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मध्यप्रदेश में फेसबुक पर हिंदू देवी-देवताओं पर सवाल उठाना पड़ सकता है महंगा

हाल ही में मध्य प्रदेश के खरगौन जिले में दो दलित युवकों पर पुलिस ने केस दर्ज किया, दोनों ने फेसबुक पर दीवाली मनाए जाने को लेकर कुछ सवाल उठाए थे

Debobrat Ghose Debobrat Ghose Updated On: Oct 29, 2017 10:21 PM IST

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मध्यप्रदेश में फेसबुक पर हिंदू देवी-देवताओं पर सवाल उठाना पड़ सकता है महंगा

बीजेपी शासित मध्य प्रदेश में अगर आप हिंदू देवी-देवताओं पर सवाल उठाने वाली फेसबुक पोस्ट करते हैं, तो आप बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं. आपका ट्रोलिंग से गाली-गलौच का शिकार होना तय है. आपके खिलाफ एफआईआर हो सकती है. पुलिस कार्रवाई कर सकती है.

हाल ही में दो ऐसे केस हुए हैं, जिन से साफ है कि किस तरह ट्रोल के हमले के बाद मध्य प्रदेश की पुलिस हरकत में आ जाती है. खास तौर से तब जब हिंदुत्व ट्रोल ब्रिगेड किसी पर हमला बोलती है.

हाल ही में मध्य प्रदेश के खरगौन जिले में दो दलित युवकों पर पुलिस ने केस दर्ज किया. मामला उनकी फेसबुक पोस्ट से जुड़ा हुआ है. मध्य प्रदेश में फेसबुक पोस्ट को लेकर दर्ज हुआ ये पहला पुलिस केस है.

दोनों युवकों ने फेसबुक पर दीवाली मनाए जाने को लेकर कुछ सवाल उठाए थे. न तो उनकी भाषा आपत्तिजनक थी. न ही उन्होंने किसी भी देवी-देवता के बारे में अपमानजनक बातें लिखी थीं.

अब दोनों दलित युवक डर के साये में जी रहे हैं. उनके सिर पर गिरफ्तारी का खतरा मंडरा रहा है.

क्या लिखा था युवकों ने

खरगौन के मैनगांव के रहने वाले रीतेश माहेश्वरी ने फेसबुक पेज पर हिंदी में लिखा था: लोग अयोध्या में राम की वापसी का जश्न मनाने के लिए दिवाली मनाते हैं. इसमें सरस्वती, लक्ष्मी, गणेश और कुबेर का क्या रोल है? दिवाली पर इनकी भी पूजा होती है. दिवाली पर तो राम की पूजा होनी चाहिए.

24 बरस के रीतेश ने भीमपुत्र रीतेश के नाम से अपनी फेसबुक आईडी बनाई है. वो मैनगांव के गवर्नमेंट कॉलेज में अंग्रेजी साहित्य से पोस्ट ग्रेजुएशन कर रहा है.

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इसी तरह खंडवा जिले के रहने वाले ओजस निहाले ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा था: लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करने के बावजूद हंगर इंडेक्स में भारत 100वें नंबर पर क्यों है?

22 साल का ओजस भीकनगांव का रहने वाला है. वो जर्नलिज्म और मास कम्युनिकेशन की पढ़ाई कर रहा है.

ओजस और रीतेश की फेसबुक पोस्ट पर खुलकर चर्चा करने के बजाय लोग उन्हें गलत ठहराने में जुट गए. गाली-गलौच शुरू हो गई. ट्रोल उन्हें निशाना बनाने लगे. उनके दबाव में पुलिस ने रीतेश और ओजस के खिलाफ केस दर्ज कर लिया.

सिर्फ सवालों के जवाब चाहते थे ये

फ़र्स्टपोस्ट से बातचीत में ओजस और रीतेश दोनों ने कहा कि उनका इरादा कभी भी किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का नहीं था. वो तो बस अपने जहन में आए सवालों के जवाब चाहते थे.

दलितों की बलाई जाति से ताल्लुक रखने वाले रीतेश ने कहा कि, 'मैं खुद हिंदू हूं. हिंदू देवी-देवताओं की पूजा करता हूं. लेकिन मेरे मन में सवाल था कि दिवाली पर राम की पूजा क्यों नहीं होती, जबकि दिवाली उनकी अयोध्या वापसी की याद में ही मनाई जाती है. मेरा किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाने का इरादा नहीं था. न ही मैं हिंदू धर्म पर सवाल उठा रहा था. मैंने तो फेसबुक पर माफी भी मांगी. क्योंकि लोग मुझे गालियां दे रहे थे. शायद पुलिस ने राजनीतिक दबाव के चलते मेरे खिलाफ केस दर्ज किया क्योंकि शुरुआत में उन्होंने केस दर्ज करने से मना कर दिया था.'

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वहीं ओजस निहाले ने धार्मिक आस्था को आर्थिक हालात से जोड़कर देखा था. ओजस ने कहा कि, 'भुखमरी के हालिया जारी हुई लिस्ट में भारत 119 देशों के बीच 100वें नंबर पर है. मैं सिर्फ ये जानना चाहता था कि अगर हम लक्ष्मी और कुबेर की पूजा करते हैं, जो कि संपत्ति और खुशहाली के देवी देवता हैं, तो फिर हम भुखमरी के शिकार क्यों होते हैं. मैं धर्म को लेकर दोहरे मानदंडों के खिलाफ हूं. इसीलिए मैंने बिना किसी बेहूदा भाषा का इस्तेमाल करते हुए ये सवाल उठाया. जब सौ से ज्यादा लोगों ने हमारे खिलाफ थाने पर जाकर शोर मचाया तो पुलिस ने हमारे ऊपर केस दर्ज कर लिया.'

दलित संगठन भी हो रहे हैं एकजुट

दोनों के खिलाफ केस 20 अक्टूबर को खरगौन के पुलिस थाने में दर्ज किया गया है. पुलिस का कहना है कि दोनों के खिलाफ आईपीसी की धारा 153बी के तहत केस दर्ज किया गया है. शिकायत करने वालों ने आरोप लगाया था कि ओजस और रीतेश की फेसबुक पोस्ट से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. इससे समाज में तनाव बढ़ सकता है.

खरगौन जिला सांप्रदायिक रूप से काफी संवेदनशील माना जाता है.

दो दलित युवकों के खिलाफ केस दर्ज होने के बाद दलित समुदाय भी एकजुट हो रहा है. इस मुद्दे पर दलितों ने 26 अक्टूबर को एक रैली की थी. इसमें दोनों छात्रों पर दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की गई.

बलाई समाज संगठन के नेता नरेंद्र आर्य ने फ़र्स्टपोस्ट से कहा कि, 'पुलिस ने दबाव में आकर दोनों युवकों पर केस दर्ज किया है. मुझे पता चला है कि पुलिस पर खरगौन के विधायक ने दबाव डाला था. दिवाली के बाद हिंदूवादी संगठनों के करीब सौ लोग खरगौन पुलिस थाने गए थे. उन्होंने ही रीतेश और ओजस पर केस दर्ज कराने का दबाव डाला. अब हाल ये है कि मध्य प्रदेश में कोई हिंदू भी धर्म से जुड़े सवाल नहीं उठा सकता. दोनों छात्रों की पोस्ट में कोई ऐसी बात नहीं जो धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाए.'

खरगौन के एक और दलित कार्यकर्ता जितेंद्र खेड़े ने कहा कि उन्हें भी फेसबुक पोस्ट को लेकर दिवाली से पहले धमकियां मिली थीं.

जितेंद्र ने बताया कि, 'ट्रोल्स ने मुझे धमकियां दीं और कहा कि मेरे खिलाफ पुलिस का केस दर्ज हो जाएगा. पर चूंकि मैं स्थानीय संगठन से जुड़ा हूं तो दक्षिणपंथी ट्रोल मेरे खिलाफ उस तरह से हमलावर नहीं हुए, जिस तरह उन्होंने रीतेश और ओजस के खिलाफ लामबंदी की. ये हिंदुत्ववादी संगठन उन दलितों को लगातार निशाना बनाते रहे हैं, जो उनका समर्थन नहीं करते हैं.' जितेंद्र वामपंथी संगठन सीटू से जुड़े हुए हैं.

सीपीएम की राज्य इकाई ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को चिट्ठी लिखकर उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है, जिन्होंने पुलिस पर एफआईआर दर्ज करने का दबाव डाला. साथ ही ये भी लिखा है कि जिन दलित युवकों पर केस दर्ज हुआ है, उनकी गिरफ्तारी न की जाए.

सीपीएम के राज्य सचिव और केंद्रीय कमेटी के सदस्य बादल सरोज ने कहा कि, 'हिंदू धर्म के बारे में एक हिंदू युवक का सामान्य सा सवाल इतनी मुश्किल कैसे खड़ी कर सकता है. इस मामले में सब से खराब बात तो ये है कि पुलिस ने केस दर्ज कर लिया. ये उस प्रदेश की पुलिस का हाल है जो बलात्कार के केस दर्ज करने से कतराती है. पुलिस को कानून का मजाक नहीं बनाना चाहिए.'

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