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जीप पर बांधे गए कश्मीरी युवक ने कहा, क्या मैं इंसान नहीं, बांधकर खींचना कहां की बहादुरी

डार ने कहा, 9 अप्रैल की घटना से जुड़ी जानकारी देने के लिए उसे अब तक पुलिस या सेना की ओर से नहीं बुलाया गया

FP Staff Updated On: May 24, 2017 09:15 AM IST

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जीप पर बांधे गए कश्मीरी युवक ने कहा, क्या मैं इंसान नहीं, बांधकर खींचना कहां की बहादुरी

जम्मू-कश्मीर के बडगाम में पत्थरबाजों के खिलाफ सेना की जीप के आगे ढाल की तरह इस्तेमाल किए गए फारुख अहमद डार के पास एक सवाल है. वह जानना चाहते हैं कि किसी भी व्यक्ति को कई किलोमीटर तक गाड़ी में बांधकर खींचना बहादुरी की बात है.

डार ने कहा कि नौ अप्रैल की घटना से जुड़ी जानकारी देने के लिए उसे अब तक पुलिस या सेना की ओर से नहीं बुलाया गया है, जिसने घटना की कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी का आदेश दिया था. जांच के बारे में डार ने कहा कि यह महज ढकोसला है.

'मैं एक छोटा आदमी हूं और किसी को क्यों फर्क पड़ेगा' डार ने कहा कि वे कभी गंभीर थे ही नहीं. मैं एक छोटा आदमी हूं और किसी को क्यों फर्क पड़ेगा. श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव में वोट देकर वापस लौट रहे डार का इस्तेमाल मेजर लितुल गोगोई ने पथराव करने वालों के खिलाफ कथित रूप से ढाल के रूप में किया था और उसे अपनी जीप के बोनट से बांध दिया था.

इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों ने जमकर गुस्सा दिखाया था. इसके बाद सेना ने कोर्ट ऑफ इन्क्वॉयरी का आदेश दिया. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी मामला दर्ज किया है. डार ने बताया कि घटना को एक महीने से ज्यादा वक्त हो चुका है और अब भी स्थानीय पुलिस ने मुझसे उसके बारे में नहीं पूछा है. यहां तक कि मेरा बयान भी दर्ज नहीं किया गया है.

उस घटना के बाद से बदल गई जिंदगी वोट देने के लिए घर से बाहर निकलने पर खेद जाहिर करते हुए डार ने कहा कि मैं इस बात से हैरान हूं कि क्या किसी व्यक्ति को जीप से बांधना उनकी जवाबी कार्रवाई का हिस्सा है. उसने कहा कि मैंने मतदान किया और जाहिरा तौर पर इसके लिए दंडित किया गया. दार के मुताबिक घटना के बाद उसकी जिंदगी बदल गई है.

शॉल पर कढ़ाई करने वाले कारीगर फारुक अहमद डार ने कहा कि वह पथराव करने वाला नहीं बल्कि एक छोटे आदमी हैं और वह केवल वोट देने के लिए घर से बाहर गए थे. सेना ने पिछले महीने डार को जीप की बोनट से बांधकर शहर भर में घुमाया था. डार को जीप से बांधने वाले मेजर लीतुल गोगोई ने एक संवाददाता सम्मेलन में उस पर सुरक्षा बलों पर पथराव करने वाले लोगों के समूह में शामिल होने का आरोप लगाया, जिसे उसने खारिज कर दिया.

'गोगोई को सम्मानित किए जाने से हैरान हूं' डार ने कहा कि अगर ऐसा होता तो वे मुझे पुलिस को सौंप देते. उसने कहा कि संबंधित मेजर को प्रशस्ति पत्र से सम्मानित किए जाने के बारे में जानकर उसे ताज्जुब हुआ. डार ने सवाल किया कि क्या किसी व्यक्ति को कई किलोमीटर तक खींचना बहादुरी का काम है?

उसने याद किया कि वह नौ अप्रैल को श्रीनगर लोकसभा उपचुनाव के लिए मतदान करने के बाद वह अपने एक रिश्तेदार की शोकसभा में हिस्सा लेने जा रहा था और रयार गांव के पास मेजर ने उसे उठा लिया और उसका इस्तेमाल कश्मीर में पथराव करने वालों के खिलाफ मानव कवच के रूप में किया.

डार ने बताया कि रयार में सेना के 13 राष्ट्रीय राइफल के शिविर के सामने छोड़े जाने से पहले मुझे कई गांवों में घुमाया गया था. मेजर ने हालांकि मीडिया के समक्ष दावा किया कि दार को सैनिकों ने पथराव करते समय पकड़ा था.

मेजर ने अपने कदम को जायज ठहराया डार का ये बयान मेजर लीतुल गोगोई के बयान के बाद आया है. आर्मी जीप पर कश्‍मीरी युवक को बांधकर घुमाने वाले सेना के मेजर लीतुल गोगोई को सोमवार को चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ (सीओएएस) कमेंडेशन कार्ड से नवाजा गया था. मंगलवार को नितिन लीतुल गोगोई ने अपने इस कदम को जायज ठहराया. उन्‍होंने कहा कि जिस युवक को जीप के बोनट पर बांधा गया वह पथराव कर रही भीड़ का लीडर था.

Leetul Gogoi

पिछले दिनों आर्मी चीफ बिपिन रावत जम्मू-कश्मीर के दौरे पर थे. उसी वक्त गोगोई को यह सम्मान दिया गया. कई रक्षा जानकारों ने इस कदम की यह कहते हुए सराहना की कि इससे घाटी में हिंसा काबू करने में मदद मिली. इन लोगों का कहना है कि आम तौर पर पत्थरबाजी होने पर सेना को बल प्रयोग करना पड़ता है. इस कदम से बिना किसी हिंसा के पत्थरबाजों से निपटने में मदद मिली.

मेजर गोगोई ने सूझबूछ दिखाते हुए कदम उठाया सेना से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, जिन हालात में गोगोई ने ऐसा फैसला लिया, उसमें आम तौर पर सेना को फायरिंग करनी पड़ती है. लेकिन मेजर ने सूझबूझ दिखाते हुए यह कदम उठाया. कश्मीरी युवक के जीप पर बंधे होने की वजह से भीड़ ने पत्थरबाजी ने नहीं की और पूरा काफिला सुरक्षित घटनास्थल से निकल पाने में कामयाब रहा.

(भाषा के इनपुट के साथ)

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