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डूबे हुए कर्ज का बोझ अब पड़ने वाला है सरकारी कंपनियों के कंधों पर

बैंकिंग अध्यादेश को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूरी दे दी है.

Bhasha Updated On: May 05, 2017 10:58 AM IST

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डूबे हुए कर्ज का बोझ अब पड़ने वाला है सरकारी कंपनियों के कंधों पर

सरकार नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एनपीए) से जल्द से जल्द निजात पाना चाहती है. इसके लिए वो नई रणनीति के तहत एक पहल शुरु करने के बारे में सोच रही है. आपको बता दें कि भारतीय रिजर्व बैंक को अधिक अधिकार देने से संबंधित बैंकिंग अध्यादेश को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूरी दे दी है.

वहीं अब सरकार संकट में फंसी परियोजनाओं को लेने के मामले में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र कंपनियों (पीएसयू) को परिचालनगत छूट प्रदान करने पर विचार कर रही है.

सूत्रों ने बताया कि रुकी हुई परियोजनाओं को लेने के मालमे में केंद्रीय सचिवालय बैंकों तथा विभिन्न सीपीएसूय के बीच समन्वय का काम करेगा.

पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बैठक बुलाई थी, जिसमें बढ़ते एनपीए (डूबा हुआ कर्ज) के मुद्दे पर चर्चा हुई. बैठक में अन्य मुद्दों के साथ-साथ फंसी संपत्ति को पीएसयू को स्थानांतरित करने पर भी विचार विमर्श हुआ.

बैठक में वित्त मंत्री अरूण जेटली, कैबिनेट सचिव पी के सिन्हा, वित्तीय सेवा सचिव अंजलि छिब्ब दुग्गल व अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

बैंकों से कहा गया है कि विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी एनपीए को चिन्हित करें और इसका ब्यौरा संबंधित मंत्रालयों के साथ साझा करें.

सूत्रों के मुताबिक, संबंधित मंत्रालय त्वरित समाधान या कुछ मामलों में पीएसयू द्वारा अपने अधीन लेने की दिशा में काम करेंगे. उल्लेखीय है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एनपीए अप्रैल दिसंबर 2016-17 के दौरान बढ़कर 6.06 लाख करोड़ रपए हो गया.

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