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उत्तराखंड: केदारनाथ धाम की सुरक्षा करेंगी ‘U’ आकार की 3 दीवारें

तीन स्तरीय सुरक्षा घेरे का मकसद भविष्य में बाढ़, भूस्खलन, भूकंप जैसी आपदा से प्राचीन मंदिर को सुरक्षित बनाना है

Bhasha Updated On: Nov 05, 2017 03:25 PM IST

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उत्तराखंड: केदारनाथ धाम की सुरक्षा करेंगी ‘U’ आकार की 3 दीवारें

उत्तराखंड सरकार ने साल 2013 में आए प्राकृतिक आपदा से सबक लेते हुए केदारनाथ धाम को तीन दीवारों के सुरक्षा कवच से घेरने वाली पुनर्विकास योजना को कुछ संशोधनों के साथ अंतिम रूप दे दिया है.

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय द्वारा तैयार की गई केदारपुरी पुर्ननिर्माण योजना के संशोधित मसौदे में धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के इस तीर्थस्थल को प्राकृतिक आपदाओं से स्थायी सुरक्षा प्रदान करने के उपाय किए गए हैं.

विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मंजूरी से संशोधित योजना में तीन अहम बदलाव शामिल किये गए हैं. इनमें केदारनाथ मंदिर परिसर को तीन स्तरीय सुरक्षा कवच से घेरना, साधकों की आध्यात्मिक साधना के लिये केदारनाथ धाम के आसपास पहाड़ियों में गुफाएं बनाना और तीर्थ यात्रियों के ठहरने सहित किसी भी मकसद से होने वाले निर्माण कार्यों को नदी के बहाव की दिशा में ही करने की मजबूरी को शामिल किया गया है.

पूर्व योजना में मंदिर परिसर को दीवारों के दो स्तरीय सुरक्षा कवच से घेरने की बात कही गई थी.

अंग्रेजी वर्णमाला के ‘यू’ अक्षर के आकार की 3 दीवारों से घेरा जायेगा

पीएम मोदी ने अक्टूबर में केदारनाथ मंदिर के दौरे पर इसके आसपास दो वर्ग किमी क्षेत्रफल में 750 करोड़ रुपए की पुनर्निर्माण योजना को हरी झंडी दिखाई थी. उनके सुझाव पर योजना में किए गए संशोधनों के बाद मंत्रालय ने इसे अंतिम रूप दिया है. इसके तहत केदारनाथ धाम को अंग्रेजी वर्णमाला के ‘यू’ अक्षर के आकार की तीन दीवारों से घेरा जाएगा.

इसमें मंदिर के दोनों ओर मंदाकिनी और सरस्वती नदी की धारा के समानांतर पूरे परिसर को घेरते हुये ‘यू’ आकार में बोल्डर की पहली दीवार बनाई जाएगी. इसके बाद दूसरा घेरा धातु की जालियों के कवच वाली पत्थरों की दीवार का और तीसरा घेरा कंक्रीट की दीवार का होगा. पूर्व योजना में दो स्तरीय सुरक्षा घेरा बनाया जाना था.

तीन स्तरीय सुरक्षा घेरे का मकसद भविष्य में बाढ़, भूस्खलन, भूकंप जैसी आपदा से प्राचीन मंदिर को सुरक्षित बनाना है.

लगभग 1500 करोड़ रुपए की लागत वाली इस योजना को राज्य सरकार की भागीदारी से पांच साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है.

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