S M L

ट्राई की नई पहल से डिजिटल इंडिया के सपनों को लगेगी उड़ान?

मोदी के डिजिटल इंडिया के सपने और ‘ट्राई’ की नई पहल की पड़ताल

Ravishankar Singh Ravishankar Singh | Published On: Jun 06, 2017 11:58 PM IST | Updated On: Jun 06, 2017 11:58 PM IST

ट्राई की नई पहल से डिजिटल इंडिया के सपनों को लगेगी उड़ान?

देश में कॉल ड्रॉप की समस्या को देखते हुए भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने पिछले दो-तीन दिनों में कई कदम उठाए हैं. ट्राई ने उपभोक्ताओं के लिए तीन नए एप ‘माइ कॉल एप’, ‘माइ स्पीड एप’ और 'डू नॉट डिस्टर्ब’ लॉंन्च किए हैं. ट्राई के द्वारा उठाए गए ताजा कदमों से उपभोक्ताओं और मोबाइल कंपनियों के बीच अधिक पारदर्शिता आ सकती है.

अर्जुन राम मेघवाल के विडियो के बाद फिर चली है बहस

meghwal

देश की जर्जर और खराब मोबाइल नेटवर्क व्यवस्था उपभोक्ताओं के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है. देश के वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल के अनजाने में किए गए एक कॉल ने खराब नेटवर्क व्यवस्था की पोल खोल दी है.

कुछ दिन पहले ही देश के वित्त राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल का एक वीडियो सामने आया था, जिसमें मेघवाल पेड़ पर सीढ़ी लगा कर मोबाइल से बात कर रहे हैं. यह वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी वायरल हुआ था.

एक तरफ देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी डिजिटल इंडिया की बात करते हैं तो दूसरी तरफ उनके ही एक सहयोगी मंत्री देश के खराब मोबाइल नेटवर्क का शिकार होते हैं. आम लोगों को तो इस समस्या से हर दिन दो-चार होना पड़ता है. पर, सरकार तभी सुध लेती है जब किसी वीआईपी को इस समस्या से जूझना पड़ता है.

मेघवाल बिकानेर जिले से 12 किलोमीटर दूर ढोलिया गांव पहुंचे थे. इस दौरान लोगों ने उन्हें अपनी समस्याएं बताईं और कहा कि अधिकारी उनकी एक नहीं सुनते. इस पर मेघवाल ने अधिकारियों को फोन लगाने की कोशिश की, लेकिन उनके मोबाइल में नेटवर्क नहीं था. लोगों ने उन्हें बताया कि गांव में मोबाइल नेटवर्क नहीं है. मोबाइल नेटवर्क लाने के लिए आपको पेड़ पर चढ़ना पड़ेगा या घरों की छतों पर, तब जाकर मोबाइल नेटवर्क आएगा.

तभी मंत्री जी के लिए एक सीढ़ी का इंतजाम करवाया गया. सीढ़ी को एक पेड़ के साथ लगा दिया गया. मेघवाल जी सीढ़ी के सहारे पेड़ पर चढ़े तो मोबाइल में नेटवर्क आया और तब जाकर उनकी अधिकारियों से बात हो पाई.

अर्जुन राम मेघवाल के इस वीडियो के वायरल होने के बाद डिजिटल इंडिया के सपने पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं. ट्राई ने किरकिरी होते देख एक से बढ़ कर एक नई घोषणाओं की झड़ी लगा दी है.

‘माइ कॉल एप’ के जरिए उपभोक्ता वॉयस कॉल की गुणवत्ता के बारे में अनुभव को साझा कर सकेंगे. ट्राई ने उपभोक्ताओं के अनुभव और नेटवर्क की गुणवत्ता को लेकर आंकड़े जुटाने के मकसद से ये नई पहल शुरू की है.

इस एप में हर बार कॉल की समाप्ति पर एक पॉप अप (नोटिफिकेशन) आएगा. जिसमें ग्राहकों से कॉल की गुणवत्ता के बारे में अनुभव साझा करने का आग्रह किया जाएगा. उपभोक्ता स्टार के रूप में अपनी रेटिंग दे सकते हैं.

वहीं ‘माइ स्पीड एप’ उपयोगकर्ताओं की शिकायत के बिना भी सभी सेवाओं का डेटा ट्राई तक पहुंचाएगा. ट्राई के मुताबिक ये टेस्टिंग बहुत ही कॉम्पेक्ट और यूजर के लिए फ्री है. इससे यूजर न सिर्फ सर्विस को रेट कर सकता है बल्कि फीडबैक एप के माध्यम से ट्राई को भेज सकता है.

‘डू नॉट डिस्टर्ब’ एप के जरिए स्मार्टफोन यूजर्स को अपने मोबाइल नंबर को डीएनडी के तहत रजिस्ट्रेशन करने के बाद अनचाहे मैसेज और कॉल से बचने में मदद मिलेगी. साथ ही ट्राई ने एक नई वेबसाइट भी लॉन्च की है.

ट्राई ने इसके साथ ही दूरसंचार कंपनियों से कहा है कि वह अपने ग्राहकों को कम से कम ऐसे इंटरनेट प्लान की पेशकश करें जिसकी वैधता एक साल तक हो.

पिछले साल ही ट्राई ने मोबाइल कंपनियों को मोबाइल डाटा पैक की वैधता को 90 दिन से बढ़ा कर 365 दिन करने की अनुमति दे दी थी. ट्राई के मुताबिक इससे देश में इंटरनेट उपयोग करने वाले ग्राहकों की संख्या में बढ़ोतरी होगी.

ट्राई ने पिछले महीने जारी किया सर्वे

trai

पिछले कुछ समय से सरकार और टेलिकॉम ऑपरेटर कॉल ड्रॉप में कमी का दावा करते आ रहे हैं. ट्राई ने पिछले महीने ही एक सर्वे रिपोर्ट जारी की थी. सर्वे रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि लगभग 62.5 प्रतिशत उपभोक्ता कॉल ड्राप की समस्या से परेशान हैं. यह सर्वे किसी और ने नहीं बल्कि खुद दूरसंचार विभाग ने करवाया था.

इस सर्वे में 2 लाख 20 हजार 935 ग्राहकों से पूछताछ की गई थी. इनमें से 1 लाख 38 हजार 72 ग्राहकों (करीब62.5 प्रतिशत) ने कॉल ड्रॉप की शिकायत की थी.

ऑटोमेटेड कॉल सर्विस अथवा इंटीग्रेटेड वॉयस रिस्पांस सिस्टम (आइवीआरएस) द्वारा 23 दिसंबर 2016 से 28 फरवरी 2017 के दौरान किए गए सर्वे में ग्राहकों से मोबाइल कॉल्स की गुणवत्ता के बारे में सीधे फीडबैक लिए गए थे.

इस दौरान आइवीआरएस की ओर से देश भर में समस्त दूरसंचार सेवा प्रदान करने वाले टेलीकॉम ऑपरेटर्स से जुड़े ग्राहकों को 16 लाख 61 हजार कॉल्स कर उनसे उनका अनुभव जानने के लिए सवाल पूछे गए. ग्राहकों के जवाब से पता चला था कि कॉल ड्राप की समस्या घरों और दफ्तरों के भीतर सबसे ज्यादा गंभीर है.

टेलिकॉम एक्सपर्ट अनिल कुमार फर्स्टपोस्ट हिंदी से बात करते हुए कहते हैं, ‘डीओटी की एक रिपोर्ट है जिसमें ट्राई ने इंटीग्रेटेड वॉयस रिस्पांस सिस्टम (आइवीआरएस) पिछले साल दिसंबर और इस साल मार्च महीने में लॉन्च किया था. इसमें लगभग 60 प्रतिशत लोगों ने कॉल ड्रॉप की शिकायत की थी. ट्राई ने इन सभी शिकायतों को देश के सभी टेलिकॉम ऑपरेटर्स के पास भेजा था. लगभग 7 प्रतिशत शिकायतों को अभी तक दूर किया गया है.’

कमजोर है मोबाइल नेटवर्क moblie

अनिल कुमार आगे कहते हैं, ‘सात प्रतिशत कोई अचीवमेंट नहीं है. अगर इन्होंने कुछ सही किया है तो इसका मतलब यह है कि किसी और का नेटवर्क खराब किया होगा. मोबाइल नेटवर्क ऐसा है कि अगर एक कंपनी का एंटिना एक तरफ घुमाते हैं तो दूसरी कंपनी का नेटवर्क खराब हो जाता है. पूरे नेटवर्क को जब तक अपग्रेड नहीं किया जाएगा तब तक यह समस्या बनी रहेगी.’

अनिल कुमार कहते हैं, ‘अगर आप 10 किलो का वजन उठा पाने में सक्षम हैं और आपको 100 किलो का वजन उठाने को कहा जाए तो आप दब जाएंगे. जैसे ही पुराने नेटवर्क पर डाटा लोड करने की शुरुआत हुई पूरा नेटवर्क बैठ गया. यह नेटवर्क जो पहले डिजाइन किया गया था वह 2जी नेटवर्क के लिए था. जैसे ही 3जी आना शुरू हुआ देश में कॉल ड्रॉप की समस्या की शुरुआत हो गई. 4जी की तो बात ही छोड़ दीजिए. ऐसा नहीं है कि सरकार के पास नेटवर्क रिपोर्ट नहीं है. ट्राई को चाहिए कि स्पेक्ट्रम को बढ़ाया जाए. ट्रैफिक को एनालाइज कर देश में छोटे-छोटे हब बना कर ऑप्टिकल फाइवर नेटवर्क से जोड़ा जाए’

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का डिजिटल इंडिया का सपना उनके सबसे महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक है. इसी को ध्यान में रखते हुए पीएम मोदी ने पिछले मंत्रिमंडल फेरबदल में रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा को दूससंचार मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया था. दूरसंचार राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) मनोज सिन्हा ने कॉल ड्रॉप में सुधार के लिए कई कदम उठाए हैं. ताजा कदम भी इसी से जोड़ कर देखा जा रहा है.

अन्य बड़ी खबरें

वीडियो

क्रिकेट स्कोर्स और भी

Firstpost Hindi