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राम जन्म भूमि विवाद के पीछे पाकिस्तान का हाथ: शिया वक्फ बोर्ड

वसीम रिजवी ने एक कार्यक्रम में दावा किया कि अयोध्या में राम जन्म भूमि-बाबरी विवाद कोई धार्मिक विवाद नहीं बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान की उपज है

FP Staff Updated On: Sep 08, 2017 09:02 AM IST

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राम जन्म भूमि विवाद के पीछे पाकिस्तान का हाथ: शिया वक्फ बोर्ड

उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी ने एक अजीबोगरीब बयान दिया है. वसीम रिजवी ने दावा किया है कि अयोध्या में विवादित स्थल को लेकर चल रहा विवाद पाकिस्तान की ओर से प्रायोजित है. इतना ही नहीं वसीम रिजवी ने ये तक आरोप लगाया कि मौलवियों को इस विवाद को बनाए रखने के लिए पाकिस्तान फंडिंग करता है. हालांकि इस बयान के सामने आते ही मुस्लिम धर्मगुरूओं ने उसका विरोध किया है.

वसीम रिजवी का विवादित बयान

दरअसल, पिछले कुछ समय से सुर्खियों में बने रहने वाले उत्तर प्रदेश वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी के हालिया बयान ने एक बार फिर विवाद खड़ा कर दिया है. वसीम रिजवी ने एक कार्यक्रम में दावा किया कि अयोध्या में राम जन्म भूमि - बाबरी विवाद कोई धार्मिक विवाद नहीं बल्कि पड़ोसी देश पाकिस्तान की उपज है. उन्होंने आरोप लगाया है कि कुछ ऐसे मौलवी हैं जो कि पाकिस्तान के इशारे पर इस विवाद को लगातार भड़काते रहते हैं.

वसीम रिजवी ने कहा, 'मामला इसलिए नहीं सुलझ रहा क्योंकि इसमें पाक का हाथ रहा है. राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद के मामले में जो पक्षकार लोग हैं, उनके सीधे संबंध पाक से हैं. पाक हमेशा हिंदुस्तान मे हर छोटे से बड़े मामले में खलफिसार पैदा करना चाहता है.'

मुस्लिम धर्मगुरूओं की प्रतीक्रिया 

वसीम रिजवी के बयान के सामने आते ही मुस्लिम धर्मगुरूओं की ओर से उसका विरोध होना शुरू हो गया. मुस्लिम धर्मगुरूओं ने इसे कई तरीके की जांच में फंसे वसीम रिजवी की खुद को बचाने की कोशिश करार दिया. मुस्लिम धर्मगुरूओं ने कहा कि वसीम रिजवी पिछले कुछ समय से अजीबोगरीब बयान दिए जा रहे हैं और इस पर बहुत ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है.

सुन्नी धर्मगुरू सूफियान निजामी ने कहा, 'जिस तरीके से वो फंसे हैं सियासत के लिए वो मौलानाओं को ISIS से भी जोड़ सकते थे. उन्होंने पाकिस्तान से ही हमें जोड़ा. इस देश में वो विवाद आस्था के कारण है इसे किसी और देश के कारण बोलना बेहद गैर जिम्मेदाराना बयान है.'

जफरयाब जिलानी का पलटवार

वहीं बाबरी मस्जिद मामले में पैरोकार जफरयाब जिलानी ने रिजवी के इस बयान को बेतुका करार दिया. उन्होंने कहा कि मंदिर-मस्जिद विवाद 1949 से चला आ रहा है तब ना तो रिजवी का जन्म हुआ था ना ही उस वक्त पाकिस्तान इस हालत में था कि वो भारत में किसी तरीके की साजिश को अंजाम दे सके. ये विवाद दो धर्मों की आस्था के विषय के कारण शुरू हुआ है और कोर्ट में चल रहे इस मामले में ऐसे आरोप बिना सिर पैर के लगाए जा रहे हैं.

गौरतलब है कि वसीम रिजवी उसी शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन हैं जिसके खिलाफ यूपी सरकार ने बकायदा जांच के आदेश दिए हुए हैं. सरकार की ओर से बोर्ड को भंग करने की सिफारिश भी की जा चुकी है. साथ ही शिया वक्फ बोर्ड में घोटाले की जांच के लिए सरकार ने कैग और सीबीआई को भी पत्र लिखे हैं.

कई विवादों में फंसे वसीम रिजवी ने इससे पहले बाबरी मस्जिद को एक शिया मस्जिद बताते हुए हिंदुओं को वो जगह देने की भी बात कही थी. अब देखना है कि रिजवी का ये नया बयान किसी सबूतों के आधार पर है या फिर एक नया विवाद पैदा करने की कोशिश.

(साभार न्यूज 18)

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