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देशभक्ति का टेस्ट सिर्फ मदरसों के लिए ही क्यों?

सरकार की जिम्मेदारी क्या सिर्फ मदरसों और सरकारी स्कूल के स्टूडेंट्स को ही देशभक्ति सिखाने की है

Piyush Raj Piyush Raj Updated On: Aug 11, 2017 05:38 PM IST

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देशभक्ति का टेस्ट सिर्फ मदरसों के लिए ही क्यों?

योगी सरकार ने यूपी के मदरसों के लिए 15 अगस्त को लेकर एक फरमान जारी किया है. इस निर्देश में कहा गया है कि 15 अगस्त को सभी मदरसों में अनिवार्य रूप से झंडा फहराया जाए राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत गाए जाएं. साथ ही पूरे कार्यक्रम की वीडियो बतौर सबूत बनाई जाए.

अब सवाल यह है कि यह फरमान सिर्फ मदरसों के लिए ही क्यों? अन्य स्कूलों के लिए क्यों नहीं? क्या देशभक्ति सिर्फ मदरसे में पढ़ने वाले बच्चों को ही सिखाने की जरूरत है. इसके जवाब में कुछ लोग तर्क दे सकते हैं कि चूंकि मदरसों को सरकार से सहायता मिलती है इस वजह से सरकार को इन मदरसों को ऐसे आदेश देने का अधिकार है.

सिर्फ मदरसे के छात्र की देशभक्ति क्यों सीखें?

फिर भी सवाल रह जाता है कि सरकार की जिम्मेदारी क्या सिर्फ मदरसों और सरकारी स्कूल के स्टूडेंट्स को ही देशभक्ति सिखाने की है. ऐसे फरमान सारे शिक्षण-संस्थानों को दिए जाते तो अलग बात थी. लेकिन यह सिर्फ मदरसों को यह आदेश देना सरकार की एक खास तरह की मंशा को दिखाता है.

योगी सरकार की यह मंशा पिछले कुछ दिनों से ‘वंदे मातरम्’ बोलने के विवाद से अलग नहीं है. एक खास तरह के आदेशों और दिशा-निर्देशों द्वारा पिछले कई दिनों से मुसलमानों की देशभक्ति का अलग-अलग तरह से टेस्ट लिया जा रहा है. गोरक्षा के नाम पर मुसलमानों को निशाना बनाने के बाद देशभक्ति उन्हें निशाना बनाने का नया औजार बनता जा रहा है.

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योगी सरकार का मदरसों को दिया फरमान

15 अगस्त को लेकर योगी सरकार ने जो फरमान मदरसों को दिया है वो इतिहास में पहली बार दिया गया है. इस फरमान को देखकर ऐसा लगता है जैसे मदरसों में कभी तिरंगा झंडा फहराया ही नहीं गया है. जबकि सच ठीक इसके उलटा है.

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15 अगस्त और 26 जनवरी ऐसे राष्ट्रीय पर्व हैं जिसे अधिकतर शिक्षण संस्थान काफी जोर शोर से मनाते आए है. यही नहीं योगी सरकार के फरमान से 2 साल पहले ही देवबंद स्थित देश के सबसे बड़े मदरसे दारुल-उलूम ने सभी मदरसों को यह निर्देश दिया था कि 15 अगस्त अनिवार्य रूप से मनाएं.

दारुल उलूम ने यह निर्देश देते वक्त यह कहा था कि किसी को भी मुसलमानों की देशभक्ति पर सवाल खड़ा करने का मौका नहीं मिलना चाहिए. दारुल उलूम का दो साल पहले दिया गया निर्देश जिस डर की वजह से था वह आज यूपी सरकार के फरमान की वजह से हकीकत में बदल गया है.

क्या है मदरसों का सच?

मदरसों के बारे में हमेशा यह कहा जाता है ‘ये आतंक के गढ़ हैं’ या ‘यहां केवल धार्मिक शिक्षा दी जाती है’. इसी तरह की मदरसों के बारे में कई अन्य धारणाओं को भी आम राय बनाने की कोशिश की जाती रही है. यह भी कहा जाता है कि यहां केवल मुसलमान ही पढ़ते हैं. जबकि सच्चाई यह है कि इन मदरसों में सिर्फ गरीब पढ़ते हैं.

हो सकता है कि मदरसों में पढ़ने वाले छात्रों में मुसलमानों की संख्या अधिक हो लेकिन बड़ी तादाद में इनमें दलित, आदिवासी और कमजोर तबके के छात्र भी मदरसे में पढ़ते हैं. इसकी मुख्य वजह यह है कि मदरसे में शिक्षा लगभग मुफ्त में मिलती है और आज भी देश का बड़ा तबका महंगे निजी स्कूलों में पढ़ाई नहीं कर सकता है.

मदरसों में सिर्फ कुरान ही नहीं पढ़ाई जाती है बल्कि विज्ञान, कंप्यूटर, गणित सहित अन्य विषयों की भी पढ़ाई होती है. मदरसे से पढ़े कई लोगों ने देश लिए काफी योगदान किए हैं.

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देशभक्ति आखिर है क्या?

दरअसल देशभक्ति को आज फिर से परिभाषित किए जाने की जरूरत है. राष्ट्रगान पर खड़ा होना, तिरंगा फहराना या वंदे मातरम् बोलना सिर्फ देशभक्ति साबित करने के लिए बाहरी प्रदर्शन की वस्तु है. यह सब कोई भी आदमी देशभक्ति का दिखावा करने के लिए भी कर सकता है. क्या ये सब करने वाले घोटाले नहीं करते या टैक्स चोरी नहीं करते, जिससे देश को भारी नुकसान होता है.

यह एक बार के लिए यह मान भी लिया जाए कि मदरसों में देशविरोधी बातें सिखाई जाती हैं या मुसलमानों में देशभक्ति की कमी है. फिर भी किसी को जबरन देशभक्त तो नहीं बनाया जा सकता. धमकी, दबाब या डर से अगर कोई वंदे मातरम् बोल दे या तिरंगा फहराकर राष्ट्रगान पर खड़ा भी हो जाए तो इसकी क्या गारंटी है कि वह आदमी या समुदाय देशभक्त हो जाएगा?

जबकि इसके ठीक उलट किसी भी समुदाय पर बार-बार शक करके उसके भीतर की प्रतिक्रियावादी ताकतों को शह ही दी जा रही है. यह सबसे खतरनाक तब हो जाता है जब सरकार खुद इसका हिस्सा बन जाए.

यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जिस आरएसएस के करीबी माने जाते हैं, उस आरएसएस के नागपुर मुख्यालय पर 26 जनवरी 1950 के 52 साल बाद 26 जनवरी 2002 को तिरंगा झंडा फहराया गया था. क्या इस तथ्य को देखते हुए जो निर्देश मदरसों को दिए गए हैं वही निर्देश आरएसएस द्वारा संचालित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर के स्कूलों को नहीं दिया जाना चाहिए था?

क्या किसी खास धर्म या संगठन से संबंधित होने मात्र से ही कोई देशभक्त या देशद्रोही हो जाता है.  मुसलमानों की देशभक्ति को साबित करने के लिए यहां कई सबूत दिए जा सकते हैं और अन्य समुदायों को देशद्रोही साबित करने के लिए भी. लेकिन असल मसला कुछ और है.

देशभक्ति पर बहस हो और लोग देशभक्त बनें, इससे किसी को परहेज नहीं है. लेकिन क्या रोजी-रोटी और शिक्षा का सवाल देशभक्ति का सवाल नहीं है. कब तक सरकारें देशभक्ति की आड़ में असल मुद्दों को छिपाती रहेंगी.

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