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अलनीनो: मॉनसून का सबसे बड़ा 'खलनायक', आखिर है क्या बला

अलनीनो एक स्पैनिश शब्द है, जिसका अर्थ है 'लिटिल बॉय' है.

Subhesh Sharma Updated On: Apr 21, 2017 04:26 PM IST

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अलनीनो: मॉनसून का सबसे बड़ा 'खलनायक', आखिर है क्या बला

चुभती-जलती गर्मी का मौसम आ चुका है और रिकॉर्ड तोड़ गर्मी पड़ रही है. धूप की मार को देखते हुए दोपहर को घर से बाहर कदम रखना अंगारों पर चलने से कम नहीं है. बारिश का इंतजार जंगलों में रह रहे जानवरों से लेकर कनक्रीट के जंगलों में रह रहे शहरी व्यक्ति को भी बेसब्री से है.

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लेकिन हमे राहत देने वाली बारिश की राह में हमेशा से एक बड़ा रोड़ा रहा है. ये रोड़ा हर साल हमें गर्मियों के मौसम में बड़ी टेंशन देता है और इसका नाम है 'अलनीनो'. हर साल जब-जब मानसून की बात होती है, तब-तब अलनीनो का नाम किसी 'खलनायक' के रूप में उभर कर आता है. आइए जानते हैं आखिर ये अलनीनो है क्या बला...

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सीधा न समझो इसे, है ये बहुत टेढ़ा?

अलनीनो एक स्पैनिश शब्द है, जिसका अर्थ है 'लिटिल बॉय' है. इसका सबसे अधिक असर दुनियाभर में दिसंबर के महीने में देखने को मिलता है. इसी वजह से इसे 'बेबी क्राइस्ट' भी कहा जाता है. इसको ये नाम पेरू के मछुआरे ने दिया था. नाम से स्वीट समझ में आने वाले अलनीनो को कतई सीधा समझने की गलती ना करें.

A farm worker looks for dried plants to remove in a paddy field on the outskirts of Ahmedabad, India

अगर ये अपने पर आ जाए तो बारिश की कुछ बूंदों के लिए आपको तरसा देगा. उदाहरण के तौर पर साल 2015 ही देख लें. 2015 में भारत में बारिश बेहद कम हुई थी और अलनीनो के बुरे प्रभाव की वजह से ही हमारे देश में मानसून सामान्य से करीब 15 फीसदी कम रहा था.

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आपने शायद नोटिस किया होगा कि पिछले कुछ सालों से मौसम का हेरफेर समझना बड़े-बड़े मौसम वैज्ञानिकों के बस में भी नहीं रहा है. अक्सर मौसम विभाग जो कहता है असल में उसका उल्टा ही होता है. लेकिन इस सबके लिए आप मौसम विभाग की कुशलता पर उंगली उठाने से पहले अलनीनो के बारे में जान लें, क्योंकि कहीं न कहीं इस सब के लिए यही जिम्मेदार है.

monsoon

कहां से आता है ये अलनीनो?

अलनीनो को आसान भाषा में गर्म जलधारा कहा जा सकता है. प्रशांत महासागर में पेरू के पास समुद्री तट के गर्म होने वाली घटना को अलनीनो कहा जाता है. पिछले कुछ सालों से प्रशांत महासागर की सतह का तापमान बढ़ रहा है. इसकी वजह से समुद्री हवाओं का रुख बदल जाता है. इसका असर ये होता है कि ज्यादा बारिश वाले क्षेत्रों में बारिश नहीं होती और जिन इलाकों में बारिश नहीं होती है, वहां मूसलाधार बारिश होती है.

Amritsar: A man pushes his cycle through heavy rains that lashed Amritsar on Wednesday. PTI Photo (PTI1_25_2017_000118B)

अमृतसर में बारिश के बीच एक किसान अपनी साइकिल खींचता. फोटो: पीटीआई

होता ये है कि अलनीनो की वजह से असामान्य वाष्पीकरण (असामान्य इवापोरेशन) और कंडेंस्ड (गाढ़े) होकर बने बादल साउथ अमेरिका में भारी वर्षा करते हैं, लेकिन प्रशांत महासागर का दूसरा उष्ण कटिबंधीय छोर (ट्रॉपिकल एंड) इस स्थिति से अछूता रहता है और यहां सूखे की स्थिति पैदा हो जाती है. कहीं न कहीं इसका असर दक्षिण पश्चिमी मानसून (हिंद महासागर और अरब सागर की ओर से भारत के दक्षिण-पश्चिम तट पर आने वाली हवाएं जो भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश आदि में भारी वर्षा करातीं हैं) को भी प्रभावित करती है.

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अलनीनो यूं हिलाता है दुनिया को

- इसके कारण इंडोनेशिया में 1983 में भयंकर अकाल पड़ा.

- ऑस्ट्रेलिया में सूखा पड़ने से जंगलों में आग लगी.

- कैलिफोर्निया में भारी बारिश हुई.

- पेरू के तट पर एंकोवी फिशिंग एरिया तबाह हुआ.

भारत पर इसका असर

अल नीनो का भारत के मानसून पर गहरा असर पड़ता है. इसकी वजह से भारत में सामान्य मानसून नहीं होता, जिस खामियाजा सूखा झेल रहे किसानों और कृषि आधारित उद्योगों को उठाना पड़ता है.

Farmer

देश की खेती का बड़ा हिस्सा मानसून की वर्षा पर निर्भर है. आपको बता दें कि 96 से 104 फीसदी के बीच दीर्घावधि बारिश को 'सामान्य' माना जाता है. जबकि 96 फीसदी से कम को 'सामान्य से कम' और 104 से 110 फीसदी दीर्घावधि बारिश को 'सामान्य से ज्यादा' माना जाता है.

जबलपुर में नर्मदा नदीं पर नांव चलाता एक मछुआरा. फोटो: पीटीआई

जबलपुर में नर्मदा नदी पर नाव चलाता एक मछुआरा. फोटो: पीटीआई

भारत में बड़े स्तर पर मछलियों का उत्पादन होता है और अलनीनो का मछलियों के उत्पादन पर गहरा असर पड़ता है. अलनीनो की वजह से पूर्वी प्रशांत समुद्र में गर्म जल की मोटी परत बन जाती है, जोकि ठंडे पानी के ऊपर एक दीवार की तरह काम करती है. गर्म पानी की इस दीवार के कारण प्लांकटन या शैवाल की सही मात्रा विकसित नहीं हो पाती. जिस कारण मछलियों को खाने की तलाश में घर छोड़कर जाना पड़ता है. वहीं मछलियों के गायब होने से गरीब मछुआरों की रोजी-रोटी पर भी असर पड़ता है.

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