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जीएसटी: कितना बदलेगा बिजनेस, क्या होगा असर?

जीएसटी को लागू करना छोटे कारोबारियों के लिए महंगा पड़ने वाला है. जबकि, बड़ी कंपनियों के लिए ये झटका सहना आसान होगा

Sindhu Bhattacharya | Published On: Jun 27, 2017 05:32 PM IST | Updated On: Jun 27, 2017 08:21 PM IST

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जीएसटी: कितना बदलेगा बिजनेस, क्या होगा असर?

आजाद भारत के सबसे बड़े आर्थिक सुधार यानी जीएसटी को लागू करने की तारीख करीब आती जा रही है. लोग नर्वस हैं कि इसका आम आदमी की जिंदगी पर कैसा असर पड़ेगा?

इससे सुर्खियां बटोरने वाली महंगाई तो नहीं आने वाली, क्योंकि रोजमर्रा की जरूरत की ज्यादातर चीजों के टैक्स या तो वही रखे गए हैं, या और कम हो जाएंगे. लेकिन कई तरह के टैक्स देने के सिस्टम से एक टैक्स वाले सिस्टम में जाने पर दिक्कतें तो आएंगी ही.

जीएसटी का सबसे बुरा असर छोटे कारोबारियों पर पड़ेगा. असंगठित क्षेत्र के लिए जीएसटी सबसे बड़ी चुनौती होगी. शुरुआती दौर में ऐसी कंपनियों के लिए काम करना मुश्किल होगा. ये ठीक उसी तरह होगा जैसे नोटबंदी का छोटे कारोबारियों और असंगठित क्षेत्र पर बुरा असर पड़ा था.

ऐसे कारोबारियों के लिए जीएसटी को लागू करना काफी महंगा पड़ने वाला है. बड़ी कंपनियों के लिए ये झटका सहना आसान होगा. एक बयान में कनफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने कहा था कि जीएसटी ऐसा टैक्स सिस्टम है जो तकनीक पर आधारित है. इसका पालन करने के लिए डिजिटल तकनीक जरूरी है.

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कनफेडरेशन ने कहा कि 'आज की तारीख में हर कारोबारी जीएसटी को मानना चाहता है. मगर दिक्कत ये है कि इनमें से 60 फीसदी के कारोबार का कंप्यूटरीकरण नहीं हुआ है. ऐसे में इनके लिए जीएसटी का पूरी तरह से पालन करना बहुत बड़ी चुनौती होगी'. सीएआईटी ने कारोबारियों के लिए सरकार से वैकल्पिक व्यवस्था करने की अपील की है, ताकि वो भी एक जुलाई से ही जीएसटी टैक्स सिस्टम का हिस्सा बन जाएं.

जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं

कनफेडरेशन के मुताबिक लगभग छह करोड़ छोटे कारोबारी बीस लाख से कम के टर्नओवर वाले हैं. इनके लिए जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी नहीं होगा. वहीं करीब एक करोड़ कारोबारी कंपोजिट स्कीम के तहत आएंगे. मगर इन्हें रजिस्ट्रेशन कराना होगा. बाकी के दो करोड़ छोटे कारोबारी किसी अप्रत्यक्ष कर कानून के दायरे में नहीं आते. इसलिए इनको जीएसटी में रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा. इनमें से ज्यादातर के पास कंप्यूटर नहीं हैं. क्योंकि मौजूदा वैट प्रणाली के तहत टैक्स का काम कागज से चल जाता था.

ब्रोकरेज फर्म फिलिप कैपिटल से जुड़े जानकार कारोबारियों के महासंघ की फिक्र से सहमत हैं. अपने ग्राहकों को भेजे नोट में फिलिप कैपिटल ने कहा कि ज्यादातर बड़ी कंपनियां जीएसटी का झटका झेलने के लिए तैयार हैं. उनके पास जरूरी डिजिटल तकनीक उपलब्ध है. छोटी कंपनियां, बड़ी कंपनियों के नक्शे-कदम पर चलती हैं. वो भी कंप्यूटरीकरण कर लेंगी.

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बड़ी कंपनियां बेहतर तैयारी की वजह से बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा सकेंगी. यानी जीएसटी का सबसे ज्यादा फायदा हिंदुस्तान यूनीलीवर लिमिटेड, कोलगेट पामोलिव, हैवेल्स, एशियन पेंट्स, टाइटन इंडस्ट्रीज, बजाज इलेक्ट्रिकल्स और क्रॉम्पटन ग्रीव्स जैसी कंपनियों को होगा.

क्रेडिट सुइस कंपनी के जानकार कहते हैं कि छोटे कारोबारियों का हाल तो जीएसटी लागू होने से पहले से ही बुरा है. असंगठित क्षेत्र का माल बाजार में नहीं मिल रहा है. जैसे, लोकल बैटरियां बाजार से गायब हैं. टायर के डीलर बताते हैं कि चीन के टायर का कारोबार करने वाले अब तक नोटबंदी के झटके से नहीं उबर पाए हैं.

असंगठित क्षेत्र का कारोबार कर पाना बड़ी चुनौती

हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि ऐसा कारोबारियों के 'देखो और इंतजार करो' की नीति से हो रहा है या जीएसटी के डर से वाकई हो रहा है. वैसे लोगों का यही मानना है कि जीएसटी के दौर में असंगठित क्षेत्र का कारोबार कर पाना बड़ी चुनौती होगा.

मिसाल के तौर पर लोकल लेवल पर बनने वाली बिना ब्रांड की बैटरियों को ही लीजिए. ये लोग अक्सर टैक्स बचा लेते थे. आज की तारीख में इनके स्टॉक खत्म हैं. माल की सप्लाई नहीं हो पा रही है. इसकी दो वजहें हो सकती हैं- एक तो यह कि डीलर अब टैक्स देने वाले निर्माताओं से ही माल खरीदना चाहते हैं. या फिर असंगठित क्षेत्र के बैटरी निर्माता जीएसटी लागू होने का इंतजार कर रहे हैं. इसके बाद ही वो फिर से माल की सप्लाई करेंगे.

इस लेख के मुताबिक टाइल उद्योग में असंगठित क्षेत्र की मौजूदा हिस्सेदारी 40 फीसदी है. जीएसटी लागू होने पर यह घटकर 20 फीसदी ही रह जाएगी. इसी तरह रेडी-मिक्स कंक्रीट के कारोबार का 60 फीसदी हिस्सा असंगठित क्षेत्र के दायरे में आता है. बिजली के हल्के सामान के बाजार में यह हिस्सेदारी 35 फीसदी है.

जीएसटी को लेकर देश के ज्यादातर व्यापारी वर्ग में संशय की स्थित है

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डेयरी, जूलरी, एसी के कल-पुर्जों का 70 फीसदी कारोबार भी असंगठित क्षेत्र के भरोसे चलता है. इन सबको जीएसटी लागू होने के बाद भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. जानकार कहते हैं कि भारत के कुल कारोबार का आधा असंगठित क्षेत्र के दायरे में आता है. देश में 80 फीसदी नौकरियां भी इसी सेक्टर में हैं.

जीएसटी को लागू करना बहुत बड़ी चुनौती होगी

ब्रोकरेज फर्म डीबीएस के जानकार कहते हैं कि जीएसटी को लागू करना बहुत बड़ी चुनौती होगी. इसके नियमन के अलावा कारोबारियों, ग्राहकों और वसूली करने वालों का नेटवर्क खड़ा करना बहुत बड़ा काम होगा. सरकार का मानना है कि पुराने टैक्स सिस्टम का पालन करने वाले 80 फीसदी कारोबारियों ने जीएसटी के तहत रजिस्ट्रेशन करा लिया है.

ज्यादातर बड़ी कंपनियां तो देश के सबसे बड़े टैक्स सुधार के लिए तैयार हैं. मगर मझोले और छोटी कंपनियों के बारे में यह नहीं कहा जा सकता. शुरुआती दौर में इनके लिए जीएसटी को लागू करने की चुनौती से निपटना बड़ा काम होगा. मगर आगे चलकर उम्मीद है कि ये कंपनियां भी नए टैक्स सिस्टम का हिस्सा बन जाएंगी.

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