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किस पीएम को नहीं मिला लाल किले पर झंडा फहराने का मौका!

वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार बार लाल किले की प्राचीर से झंडा फहराकर देश को संबोधित कर चुके हैं

FP Staff Updated On: Aug 15, 2017 04:15 PM IST

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किस पीएम को नहीं मिला लाल किले पर झंडा फहराने का मौका!

हर नेता का सपना होता है कि एक दिन वह प्रधानमंत्री बने. वह दिन आए जब वह लाल किले पर झंडा फहराकर देशवासियों को संबोधित करे. लेकिन हमारे देश के दो प्रधानमंत्री ऐसे राजनेता रहे हैं जो प्रधानमंत्री तो बने पर उन्हें लाल किले से झंडा फहराने का मौका नहीं मिला.

हम बात कर रहे हैं गुलजारी लाल नंदा और चंद्रशेखर की. नंदा दो बार 13-13 दिन के लिए पीएम की कुर्सी पर बैठे थे. पहली बार वह 27 मई से 9 जून 1964 और दूसरी बार 11 से 24 जनवरी 1966 तक पीएम रहे.

नंदा पहली बार पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद और दूसरी बार लाल बहादुर शास्त्री के देहांत के बाद कार्यवाहक प्रधानमंत्री बनाए गए. लेकिन उनका दोनों कार्यकाल उतने ही समय तक सीमित रहा जब तक कि कांग्रेस ने अपने नए नेता का चयन नहीं किया.

चंद्रशेखर दूसरे ऐसे प्रधानमंत्री रहे हैं जिन्‍हें एक बार भी लाल किले की प्राचीर से झंडा फहराने का अवसर नहीं मिला. वह 10 नवंबर 1990 से 21 जून 1991 तक भारत के पीएम रहे.

नेहरू, इंदिरा और मनमोहन का रिकॉर्ड नहीं टूटा

लाल किले से सबसे ज्‍यादा बार झंडारोहण करने का रिकॉर्ड प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के नाम है. उन्‍होंने 15 अगस्त 1947 से मई 1964 तक लगातार 17 बार तिरंगा फहराया. इसके बाद नंबर आता है इंदिरा गांधी का, जिन्होंने अपने कार्यकाल में 16 बार तिरंगा फहराया. अभी तक यह रिकॉर्ड किसी प्रधानमंत्री ने नहीं तोड़ा है. मनमोहन सिंह ने लाल किले से 10 बार झंडा फहराया.

सबसे ज्‍यादा बार झंडा फहराने वाले गैर कांग्रेसी

अटल बिहारी वाजपेयी अपने पहले कार्यकाल में लाल किले पर तिरंगा फहराने नहीं पहुंच पाए. लेकिन दूसरे कार्यकाल में उन्‍हें यह मौका लगातार छह बार मिला. वह सबसे ज्‍यादा बार झंडारोहण करने वाले गैर-कांग्रेसी प्रधानमंत्री हैं. वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार बार लाल किले की प्राचीर से झंडा फहराकर देश को संबोधित कर चुके हैं.

साभार: न्यूज़18 हिंदी

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