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नाबालिग पत्नी से संबंध को रेप के दायरे में लाने वाले फैसले पर कई सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 198(6) के अनुसार 18 साल से कम उम्र की पत्नी को 1 वर्ष के भीतर शिकायत दर्ज करानी होगी तभी ऐसे रेप अपराध का पुलिस और अदालत द्वारा संज्ञान लिया जा सकता है

Virag Gupta Virag Gupta Updated On: Oct 12, 2017 12:30 PM IST

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नाबालिग पत्नी से संबंध को रेप के दायरे में लाने वाले फैसले पर कई सवाल

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 15 से 18 साल के बीच के उम्र की नाबालिग पत्नी के साथ सेक्स करने के लिए अब पति को रेप का दोषी माना जा सकता है. आईपीसी के अनुसार आपसी रजामंदी से सेक्स और प्रोहिबिशन ऑफ चाइल्ड मैरिज एक्ट के अनुसार लड़की की शादी के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष से निर्धारित की गई है.

आईपीसी के के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चे सहमति से भी सेक्स नहीं कर सकते लेकिन सेक्शन 375 (2) में दिए गए अपवाद के तहत 15 से 18 साल की उम्र की पत्नी के साथ सेक्स करने पर पति को रेप का दोषी नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का तर्क था कि सेक्शन 375 का अपवाद POCSO एक्ट के साथ अनेक इंटरनेशनल कन्वेंशन का भी उल्लंघन करता है.

कोर्ट के अनुसार जब सभी कानूनों में शादी की उम्र 18 साल है फिर आईपीसी के तहत यह अपवाद एकतरफा और मनमाना होने के साथ नाबालिग लड़की के अधिकारों का उल्लंघन भी है. सुप्रीम कोर्ट ने अपवाद को संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 के विरुद्ध मानते हुए, इसे निरस्त कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से अनेक सवाल खड़े हो गए हैं?

पति-पत्नी के बीच सहमति से सेक्स, बलात्कार कैसे?

रेप इसलिए अपराध है क्योंकि इसमें लडकी के साथ जबरदस्ती की जाती है जिस वजह से इसे बलात्कार कहा जाता है. हिंदुओं में विवाह एक पवित्र रिश्ते के साथ मुस्लिम समुदाय में यह कानूनी अनुबंध या कॉन्ट्रैक्ट है. नाबालिग पत्नी यदि सेक्स नहीं चाहती तो तलाक के बगैर विवाह को रद्द करने का प्रावधान कानून में पहले से मौजूद है. पति द्वारा नाबालिग पत्नी के साथ सहमति के साथ किए गए सेक्स को बलात्कार की श्रेणी में रखकर कमजोर वर्ग की महिलाओं को पुलिस व्यवस्था के हवाले क्यों किया जा रहा है?

बाहरी की शिकायत पर प्राइवेसी का उल्लंघन क्यों?

प्रतीकात्मक तस्वीर

प्रतीकात्मक तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सीआरपीसी की धारा 198(6) के अनुसार 18 साल से कम उम्र की पत्नी को 1 वर्ष के भीतर शिकायत दर्ज करानी होगी तभी ऐसे रेप अपराध का पुलिस और अदालत द्वारा संज्ञान लिया जा सकता है. सीआरपीसी की धारा 154 के अनुसार रेप जैसे गंभीर अपराधों पर पुलिस खुद या तीसरे व्यक्ति की शिकायत पर मामला कर सकती है.

सुप्रीम कोर्ट जब कानून में अपवादों के विरुद्ध है, तो नाबालिग पत्नी के अलावा तीसरे व्यक्ति को भी इन मामलों में शिकायत दर्ज कराने का हक क्यों नहीं होगा? रेप के नाम पर पुलिस और तीसरे व्यक्ति की बेडरूम में एंट्री क्या पति-पत्नी की प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं मानी जाएगी?

फैसले से लाखों नाबालिग लड़कियों का वैवाहिक जीवन खतरे में

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पुराने मामलों में प्रभाव नहीं पड़ेगा. फैसले के पहले नाबालिग पत्नी से सेक्स पर रेप का मामला नहीं बन सकता लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पहले जो शादियां हो गई हैं, उनका क्या हश्र होगा? सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद नाबालिग पत्नी द्वारा सेक्स से इनकार करने पर यदि तलाक की नौबत आती है तो क्या पीड़ित लड़कियों के पुनर्वास करने में क्या राज्य सरकार सक्षम हैं?

राज्यों का पक्ष सुने बगैर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय क्यों

राष्ट्रीय परिवार कल्याण सर्वे-4 के 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 31.5 फीसदी और शहरी क्षेत्रों में 17.5 फीसदी लड़कियों के बाल विवाह होते हैं. राजस्थान, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में बाल विवाह की कुरीति बड़े पैमाने पर फैली है. इसके बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों का पक्ष सुने बगैर सिर्फ केंद्र सरकार और राष्ट्रीय महिला आयोग के जवाब के आधार पर इस बड़े मामले में फैसला लिया, क्या संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन नहीं है?

मैरिटल रेप पर फैसला क्यों नहीं

marital rape

प्रतीकात्मक तस्वीर

सुप्रीम कोर्ट के जज दीपक गुप्ता ने पृथक फैसले में कहा है कि इस फैसले से वैवाहिक बलात्कार के मुद्दे का निपटारा नहीं हो रहा है. 18 साल से अधिक उम्र की पत्नी के साथ पति द्वारा जबरन संबंध को मैरिटल रेप का अपराध बनाने का मामला दिल्ली हाईकोर्ट में पेंडिंग है. केंद्र सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष पक्ष रखते हुए कहा कि मैरिटल रेप को अपराध बनाने से देश में विवाह, परिवार और समाज की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाएगी.

नाबालिग लड़की का यदि अपने शरीर पर अधिकार है तो वैसा अधिकार 18 वर्ष से ऊपर की महिला को क्यों नहीं मिलना चाहिए? इस फैसले से नाबालिग और बालिग महिलाओं का नया कानूनी अपवाद क्या असंवैधानिक नहीं है? सवाल यह है कि मैरिटल रेप के मामलों पर बालिग महिलाओं को अदालत से ऐसा न्याय कब मिलेगा?

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