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दिल्ली का मुखिया तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जल्द ही बनाएगा संविधान पीठ

दिल्ली सरकार हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर शीघ्र निर्णय का अनुरोध कर रही है

Bhasha | Published On: Jul 11, 2017 09:21 PM IST | Updated On: Jul 11, 2017 09:21 PM IST

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दिल्ली का मुखिया तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट जल्द ही बनाएगा संविधान पीठ

सुप्रीम कोर्ट उपराज्यपाल को दिल्ली का प्रशासनिक मुखिया बताने वाले हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ आप सरकार की अपील पर शीघ्र सुनवाई के लिए पांच सदस्यीय संविधान पीठ के गठन पर विचार के लिए मंगलवार सहमत हो गया.

चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर और जस्टिस धनंजय वाई चंद्रचूड़ की बेंच के समक्ष दिल्ली सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रहमण्यम ने इस मामले पर शीघ्र सुनवाई का अनुरोध करते हुये इसका उल्लेख किया.

बेंच ने कहा, ‘‘हम इसे सूचीबद्ध कर रहे हैं और बेंच गठित करने पर विचार करेंगे.’ सुब्रहमण्यम ने कहा कि दो न्यायाधीशों की बेंच ने इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजा था. संविधान पीठ का अभी गठन होना है.

शीर्ष अदालत के दो न्यायाधीशों द्वारा 15 फरवरी को इस मामले की सुनवाई के लिए वृहद पीठ गठित करने हेतु इसे चीफ जस्टिस जगदीश सिंह खेहर के पास भेजे जाने के बाद से अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दायर अपील पर शीघ्र निर्णय का अनुरोध कर रही है.

बेंच ने सुब्रहमण्यम को भरोसा दिलाया कि वह संविधान पीठ गठित करने पर विचार करेगी और यह भी कहा, ‘यह बहुत ही मुश्किल और उलझी हुई समस्या है. फिर भी हम इसे करेंगे.’

पहले भी पीठ बनाने का अनुरोध कर चुकी है आप सरकार 

दिल्ली सरकार ने 23 फरवरी और 17 अप्रैल को इस मामले में संविधान पीठ गठित करने के लिए शीर्ष अदालत से अनुरोध किया था और एक बार प्रधान न्यायाधीश ने कहा था कि ग्रीष्मावकाश बाद संभवत: इसे गठित किया जा सकता है.

न्यायमूर्ति ए के सिकरी और न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल की बेंच ने 15 फरवरी को इस मामले को संविधान पीठ के पास भेजा था परंतु उसने इस प्रकरण में संविधान पीठ के विचारार्थ सवाल तैयार नहीं किए थे. दिल्ली सरकार ने दो फरवरी को शीर्ष अदालत में कहा था कि दिल्ली विधान सभा के दायरे में आने वाले मामलों के संबंध में उसे पूरी तरह कार्यकारी अधिकार प्राप्त है और केंद्र अथवा राष्ट्रपति या उपराज्यपाल इसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकते हैं.

शीर्ष अदालत ने इस पर कहा था कि यह सही है कि निर्वाचित सरकार के पास अधिकार होने चाहिए परंतु यह उच्च न्यायालय के फैसले के मुताबिक होंगे या दिल्ली सरकार की परिकल्पना के अनुसार, इस पर विचार करने की आवश्यकता है.

शीर्ष अदालत ने गत वर्ष नौ सितंबर को हाई कोर्ट के पिछले साल चार अगस्त के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इंकार कर दिया था.

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