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इनकम टैक्स दे रहे शख्स की मौत पर सरकार मुआवजा देती है?

सोशल मीडिया में इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें ये कहा जा रहा है कि अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न भरा है तो आपको बीमा कराने की जरूरत नहीं

FP Staff | Published On: Jul 10, 2017 10:08 PM IST | Updated On: Jul 10, 2017 11:10 PM IST

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इनकम टैक्स दे रहे शख्स की मौत पर सरकार मुआवजा देती है?

सोशल मीडिया में इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें ये कहा जा रहा है कि अगर आपने इनकम टैक्स रिटर्न भरा है तो आपको बीमा कराने की जरूरत नहीं. अगर वायरल मैसेज का दावा सही है तो फिर जीवन बीमा की जरूरत ही क्या है?

ये खबर पक्की है कि नहीं आइए इसकी पड़ताल करते हैं.

क्या है वायरल मैसेज का दावा?

इस मैसेज के अनुसार अगर सरकार के नियम की बात करें तो किसी व्यक्ति की हादसे में मौत हो जाती है और वो शख्स तीन साल से इनकम टैक्स रिटर्न फाइल कर रहा है तो भारत सरकार उस व्यक्ति के परिवार को पिछले तीन साल की आय के औसत की 10 गुणा ज्यादा रकम देने के लिए बाध्य है.

उदाहरण के लिए अगर किसी की आय पहले साल 4 लाख रुपए, दूसरे साल 5 लाख रुपए और तीसरे साल 6 लाख रुपए है तो उसकी तीन साल की औसत आय हुई 5 लाख रुपए यानी उस व्यक्ति का परिवार सरकार से 5 लाख का 10 गुणा यानी 50 लाख रुपए पाने का हकदार है.

वायरल मैसेज में 1988 के मोटर व्हीकल एक्ट का हवाला भी दिया गया है. दावा है कि मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 के सेक्शन 166 के तहत ये प्रावधान है. और तो और सुप्रीम कोर्ट के एक केस का भी हवाला दिया गया है.

क्या है सच?

1988 के मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक, सेक्शन 166 के तहत सड़क हादसे में पीड़ित पक्ष को दोषी से मुआवजा पाने का प्रावधान है. इसके तहत हादसे में घायल हुआ शख्स या जिसकी संपत्ति का नुकसान हुआ है वो शख्स या फिर मौत होने पर परिवार के लोग दोषी से मुआवजे के हकदार होते हैं.

मोटर व्हीकल एक्ट पीड़ित को मुआवजे की बात तो करता है लेकिन इसमें मुआवजा आरोपी पक्ष की तरफ से दिया जाता है. इसमें सरकार शामिल नहीं होती. वायरल मैसेज का पहला दावा तो यहीं गलत साबित हो गया.

इसके बाद हमने उस अदालती मामले की पड़ताल शुरू की जिसका वायरल मेसेज में हवाला दिया गया है. दरअसल, ये साल 2003 का केस है. केस के मुताबिक बाइक से जा रहे नीलेश नाम के एक शख्स को ट्रक ने टक्कर मार दी थी. हादसे में नीलेश की मौत हो गई थी.

दोषी की तरफ से नीलेश के परिवार को महज 8 हजार रुपए का मामूली मुआवजा मिला था, जिसके खिलाफ उसके परिजन सर्वोच्च अदालत पहुंचे थे. इस केस में भी हमें कहीं भी भारत सरकार से मुआवजा मिलने का कोई प्रावधान नहीं मिला लिहाजा वीडियो का दूसरा दावा भी गलत निकला.

साभार: न्यूज़18 हिंदी

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