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पेट्रोल-डीजल की होम डिलीवरी: ये सौदा बड़ा ज्वलनशील है!

जिस कदर भ्रष्टाचार है, उसमें साफ-सुथरा पेट्रोल-डीजल घर पहुंचाया जाएगा ये भी एक बड़ा सवाल है

Prakash Katoch | Published On: May 09, 2017 07:42 AM IST | Updated On: May 09, 2017 07:42 AM IST

पेट्रोल-डीजल की होम डिलीवरी: ये सौदा बड़ा ज्वलनशील है!

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक सरकार पेट्रोल और डीजल की होम डिलीवरी की तैयारी कर रही है. इसकी जरूरत पेट्रोल पंपों के बाहर लगी लंबी कतारों को देखते हुए महसूस की गई.

तेल मंत्रालय के मुताबिक हर रोज देश भर में करीब 35 करोड़ लोग पेट्रोल पंप जाते हैं. पेट्रोल पंपों पर हर साल करीब ढाई हजार करोड़ का लेन देने होता है.

जिसका मतलब है कि हर महीने पेट्रोल पंप पर 208.3 करोड़ या रोजाना 6.84 करोड़ का लेन-देन होता है. सरकार पेट्रोल-डीजल की होम डिलिवरी करके ग्राहकों को राहत देना चाहती है.

फिलहाल इस योजना की ज्यादा जानकारी तो नहीं दी गई है. मगर, मीडिया में जो खबरें आई हैं उनके मुताबिक अगर आप पहले से पेट्रोल-डीजल की बुकिंग करेंगे तो तेल आपके घर पहुंचाया जाएगा. तेल मंत्रालय ने ट्वीट के जरिए कुछ और जानकारियां साझा की हैं. मसलन रोजाना कैशलेस लेनदेन 150 करोड़ से बढ़कर 400 करोड़ पहुंच चुका है.

कैशलेस लेनदेन को लेकर सरकार की पहल

फिलहाल 40 हजार पेट्रोल पंपों पर प्वाइंट ऑफ सेल यानी स्वाइप मशीनें उपलब्ध हैं. फिलहाल 86 फीसद से ज्यादा पेट्रोल पंपों के पास डिजिटल लेन-देन का ढांचा मौजूदी है. ये भी अहम बात है कि कैशलेस लेन-देन को लेकर जानकारी बढ़ाने के लिए सरकार 35 हजार से ज्यादा जागरूकता के कार्यक्रम चला चुकी है.

तेल कंपनियां कैशलेस लेन-देन पर 0.75 फीसद की छूट भी दे रही है. रोजाना 400 करोड़ का कैशलेस लेन-देन इसी लेख की शुरुआत में दिए गए रोजाना के 6.84 करोड़ के लेन-देन के आंकड़े को गलत साबित करता है. शायद सरकारी आंकड़ें में पेट्रोल पंपों की अपनी खरीद फरोख्त का हिस्सा भी शामिल कर लिया गया है.

घर पर तेल पहुंचाने की योजना शायद रविवार को पेट्रोल पंप बंद करने से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए भी तैयार की गई है. तेल मंत्रालय का कहना है कि वो हर रविवार को पेट्रोल पंप बंद करने के हक में नहीं है.

इस बात से ग्राहक भी खुश हैं. हालांकि अभी ये साफ नहीं है कि पेट्रोल-डीजल की होम डिलिवरी में लोगों को कितना ज्यादा दाम देना होगा. ये इसी बात पर निर्भर होगा कि कितने लोग इस सुविधा का फायदा उठाएंगे.

इस योजना से जुड़े कई मुद्दे हैं, जिन पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है. पहली बात तो ये कि पेट्रोल-डीजल की एडवांस बुकिंग कितनी तादाद के लिए और कितने वक्त पहले करनी होगी?

फिर क्या, कंपनियां वक्त पर तेल घर पहुंचाने की गारंटी लेंगी? क्योंकि अगर वक्त पर तेल पहुंचाने की गारंटी, तेल कंपनियां नहीं लेंगी, तो इस योजना का कोई फायदा नहीं होगा. फिर इस काम मे कितने टैंकर लगाए जाएंगे? अगर ज्यादातर लोग इस योजना का फायदा लेना चाहेंगे, तो क्या, तेल कंपनियां उनकी मांग पूरी कर पाएंगी?

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क्या है होम डिलिवरी का मतलब

सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि होम डिलिवरी का मतलब क्या है? दिल्ली-एनसीआर की उन घनी बस्तियों में जहां पैदल चलना मुश्किल है, वहां तेल की होम डिलिवरी कैसे हो पाएगी? ऐसे इलाकों में तेल के टैंकर पहुंचना ही बेहद मुश्किल होगा.

अगर टैंकर इन कॉलोनियों में घुस भी गए तो वहां भयंकर जाम लग जाएगा. फिर जिन लोगों ने पहले से पेट्रोल-डीजल की बुकिंग की होगी, उनकी गाड़ियों की लंबी कतारें, हालात को और मुश्किल बना देंगी. ऐसे में वो लोग जो इन कतारों में नहीं लग सकेंगे, क्या वो अपनी बुकिंग कैंसिल करके, पेट्रोल पंप पर जाकर तेल भरा सकेंगे?

इन लंबी कतारों का इंतजाम कैसे होगा? अगर इन लंबी कतारों में भी वक्त लगेगा, तो एडवांस बुकिंग और होम डिलिवरी का कोई मतलब नहीं रह जाएगा. और अगर कोई तेल टैंकर पास के किसी पार्क या खुले इलाके में पहुंचकर तेल देगा, तो क्या वाकई इसे होम डिलिवरी कहा जाएगा?

घर-घर तेल पहुंचाने वाले टैंकर, आसानी से आतंकवादियों के निशाने पर आ सकते हैं. ऐसे में इनकी सुरक्षा की क्या गारंटी होगी? ऐसे टैंकर में सिर्फ एक माचिस की तीली से आग लगाकर तबाही मचाई जा सकती है, जिसमें बड़ी तादाद में लोग हताहत हो सकते हैं.

ऐसे तेल के टैंकर के जरिए आतंकवादी अपनी मुराद पूरी करने का सबसे आसान जरिया हासिल कर सकते हैं. करीब दो करोड़ की आबादी वाली दिल्ली में 67 पेट्रोल पंप और 13 सीएनजी पंप हैं.

इनमें से ज्यादातर सीएनजी पंप पर लंबी कतारें लगती हैं. आम तौर पर पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें नहीं देखी जाती हैं. लेकिन सरकार सीएनजी की होम डिलिवरी की योजना नहीं बना रही है. सुरक्षा की चुनौतियों के देखते हुए ऐसा करना ठीक भी नहीं होगा.

घर पहुंचाए जाने वाले तेल की क्वालिटी का सवाल

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एक बड़ा सवाल घर पर पहुंचाए जाने वाले तेल की क्वालिटी का भी है. जिस कदर भ्रष्टाचार है, उसमें साफ-सुथरा पेट्रोल-डीजल घर पहुंचाया जाएगा, इसकी गारंटी कौन लेगा? उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के आदेश पर कई पेट्रोल पंपों पर छापेमारी हुई है. इसमें पता चला है कि पेट्रोल पंप, चिप के जरिए ग्राहकों को दस से पंद्रह फीसद कम तेल देकर उन्हें ठग रहे थे.

दिल्ली-एनसीआर में भी ऐसा खूब होता है. कई पेट्रोल पंप तो इसके लिए बहुत बदनाम हैं. इससे बचने के लिए ग्राहक कई नुस्खे आजमाते हैं. मसलन वो टैंक फुल नहीं कराते. या फिर पांच सौ-हजार का तेल नहीं डलवाते. उन्हें लगता है कि इससे वो तेल की चोरी का शिकार होने से बच जाएंगे.

वहीं पेट्रोल पंप मालिकों का कहना है कि 15-20 हजार वाले सील टैंकर में भी 200-250 लीटर कम तेल होता है. शायद ऐसा कहकर वो ग्राहकों को ठगने की वजह बताते हैं.

इन बातों को देखते हुए तेल मंत्रालय के सामने पेट्रोल-डीजल की होम डिलिवरी को लेकर चुनौतियां साफ हैं. उसे तय वक्त पर तेल पहुंचाने की गारंटी देनी होगी. फिर सही तादाद में और अच्छी क्वालिटी का तेल पहुंचाने की भी गारंटी देनी होगी. साथ ही तेल मंत्रालय को ये भी सुनिश्चित करना होगा कि सील तेल टैंकरों में भी कम तेल पेट्रोल पंप मालिकों को न मिले.

मीडिया में आई खबरों के मुताबिक पेट्रोल पंपों में चिप के जरिए चोरी पकड़ने के लिए मशीनें उखाड़नी पड़ी थीं. ऐसे में तेल मंत्रालय, आईआईटी के जरिए ऐसी तकनीक विकसित कर सकता है जिसमे तेल की ठगी हो ही न सके. ऐसी चोरी वाली चिप का पता बिना पंप उखाड़े ही लगाया जा सके.

अगर पुलिस नियमित रूप से पेट्रोल पंपों की जांच करे, तो भी काफी मदद मिल सकती है. इससे पेट्रोल पंप हमेशा सही नाप और दाम का डिस्प्ले करेंगे. कई शहरों में रोजाना भाव तय होने का फैसला तभी ठीक से लागू हो सकेगा.

रविवार को पेट्रोल पंप बंद करने से ग्राहकों को काफी परेशानी होने का अंदेशा है. ऐसे में पेट्रोल पंप पर ज्यादा कर्मचारी लगाकर उन्हें शिफ्ट में बांटा जा सकता है. या फिर उन्हें साप्ताहिक अवकाश दिया जा सकता है.

इस तरह पेट्रोल पंप रोजाना खोले जा सकेंगे. सोवियत संघ में हर फैक्ट्री पूरे साल चलती थी. तेल मंत्रालय को और पेट्रोल पंप खोलने पर भी विचार करना चाहिए.

खास तौर से सीएनजी पंप तो जरूर ही बड़ी तादाद में खोले जाने की जरूरत है. क्योंकि सबसे ज्यादा लंबी लाइनें सीएनजी स्टेशनों पर ही देखी जाती हैं. पेट्रोल-डीजल की होम डिलिवरी से ज्यादा तेल मंत्रालय अगर इस पर ध्यान दे तो बेहतर होगा.

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