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आधार अनिवार्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट की दखल से क्या सुरक्षित रहेगी निजता

जहां पहले से देश के नागरिक के रूप में कई पहचान पत्र मौजूद हों वहां आधार की अनिवार्यता पर सवाल उठते हैं.

Kinshuk Praval Kinshuk Praval Updated On: Jun 09, 2017 06:25 PM IST

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आधार अनिवार्य नहीं: सुप्रीम कोर्ट की दखल से क्या सुरक्षित रहेगी निजता

कुछ दिनों पहले ही सरकार का फरमान आया था कि अब इनकम टैक्स भरने के लिए भी आधार कार्ड अनिवार्य होगा. लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट के नए आदेश से लोगों को राहत मिल गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने 9 जून को कहा कि जिनके पास आधार कार्ड नहीं है वो पैन के जरिए अपना रिटर्न फाइल कर सकते हैं. अदालत ने कहा है कि जिन लोगों के पास आधार कार्ड और पैन कार्ड दोनों हैं उन्हें आईटी रिटर्न फाइल करते हुए इस बात की जानकारी देनी होगी कि उनके पास दोनों कार्ड है.

सरकार को झटका!

अदालत का यह फैसला सरकार के लिए झटका भी है क्योंकि सरकार हर हाल में आधार कार्ड अनिवार्य बनाना चाहती है. सरकार ने जब आधार को अनिवार्य बनाने का ऐलान किया था तो कई लोगों ने इसके दुष्परिणाम भी गिनाए थे. जानकारों का कहना है कि आधार को अनिवार्य बनाने से डेटा लिक होने की आशंका ज्यादा होती है.

ऐसे में सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला सरकार के लिए झटका साबित हो सकता है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से साफ कहा कि केंद्र सरकार को आधार कार्ड की सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहिए ताकि आधार कार्ड का डाटा लीक न हो सके.

केंद्र सरकार ने बताया कि देश में अबतक 113.7 करोड़ आधार कार्ड जारी हुए हैं. जबकि दस लाख पैन कार्ड रद्द किये गए हैं. जाहिर तौर पर तकरीबन सवा सौ करोड़ लोगों की निजता की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार के लिए न सिर्फ बड़ी चुनौती है बल्कि जिम्मेदारी भी.

सीआईएस की रिपोर्ट ने चौंकाया

बेंगलुरु की सेंटर फॉर इंटरनेट एंड सोसायटी (सीआईएस) की एक रिपोर्ट ने आधार कार्ड की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. सीआईएस की रिपोर्ट में करीब 13.5 करोड़ लोगों का आधार डाटा लीक होने की आशंका जताई गई है. सीआईएस की इस रिपोर्ट को रिपोर्ट को चार डेटा बेस की स्टडी करने के बाद तैयार किया गया है. हालांकि रिपोर्ट में ये जानकारी नहीं दी गई कि डाटा लीक होने की वजह क्या है?

इसके अलावा करीब साढ़े तेरह करोड़ों लोगों के आधार नंबर और मनरेगा में काम करने वालों के बैंक खातों की जानकारियां ऑनलाइन लीक होने का दावा किया गया है.

झारखंड में राज्य सरकार पर आरोप लगा कि उसकी लापरवाही की वजह से करीब 14 लाख लोगों का डाटा लीक हो गया. खुद क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी ने भी इस पर जब सवाल उठाया तो केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद को आश्वासन देना पड़ा. हाल के दिनों में करोड़ों आधार कार्ड धारकों के डाटा लीक होने से साफ है कि आधार कार्ड को लेकर सरकार के दावों में कितना दम है.

क्या कहता है आधार कानून 2016

आधार कानून 2016 के मुताबिक आधार से जुड़ी कोई भी जानकारी लीक करना अपराध है. किसी भी व्यक्ति का नाम, जन्म,  जन्मतिथि, पता सार्वजनिक करना जुर्म है. इसके बावजूद सरकार आधार की निजी जानकारियां केवल उस तक सुरक्षित रखने में लगातार चूक करती रही है. यही वजह है कि सुप्रीम कोर्ट लगातार आधार कार्ड की अनिवार्यता पर सुरक्षा का सवाल उठा रही है.

और कितने पहचान-पत्र बनेंगे आधार ?

जहां पहले से देश के नागरिक के रूप में कई पहचान पत्र मौजूद हों वहां आधार की अनिवार्यता पर सवाल उठते हैं. लेकिन जिस तरह से करोड़ों लोगों की निजी जानकारियां लीक हुई हैं उससे सरकार पर ही सवाल उठता है. लोगों का आरोप है कि लोगों की निजता में खलल डालने की कीमत पर आधार की अनिवार्यता पर जोर दिया जा रहा है.

सवाल उन डाटा की सुरक्षा का है जिसमें करोड़ों लोगों की उंगलियों के निशान से लेकर आंखों की पुतलियों की छाप है. ऐसी क्या व्यवस्था या सरकार के पास फुलप्रूफ प्लान है जिससे कि ये सुनिश्चित हो सके कि भविष्य में लोगों की निजी जानकारियां सार्वजनिक नहीं होंगी.

अबतक इस मामले में जिम्मेदार किस विभाग की जिम्मेदारी तय की गई या फिर किसी अधिकारी को दंडित किया गया ?

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि उसने दस लाख फर्जी पैनकार्ड रद्द किये हैं. इन फर्जी पैनकार्ड  का इस्तेमाल कालेधन और टेरर फंडिंग में हो रहा था. ऐसे में आधार कार्ड को देश की तमाम जनकल्याण योजनाओं से जोड़ने के बाद बड़ा सवाल उस बायोमीट्रिक व्यवस्था पर है जिसे सरकार सुरक्षित बता रही है.

हालांकि सरकार बार बार ये दलील देती रही कि आधार कार्ड लाने का मकसद केवल एक सुरक्षित और मजबूत प्रणाली लाना है. कोर्ट में आधार कार्ड को अनिवार्य करने के फैसले का बचाव करते हुए सरकार ने दलील दी कि ऐसा देश में फर्जी पैन कार्ड के इस्तेमाल पर रोक लगाने के लिए किया गया है.

लेकिन इन सबके बावजूद सुप्रीम कोर्ट की चिंता साफ है कि आधार कार्ड की सुरक्षा को और सुनिश्चित करने के लिये केंद्र सरकार ठोस कदम उठाए ताकि लोगों की निजी जानकारियों पर डाका न पड़ सके.

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