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बीफ बैन से नॉर्थ-ईस्ट के बीजेपी नेताओं में नाराजगी, इस्तीफों का दौर शुरू

पिछले दो दिनों में उत्तरपूर्व के दो बीजेपी नेताओं ने पार्टी छोड़ दिया है

FP Staff | Published On: Jun 06, 2017 05:10 PM IST | Updated On: Jun 06, 2017 05:31 PM IST

बीफ बैन से नॉर्थ-ईस्ट के बीजेपी नेताओं में नाराजगी, इस्तीफों का दौर शुरू

केंद्र में इस समय जहां बीजेपी की सरकार है वहीं यूपी विधानसभा चुनावों में भी ऐतिहासिक और प्रचंड जीत हासिल करने के बाद योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली बीजेपी सरकार ने भी वहां अवैध बूचड़खानों पर रोक लगाने की मुहीम चालू कर दी है.

इस बीच जानवरों को काटने के लिए बाजार में बेचने पर केंद्र सरकार के प्रतिबंध को लेकर मेघालय के नॉर्थ गारो हिल्स जिले के बीजेपी अध्यक्ष बाचू मरक ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया है.

बाचू का इस्तीफा उस वक्त हुआ है जब सप्ताह भर पहले वेस्ट गारो हिल्स के भाजपा जिला अध्यक्ष बर्नार्ड एन. मरक ने इसी मुद्दे पर पार्टी छोड़ दी थी.

भाजपा से इस्तीफा देने के बाद बाचू ने कहा, ‘मैं गारो के लोगों की भावनाओं को लेकर समझौता नहीं कर सकता. एक गारो के तौर पर यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं अपने समुदाय के हित की रक्षा करूं. बीफ खाना हमारी संस्कृति और परंपरा का हिस्सा है. हम पर बीजेपी की गैरकानूनी विचारधारा थोपना हमें स्वीकार नहीं है.’

अगले साल यानि 2018 में नॉर्थ ईस्ट में तीन राज्यों में चुनाव होने वाले हैं. लेकिन बीफ को लेकर उत्तर-पूर्व में बीजेपी की नीति बाकी जगहों से अलग है. नागालैंड, मेघालय और मिजोरम में बीजेपी बीफ बैन के विरोध में खड़ी हो गई है.

उत्तर पूर्व में रहने वाली एक बड़ी आबादी ईसाई धर्म को मानने वाली है और बीजेपी शायद इस बात से वाकिफ है. ठंडा इलाका होने के कारण भी बीफ वहां के लोगों का मुख्य भोजन है. इसी को ध्यान में रखते हुए पार्टी पूर्वोत्तर के राज्यों में सभी आशंकाओं पर विराम लगाते हुए साफ कर दिया है कि वो यहां बीफ बैन लागू नहीं करेगी.

An Indian Hindu man feeds a sacred cow a

गौ मांस पर प्रतिबंध की बीजेपी की नीति का खुलकर विरोध हो रहा है

खुलकर होने लगा है विरोध 

इतना ही नहीं पार्टी के कुछ क्षेत्रीय नेता भी अब खुलकर सरकार के ऐसे किसी भी फैसले के विरोध में खुलकर आ गए सामने आ गए हैं.

मेघालय बीजेपी के जनरल सेक्रेटरी डेविड खरसती ने एक बयान जारी करके कहा है कि कुछ लोग हमारे बारे में अफवाह फैला रहे हैं. उन्होंने साफ किया कि अगर अगले साल हमारी सरकार सत्ता में आती है तो नगालैंड में यूपी की तरह गो-हत्या पर पाबंदी नहीं लगाई जा सकती है और इस बात से केंद्रीय नेता वाकिफ हैं.

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इससे पहले बीजेपी नेता मुख्तार अब्बास नकवी की तरफ से भी इस तरह की सलाह आई थी कि बीफ खाने वाले लोग अरब देश चले जाएं.

लेकिन केंद्रीय मंत्री किरन रिजीजू ने तल्ख प्रतिक्रिया दी थी. रिजीजू ने कहा था, 'वैसे राज्य जहां हिंदू बहुसंख्यक हैं, वहां गो-हत्या पर प्रतिबंध लगाने के लिए कानून बना सकते हैं. लेकिन पूर्वोत्तर राज्यों पर इस कानून को नहीं थोपा जा सकता. यहां बहुसंख्यक लोग गोमांस खाते हैं और मैं भी खाता हूं.'

उन्होंने कहा कि, 'हमें एक दूसरे की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए. उन्होंने कहा कि देश में सभी लोगों की संस्कृति, परंपराओं, आदतों और भावनाओं का सम्मान किया जाना चाहिए. इस मुद्दे को लेकर ज्यादा संवेदनशील होने की जरूरत नहीं है. हमारा देश लोकतांत्रिक है जहां कभी-कभार कुछ लोग ऐसे बयान देते हैं जो स्वीकार्य नहीं.'

Rescued cattle

उत्तर पूर्व के बीजेपी नेता विरोध में पार्टी छोड़ रहे हैं

नगालैंड बीजेपी अध्यक्ष विसासोले ल्होंग्यू ने भी हिंदुस्तान टाइम्स से बातचीत में कहा कि यूपी में स्लॉटर हाउसेस पर लगाई गई पाबंदी का असर मेघालय पर नहीं पड़ेगा. उनके मुताबिक यहां की परिस्थितियां अलग हैं जिनसे बीजेपी नेता अच्छी तरह वाकिफ हैं.

मेघालय बीजेपी प्रमुख शिबुन लिंगदोह ने भी कहा है कि, 'उत्तरप्रदेश में जिस तरह से अवैध बूचड़खानों के खिलाफ कार्रवाई की गई है उस तरह से मेघालय में गोवध पर प्रतिबंध नहीं होगा. हम चाहते हैं कि सरकार कानूनी तौर से राज्य में मांस का उत्पादन कराए.'

नॉर्थ ईस्ट के राज्यों में से मेघालय और मिजोरम में कांग्रेस की सरकार है. वहीं नागालैंड में बीजेपी ने गठबंधन के साथ सरकार बनाई हुई है.

इन तीन राज्यों में चुनाव भले ही साल 2018 में हैं लेकिन बीजेपी ने इसकी तैयारी अभी से कर दी है. लेकिन डर ये है कि बीजेपी जिस तरह से इन तीनों राज्यों में बीफ बैन को लेकर दोहरा रुख अपना रही है वो आने वाले समय में उनके लिए मुसीबत न बन जाए.

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