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दुनिया जान चुकी है पीएम चाय बेचते थे...अब 'प्रेरणा स्थल' क्यों?

पीएम मोदी ने दो साल पहले अपने नाम पर राजकोट में बने एक मंदिर को हटाने के लिए कहा था

Arun Tiwari Arun Tiwari | Published On: Jul 05, 2017 04:32 PM IST | Updated On: Jul 05, 2017 05:42 PM IST

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दुनिया जान चुकी है पीएम चाय बेचते थे...अब 'प्रेरणा स्थल' क्यों?

2015 के शुरुआती महीनों की बात है. गुजरात के राजकोट में पीएम मोदी के नाम पर उनके समर्थकों ने एक मंदिर बनवाया था. नरेंद्र मोदी ने एक ट्वीट कर उस पर दुख जताते हुए कहा था कि मैं ऐसी घटना से सदमे में हूं. मेरा मंदिर बनाया जाना कतई ठीक नहीं है. इसके तुरंत बाद ही राजकोट के स्थानीय प्रशासन ने उस मंदिर को गिरवा दिया था.

सोशल मीडिया पर पीएम के इस कदम की तारीफ हुई थी. कई ट्वीट के माध्यम से लोगों ने यह भी कहा था कि मायावती को भी पीएम कुछ सीख दें.

लेकिन दो साल बाद जुलाई 2017 में एक बिल्कुल अलग खबर आई है कि जिस जगह पर पीएम चाय बेचा करते थे उसे पर्यटन स्थल के रूप में तब्दील किया जाएगा.

केंद्रीय पर्यटन मंत्री महेश शर्मा ने इसकी तस्दीक भी की है कि इस काम में सौ करोड़ रुपए के आस-पास लागत आएगी.

उनका कहना था कि वडनगर रेलवे स्टेशन में एक छोटी सी चाय की दुकान है, जहां से संभवत: प्रधानमंत्री ने अपने जीवन की यात्रा शुरू की थी. हम चाय की उस दुकान को भी पर्यटन स्थल के तौर पर विकसित करना चाहते हैं. हमारा उद्देश्य वडनगर को विश्व पर्यटन के नक्शे पर लाना है.

भारत का लगभग हर आदमी इस बात को जानता है कि हमारे पीएम नरेंद्र मोदी बचपन में चाय बेचा करते थे. इस बात को खुद पीएम ने भी अपने भाषणों में कई बार इस्तेमाल किया है.

पीएम इस बात को इतने सकारात्मक रूप में बताते रहे हैं कि निश्चित रूप से देश में न जाने कितने ऐसे लोग होंगे जो इससे प्रेरणा पाते होंगे. असर ये रहा कि चायवाला शब्द सम्मानसूचक लगने लगने लगा. ये बेहद सकारात्मक बात है जिसे पीएम ने बड़े मंचों से बेहद सकारात्मक रूप में व्यक्त किया और प्रशंसा पाई.

Narendra Modi

मुश्किलों और तकलीफों का सामना करके अगर नरेंद्र मोदी पीएम बनने में कामयाब रहे हैं तो यह बेहद प्रशंसनीय बात है. लेकिन ये काबिलेगौर है कि भारत में ऐसे आदर्श लोगों की बड़ी संख्या है जिन्होंने बेहद कठिनाइयों का सामना करके सफलता पाई. लेकिन अगर उन सभी जगहों का पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाने लगे तो एक नजरिए से देश के लिए तो बहुत ही बेहतर बात होगी. क्योंकि देश का एक बड़ा हिस्सा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित होगा.

हालांकि यह बीजेपी नहीं है जो अपने पीएम या किसी बड़े नेता से जुड़ी किसी बात जनता के तौर पर हमेशा-हमेशा के लिए आदर्श के तौर पर स्थापित करना चाहती है. यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री और बीएसपी सुप्रीमो मायावती तो अपनी मूर्तियां लगवाने के लिए खूब आलोचनाएं झेल चुकी हैं.

लखनऊ और नोएडा के प्रेरणा स्थलों में कितने करोड़ रुपए खर्च हुए होंगे इसका हिसाब तो सिर्फ मायावती ही दे सकती हैं. लेकिन ऐसा नहीं हुआ कि मायावती को इन आलोचनाओं से कोई फर्क पड़ा हो. उन्होंने सामाजिक न्याय के नाम पर इस निर्माण कार्यों को पूरा करवाया. और इसके नाम पर वोट भी बटोरती हैं.

कमोबेश यही हाल समाजवादी पार्टी का भी रहा है. गनीमत यही रही कि राम मनोहर लोहिया और जनेश्वर मिश्रा की मूर्तियों और उनके नाम पर बने पार्कों में मुलायम सिंह यादव की मूर्तियां नहीं लगीं. कांग्रेस तो इस मामले में शायद सभी पार्टियों कई गुना आगे है. देश में शायद ही कोई ऐसी जगह जहां पर नेहरू-गांधी मेमोरियल या पार्क आपको न मिल जाए.

कमाल की बात ये है कि इन सभी पार्टियों का बीजेपी ने हमेशा इस बात के लिए विरोध किया है. इसे चुनावी मुद्दा तक बनाया जा चुका है. लेकिन केंद्र में ताकतवर स्थिति में आने के बाद बीजेपी खुद भी उसी रास्ते पर चल पड़ी है जिसके लिए वो दूसरी पार्टियों की आलोचना किया करती थी.

हमने खूब किस्से पढ़े हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री स्कूल नदी पार करके जाया करते थे. पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम अखबार बेचा करते थे. जयप्रकाश नारायण ने अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए न जाने कितनी ही तकलीफें सहीं. लेकिन शायद ही कभी इस बात का ख्याल हो कि उस नदी को पर्यटन स्थल बना दिया जाए जिस नदी को पार करके लाल बहादुर शास्त्री पढ़ने जाते थे. या फिर उस जगह को पर्यटन स्थल बना दिया जाए जहां अब्दुल कलाम अखबार बेचा करते थे.

अलबत्ता खुद पीएम मोदी ने सरदार वल्लभ भाई पटेल की एक विशालकाय मूर्ति बनवाने का अभियान शुरू किया था. यहां तक तो तब भी ठीक है लेकिन एक ऐसी जगह को पर्यटन स्थल घोषित करना जहां पीएम कभी पिलाया करते थे. ये किस तरह की प्रतीकात्मक राजनीति है. हालांकि पीएम मोदी के साथ प्रतीकात्मक राजनीति का क्रम काफी समय से चल रहा है.

जब वो पीएम पद के प्रत्याशी थे तो जोरों की चर्चा चली थी कि वो बचपन में घड़ियालों से खेला करते थे. फिर चुनाव प्रचार के दौरान ही झाड़ू लगाते हुए भी एक तस्वीर सोशल मीडिया पर लाखों शेयर हुई. बाद में एक आरटीआई के जरिए खुलासा हुआ कि वो फेक तस्वीर थी.

फिर इस बात लेकर भी खूब चर्चाएं हुईं कि पीएम मोदी कभी छुट्टी नहीं लेते. पीएम बनने के बाद उन्होंने एकदिन की छुट्टी नहीं ली. लेकिन एक आरटीआई के जरिए ये भी पता चला कि पिछले प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भी दस साल पीएम रहते हुए एक दिन की छुट्टी नहीं ली.

पीएम मोदी इस समय देश में लोकप्रियता के उस मुकाम पर हैं जहां देश के गिने-चुने लोग रहे होंगे. जिस तरीके से बीजेपी को चुनावों में सफलता मिल रही है राजनीति की थोड़ी भी समझ रखने वाला आदमी कह सकता है कि इसकी धुरी पीएम मोदी ही हैं. फिर आखिर ऐसी कौन सी जरूरत आन पड़ी कि कई बार खुद चाय बेचने की और बचपन की मुश्किलों के जिक्र के बाद अब उस जगह को पर्यटन स्थल बनाया जा रहा है. और पर्यटन स्थल भी ऐसा जिसे दुनियाभर के सैलानी आकर देखें और प्रेरणा लें.

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