फैसले से उन दिलों की टीस जरूर कम होगी जिन्हें मुंबई के धमाकों ने कभी न भूलने वाले जख्म दिये. विशेष टाडा अदालत ने गैंगस्टर अबू सलेम समेत 6 आरोपियों को दोषी ठहराया. मुख्य साजिशकर्ता अबू सलेम और मुस्तफा दौसा पर गंभीर आरोप हैं. दोनों ही हमले की साजिश में शामिल थे और आरडीएक्स जैसे विस्फोटक मुंबई पहुंचाए थे. पहली बार धमाकों में इन विस्फोटकों का इस्तेमाल मुंबई में ही किया गया गया था. धमाकों के बाद से ही ये फरार थे जिस वजह से इनकी गिरफ्तारी के बाद पार्ट बी की सुनवाई हुई. अब मुंबई धमाके पर इंसाफ अपने आखिरी दौर में है.

Pigeons hover around the Gateway of India monument in Bombay September 1, 2003. Animal lovers in India's financial capital were thrilled to see the pigeons return to the Gateway of India where twin powerful bomb blasts last Monday saw 52 people dead and over 150 injured. Meanwhile the Bombay Police said on September 1 that they have detained two men and a women under tough anti-terorism laws in connection with the blasts. REUTERS/Sherwin Crasto SC/TW - RTR2DEY

मुंबई के लिए कहा जाता है कि ये शहर सोता नहीं है. इसकी रफ्तार कभी थमती नहीं है. सपनों की ये मायानगरी अपनी रवानगी में बहने के लिये जानी जाती है. इसकी आबोहवा में ग्लैमर, बॉलीवुड, और अंडरवर्ल्ड की कहानियां रोमांच को बढ़ा जाती हैं. लेकिन 24 साल पहले की एक तारीख से देश की इस कमर्शियल कैपिटल के हिस्से एक ‘ब्लैक फ्राइडे’ भी आया था. 12 मार्च, 1993 को पूरा मुंबई धमाकों से दहल गया था. आज भी उन धमाकों के काले धुएं लोगों की जिंदगी से छटे नहीं हैं . 24 साल बाद धमाकों के गुनहगारों पर अदालत का दूसरा बड़ा फैसला आता है.

इस बार बम्बई का सामना हुआ आतंक और अंडरवर्ल्ड के गठजोड़ से

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ये ऐसा आतंकी हमला था जिसने आतंकवाद और अंडरवर्ल्ड की परिभाषा ही बदल दी. अंडरवर्ल्ड के साए में जीने वाला मुंबई पहली दफे आतंकवादी हमलों को झेल रहा था.

मुंबई में किसी दौर में रहे अंडरवर्ल्ड डॉन वरदराजन मुदलियार, हाजी मस्तान, करीम लाला जैसे नामों के वक्त मुंबई ने गैंगवार देखा था लेकिन पहली दफे एक अंडरवर्ल्ड डॉन के हाथों मुंबई पर आतंकी हमला देख रहा था.

न सिर्फ पाकिस्तान से इस हमले की साजिश रची गई बल्कि यहां के लोगों को विस्फोटक तैयार करने की ट्रेनिंग तक पाकिस्तान में दिलाई गई. पहली बार तस्करी के जरिये आरडीएक्स जैसे विस्फोटक समंदर के रास्ते मुंबई के ठिकानों पर पहुंचे. मुंबई में एक स्लीपर सेल पहली बार एक्टिव हुई जिसने विस्फोटक बनाया और धमाकों को अंजाम दिया. पहली बार देश ने सीरियल ब्लास्ट का हमला झेला था.

मुंबईकरों को मार कराची भागा दाऊद अब भी आजाद

257 लोगों की जानें गईं और ये जानें लेने वाला शख्स है दाऊद इब्राहिम कासकर जो मुंबई की गलियों से निकलकर अब पाकिस्तान की पनाह में हैं और भारत के खिलाफ आतंकी हमले और साजिशें करता रहता है.

4 नवंबर, 1993 को 10 हजार पन्नों की चार्जशीट दायर कर 189 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ. मुंबई बम धमाकों में आरोपी मुस्तफा दोसा और अबू सलेम सहित रियाज सिद्दीकी, करिमुल्ला खान, फिरोज अब्दुल राशिद, ताहिर मर्चेंट, अब्दुल कयूम के खिलाफ सीबीआई ने चार्जशीट दर्ज कर टाडा कोर्ट में मामला चलाया. इन धमाकों के बाद अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन, अबू सलेम, मुस्तफा दौसा को फरार घोषित किया था.

याकूब मेमन को फांसी से शुरू हुआ सजा का सिलसिला

1993 धमाके के मुकदमे का सबसे पहला और अहम फैसला 2006 मे आया था. तब 123 अभियुक्तों में से 100 को सजा सुनाई गई थी और 23 को बरी कर दिया गया था. जिन अभियुक्तों को सजा सुनाई गई थी उनमें अभिनेता संजय दत्त भी शामिल थे.

इसी फैसले में याकूब मेमन को फांसी की सजा सुनाई गई. याक़ूब धमाकों में वांटेड टाइगर मेमन का भाई था. याकूब मेमन को 30 जुलाई, 2015 को महाराष्ट्र के यरवडा जेल में फांसी दी गई. जबकि धमाके के मुख्य अभियुक्त दाऊद इब्राहिम, टाइगर मेमन, अनीस इब्राहिम समेत 20 लोग अभी भी फरार हैं.

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दाउद के खिलाफ इंटरपोल का नोटिस जारी होने के बावजूद उसे पकड़ा नहीं जा सका है.

लेकिन जो नाम दाऊद के अलावा सामने आए वो कानून के शिकंजे से बच नहीं सके. पार्ट बी की सुनवाई में दाऊद का दायां हाथ माने जाने वाले जो बड़े अभियुक्त मुस्तफा दौसा और अबू सलेम समेत छह लोगों को कोर्ट ने दोषी करार दिया है. सोमवार को सजा का एलान होगा.

सलेम की फांसी पर प्रत्यर्पण का पहरा

बड़ा सवाल ये है कि क्या गैंगस्टर अबू सलेम को याकूब मेमन की तरह फांसी मिलेगी ? दरअसल गैंगस्टर अबू सलेम की फांसी के आड़े आ सकती है प्रत्यर्पण संधि. सलेम को 11 नवंबर 2005 को पुर्तगाल से प्रत्यर्पित किया गया था. सलेम को पुर्तगाल सरकार ने इस शर्त पर भारत को सौंपा था कि उसे किसी भी मामले में मौत की सजा नहीं दी जाएगी. जबकि मुस्तफा दौसा को साल 2004 में यूएई से गिरफ्तार किया गया था.

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जब दाऊद ने पूछा- कैसे लगे हमारे धमाके?

बकौल मुंबई के एक जर्नलिस्ट, बलजीत परमार का कहना है कि दाऊद ने उन्हें फोन कर पूछा था कि – भाईसाहब हमारे धमाके कैसे लगे? बलजीत परमार के लिये कहा जाता है कि उन्होंने ही 1993 में मुंबई ब्लास्ट के मामले में संजय दत्त की खबर ब्रेक थी.

दाऊद ने मुंबई पर हमला करने के लिये उस नेटवर्क का इस्तेमाल किया जिसे वो अपनी तस्करी और अंडरवर्ल्ड के दूसरे कामों के लिये करता था. दाऊद ने अंडर्वर्ल्ड के कनेक्शन का इस्तेमाल आतंकी हमले के लिये किया. यहीं के लोग उसके साथ देश के खिलाफ हमले की साजिश में शामिल हो गए और वो लोग भी हिस्सा बने जिन्हें दाऊद का असल मकसद पता नहीं था.

लेकिन दो घंटों के सीरियल ब्लास्ट में मुंबई जिस तरह से लहुलूहान हुई उसने अंडरवर्ल्ड का चेहरा भी बदल कर रख दिया.

धमाकों के बाद डी-कंपनी भी हिन्दू-मुस्लिम में बंटी

दाऊद की डी-कंपनी भी मुंबई धमाकों के बाद दो फाड़ हो गई. मुंबई धमाकों ने दाऊद  और उसके करीबी शूटर रहे छोटा राजन के बीच दुश्मनी को हवा दी. छोटा राजन खुद को ‘देशभक्त’ बताता है. दोनों के बीच अदावत का सिलसिला इस तरह चला कि दोनों ही एक दूसरे के खून के प्यासे हो गए. दाऊद ने कई दफे छोटा राजन पर हमला कराया लेकिन वो बच निकला. बैंकाक में छोटा शकील के गुर्गों ने छोटा राजन पर गोलियां तक बरसाई.

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अब तक दोनों की गैंगवार में दोनों ही तरफ के कई लोग मारे जा चुके हैं. राजन के गैंग ने मुंबई धमाकों में शामिल दाऊद के गुर्गों सलीम कुर्ला , मोहम्मद जिंद्रान और माजिद खान को मार गिराया. छोटा राजन ने दाऊद इब्राहिम को सबसे बड़ा झटका साल 1998 में दिया. राजन के शूटरों ने दाऊद के करीबी माने जाने वाले मिर्जा दिलशाद बेग का नेपाल में ही मर्डर कर दिया.

मुंबई धमाकों के बाद भड़के गैंगवार में दाऊद ने भी छोटा राजन के करीबी होटल मालिक रामनाथ पायडे, बिल्डर ओ पी कुकरेजा और फिल्म डायरेक्टर मुकेश दुग्गल का मर्डर करा दिया . इसके बाद राजन के गैंग ने दाऊद के शार्प शूटर सुनील सावंत को ठिकाने लगा दिया. उसके बाद दाऊद का मुंबई में धंधा संभालने वाले थाकीउद्दीन वाहिद का मर्डर करा दिया.

2008 में फिर हमला, पर मुंबई कभी रुकती नहीं

इस गैंगवार में दोनों ही लोगों ने अपने-अपने करीबियों को मरते देखा है. अब छोटा राजन देश की जेल में बंद है जबकि दाऊद अब भी फरार है. मुंबई में गैंगवार की घटनाओं में कमी आ चुकी है.

कभी ना रुकने वाली मुंबई की रफ्तार हर हादसे और हमले को भुला कर आगे बढ़ने में यकीन रखती है. अब मुंबई ब्लास्ट का मामला अपने आखिरी पड़ाव में है. ऐसे में मुंबई के जख्मों पर कोर्ट का फैसला बड़ा मरहम है.

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