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आखिर क्यों अमिताभ बच्चन ने विनोद खन्ना के मुंह पर कांच का गिलास दे मारा था

कुछ दिनों पहले विनोद खन्ना की मौत की अफवाह पर अमिताभ ने क्यों किया था रहस्यमयी ट्वीट

Avinash Dwivedi Updated On: Apr 27, 2017 08:54 PM IST

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आखिर क्यों अमिताभ बच्चन ने विनोद खन्ना के मुंह पर कांच का गिलास दे मारा था

सहायक कलाकार और विलेन के तौर में करियर की शुरुआत करने वाले विनोद खन्ना की शुरुआती फिल्मों में मनोज कुमार की सुपरहिट फिल्म 'पूरब और पश्चिम' भी थी. 'मेरा गांव-मेरा देश', 'आन मिलो सजना' और 'ऐलान' उनकी शुरुआती फिल्में थीं.

विनोद खन्ना को अपनी जिंदगी में हीरो के रूप में पहला रोल 1971 में 'हम, तुम और वो' में मिला. इसमें उनके साथ अरुणा ईरानी ने काम किया था.

अमिताभ बच्चन से महंगे स्टार थे विनोद खन्ना

एक वक्त था विनोद खन्ना को फिल्मों के लिए अमिताभ बच्चन से ज्यादा पैसे मिलते थे. ऐसा नहीं कि वो दौर अमिताभ का शुरुआती दौर था. बात उस वक्त की हो रही है जब अमिताभ स्थापित हो चुके थे. आगे चलकर दोनों के बीच संबंध खराब हो गए हालांकि इस पर ज्यादा बातें नहीं होती. पर एक वक्त बहुत सी फिल्में करने वाली इन दोनों की जोड़ी ने 'मुकद्दर का सिकंदर' के इस वाकये के बाद साथ में कोई फिल्म नहीं की.

छोटे विनोद कब बने अमिताभ के बड़े भाई

विनोद खन्ना ने फिल्म 'अमर, अकबर, एन्थोनी' में अमिताभ बच्चन के बड़े भाई का रोल निभाया था. जबकि असल में विनोद खन्ना अमिताभ बच्चन से 4 साल छोटे थे.

1976 में आई प्रकाश मेहरा की फिल्म 'हेरा-फेरी' में अमिताभ और विनोद खन्ना साथ में दिखे थे. जब प्रकाश मेहरा ने विनोद खन्ना को फिल्म के लिए अप्रोच किया तो विनोद खन्ना ने कहा कि वो इस फिल्म में तभी काम करेंगे जब उनको फिल्म में अमिताभ से 1 लाख रुपए ज्यादा मिलेंगे.

इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन को मेहरा ने 1.5 लाख रुपये दिए थे, जबकि वहीं हेरा-फेरी के लिए विनोद खन्ना को 2.5 लाख रुपये दिए गए थे.

प्रकाश मेहरा इस फिल्म में पहले फिरोज खान को अमिताभ बच्चन के साथ लेना चाहते थे. लेकिन फिरोज खान ने इस फिल्म के लिए मना कर दिया. बाद में फिरोज खान का रोल अमिताभ बच्चन को दे दिया गया. और अमिताभ बच्चन का रोल विनोद खन्ना को मिल गया.

कैसे बिगड़ी बात?

मनमोहन देसाई ने 1977 में आई 'परवरिश' की शूटिंग के दौरान ही एक और ब्लॉकबस्टर फिल्म 'अमर अकबर एंथोनी' को भी शूट कर लिया था. दोनों ही फिल्मों में लीड रोल में अमिताभ बच्चन और विनोद खन्ना थे. इसीलिए स्मार्टनेस के चलते मनमोहन देसाई की अमिताभ बहुत तारीफ करते हैं.

इसके बाद 1978 में आई फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' में अमिताभ विनोद खन्ना पर एक कांच का ग्लास फेंकते हैं. असल वो कांच का ग्लास सच में विनोद खन्ना को लग गया था.

जिसके चलते उनकी ठोड़ी बहुत ज्यादा कट गई थी और उस पर 6 टांके आए थे. इसके बाद से ही अमिताभ और विनोद खन्ना ने दोबारा साथ में काम नहीं किया. इसे दोनों की दुश्मनी का ही नतीजा माना जाता है.

क्या था अमिताभ के ट्वीट का सच?

हाल ही में विनोद खन्ना की मौत की अफवाह पर अमिताभ ने दुख न व्यक्त करते हुए एक रहस्यमयी ट्वीट किया था, इसे दोनों की इसी पुरानी दुश्मनी से जोड़कर देखा जा रहा था.

विनोद खन्ना ने ने गुलजार की 1971 में आई फिल्म 'मेरे अपने' में काम किया था. इस फिल्म में उनके साथ शत्रुघ्न सिंहा सहित कई और एक्टर भी थे.

इस फिल्म में विनोद खन्ना पर फिल्माया गया यादगार गाना, 'कोई होता जिसको अपना...' भुलाया नहीं जा सकता. 'मेरे अपने' इतनी बड़ी हिट थी कि इससे इंस्पायर होकर विनोद खन्ना ने 2008 में इसी नाम से एक नाटक भी किया था.

रुस्तम से पहले नानावटी पर बनाई फिल्म

गुलजार की ही फिल्म 'अचानक' में उनका आर्मी ऑफिसर का रोल बहुत सराहा गया. 'के एन नानावटी' की जिंदगी पर कहा जाता है ये फिल्म बनाई गई थी. हाल ही में नानावटी की जिंदगी पर ही बनी एक और फिल्म 'रुस्तम' के लिए इस साल अक्षय कुमार को बेस्ट एक्टर के नेशनल अवॉर्ड से नवाजा गया है.

‘मेरे अपने’ और ‘अचानक’ के बाद 'लेकिन' फिल्म के लिए विनोद खन्ना और गुलजार 20 साल बाद साथ आए थे. लता मंगेश्कर की आवाज में इस फिल्म का गाना यारा सीली सीली आज भी बॉलीवुड फिल्मों गीतों के लिए मिसाल है.

मिला कई सितारों का साथ

1973 से 1982 के बीच विनोद खन्ना की कई फिल्में आईं. पर राजेश खन्ना के साथ उनकी फिल्मों में हमेशा ही उन्हें या तो विलेन या सपोर्टिंग एक्टर का रोल करना पड़ा. राजेश खन्ना के साथ की गई विनोद खन्ना की फिल्मे हैं, 'सच्चा-झूठा', 'आन मिलो सजना', 'प्रेम कहानी', 'कुदरत' और 'राजपूत'.

विनोद खन्ना ने 'कुदरत' और 'राजपूत' में सपोर्टिंग रोल स्वीकारे, हालांकि तब तक वो स्टार माने जाने लगे थे. कहा जाता है राजेश खन्ना से अपनी घनिष्ठता के चलते उन्होंने ऐसा किया.

एक्टिंग से ले लिया था पांच साल का संन्यास

1982 में विनोद खन्ना ने अपने प्रशंसकों को तब चौंका दिया जब उन्होंने अपने एक्टिंग करियर को छोड़कर 5 साल का ब्रेक लिया और आचार्य रजनीश, जो 'ओशो' के नाम से मशहूर थे उनका आश्रम ज्वाइन कर लिया.

जल्द ही ओशो से भी विनोद खन्ना का मोह भंग हो गया और वो फिर से एक्टिंग में लौट आए. इसके बाद उनकी फिल्म आई इंसाफ जो हिट रही और एक बार फिर से उनकी एक्टिंग की गाड़ी फुल स्पीड में चल पड़ी.

सलमान के बड़े भाई से पिता तक का ऑनस्क्रीन रिश्ता

विनोद खन्ना ने पहली बार सलमान के साथ 1992 में आई फिल्म निश्चय में काम किया था. इस फिल्म में सलमान के बड़े भाई बने थे.बाद में 2009 में आई वांटेड, 2010 में आई दबंग और 2012 में आई दबंग 2 में उन्होंने सलमान के पिता की भूमिका निभाई.

विनोद खन्ना एनडीए सरकार में मंत्री भी रहे हैं

विनोद खन्ना मृत्युपर्यंत एमपी भी रहे हैं. 1997 में विनोद खन्ना ने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन कर ली और 1998 में पंजाब की गुरदासपुर सीट से लोकसभा के लिए चुने गए. 1999 में उसी सीट से फिर जीते.

जुलाई, 2002 में संस्कृति और पर्यटन मंत्री बनाए गए. 6 महीने बाद उन्हें विदेश राज्य मंत्री बना दिया गया. 2004 में वो फिर से लोकसभा चुनाव जीते हालांकि 2009 में वो हार गए हालांकि 2014 में वो फिर से गुरदासपुर लोकसभा सीट से एमपी चुने गए.

विनोद खन्ना की कुछ और खास बातें 

विनोद खन्ना को 1980 में आई फिल्म कुर्बानी के लिए फिल्म की मुंबई से हुई कमाई के शेयर दिए गए थे. यह रकम उन्हें मेहनताने के रूप में दी गई थी.

1988 में आई महेश भट्ट की फिल्म 'जुर्म' की शूटिंग के दौरान कई बार विनोद खन्ना ने शूटिंग रुकवा दी थी क्योंकि जितने पैसे उन्हें फिल्म के लिए मिल रहे थे उनसे वो खुश नहीं थे. इसलिए शूटिंग के दौरान उनकी फीस कई बार बढ़ाई गई.

'मेरे अपने', 'मेरा गांव-मेरा देश', 'इम्तिहान', 'इंकार', 'अमर अकबर एंथोनी', 'दयावान', 'कुर्बानी', 'लहू के दो रंग' और 'जुर्म' विनोद खन्ना की सबसे चर्चित फिल्में हैं. विनोद खन्ना को आखिरी बार शाहरुख खान की फिल्म दिलवाले में देखा गया था.

विनोद खन्ना का गाना जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल पड़ जाए, इंग्लिश गाने हंड्रेड माइल्स अवे फ्रॉम होम से इंस्पायर है. गाना सुनिए, बिल्कुल डिट्टो कॉपी है.

 

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