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25 रुपये चार्जः एसबीआई का नया नियम आम लोगों के साथ ठगी है

जब से नोटबंदी शुरू हुई है तब से केंद्र लोगों को डरा-धमका रहा है

Dinesh Unnikrishnan | Published On: May 12, 2017 09:48 PM IST | Updated On: May 12, 2017 09:48 PM IST

25 रुपये चार्जः एसबीआई का नया नियम आम लोगों के साथ ठगी है

अगर स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की वेबसाइट पर मौजूद सर्कुलर को एक संकेत माना जाए तो 1 जून के बाद से एसबीआई के एटीएम से हर कैश विद्ड्रॉल पर 25 रुपये का चार्ज लगेगा.

मोबाइल के जरिए होने वाले हर आईएमपीएस ट्रांसफर, यूपीआई या इंटरनेट बैंकिंग पर 1 लाख रुपये के ट्रांजैक्शन तक 5 रुपये का शुल्क और सर्विस टैक्स लगेगा. 2 लाख रुपये तक के ऐसे किसी भी ट्रांजैक्शन पर आपको 15 रुपये चुकाने होंगे और इससे ऊपर के लेनदेन के लिए बैंक आपसे 25 रुपये वसूलेगा.

कितना लगेगा चार्ज?

बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट्स के लिए 4 फ्री कैश विद्ड्रॉल के बाद (ब्रांच और एटीएम समेत) एसबीआई ब्रांच से पैसे निकालने पर 50 रुपये और सर्विस टैक्स लिया जाएगा.

एसबीआई के एटीएम से पैसे निकालने पर 10 रुपये और अन्य बैंक के एटीएम से विद्ड्रॉल पर 20 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन लगेगा. बात यहीं पर खत्म नहीं होती. अगर आप कटे-फटे नोट एक्सचेंज कराने जाएंगे तो बैंक इस पर भी अब मामूली शुल्क लेगा.

एसबीआई के एक अफसर ने कहा कि चार्ज स्ट्रक्चर को लेकर कुछ कनफ्यूजन है और बैंक जल्द ही इस मसले पर स्पष्टीकरण देगा. लेकिन, केरल जैसे राज्यों में बैंक के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन शुरू हो चुका है. केरल की एलडीएफ सरकार ने एसबीआई अधिकारियों से आम कस्टमर्स से पैसे वसूलने को लेकर सवाल उठाए हैं.

लोगों के साथ ठगी नहीं है ये?

यह अन्याय है और केंद्र सरकार लोगों को ठग रही है. जब से नोटबंदी शुरू हुई है तब से केंद्र लोगों को डरा-धमका रहा है. सीपीएम के लोकसभा सांसद एम बी राजेश ने कहा, ‘इस मसले को संसद के अंदर और बाहर पूरे जोर से उठाया जाएगा.’

ज्यादा वक्त नहीं गुजरा जब एसबीआई ने कहा था कि 5,000 रुपये प्रतिमाह के मिनिमम एवरेज बैलेंस से कम होने पर वह कस्टमर्स से जुर्माना वसूलेगा.

एसबीआई के इस बयान का काफी विरोध हुआ. एसबीआई का नया सर्कुलर इस लिहाज से आम लोगों के लिए बेहद खराब है. खासतौर पर ऐसे लोगों पर इसका ज्यादा बुरा असर होगा जिन्होंने अब तक रोजाना के लेनदेन के लिए इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग का इस्तेमाल शुरू नहीं किया है.

इस वर्ग के लोगों के लिहाज से एसबीआई का यह कदम अतार्किक है. साथ ही यह फैसला आम कस्टमर्स को बैंकों से दूर कर उन्हें फिर से अनौपचारिक बैंकिंग चैनलों की ओर ले जाएगा.

कैशलेस के जमाने में चार्ज क्यों

इसके अलावा, यह चीज चौंकाने वाली है कि एसबीआई जैसा बैंक इंटरनेट फंड ट्रांसफर और बीसी (बिजनेस कॉरस्पॉन्डेंट्स) के जरिए होने वाले डिपॉजिट/विद्ड्रॉल्स पर ऐसे वक्त में चार्जेज थोप रहा है जब नरेंद्र मोदी सरकार लोगों को नॉन-कैश तरीकों का इस्तेमाल करने के लिए उत्साहित कर रही है. सरकार बैकिंग सर्विसेज को दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही है जहां बैंक शाखाएं मौजूद नहीं हैं.

न केवल एसबीआई बल्कि अन्य बैंक भी हाल के दिनों में तकरीबन हर सर्विस पर कस्टमर्स से पैसा वसूलने की फिराक में दिखाई दिए हैं.

खासतौर पर नॉन-होम ब्रांच कस्टमर्स से कैश विद्ड्रॉल्स पर भी चार्ज लेने के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. नॉन-होम ब्रांच कस्टमर को होम-ब्रांच ग्राहकों के मुकाबले सर्विसेज पर ज्यादा पैसा चुकाना होगा.

यहां सवाल यह है कि किसी बैंक को कस्टमर्स को होम ब्रांच और नॉन-होम ब्रांच ट्रांजैक्शन के आधार पर क्यों सजा देनी चाहिए जबकि बैंक अकाउंट्स कोर बैंकिंग मोड में चलाए जाते हैं? आमतौर पर बैंक किसी कस्टमर के उसी बैंक की दूसरी ब्रांच से कैश ट्रांजैक्शंस पर पाबंदियां लगाने की एक वजह केवाईसी का मामला बताते हैं.

क्या सही है यह तर्क?

तर्क यह है कि होम ब्रांच को कस्टमर का बैकग्राउंड बेहतर तरीके से पता होता है और ऐसे में वह ब्रांच उन कस्टमर्स के ट्रांजैक्शंस पर ज्यादा जानकारी भरा फैसला ले सकती है.

लेकिन, कोर बैंकिंग के दौर में ऐसा नहीं होना चाहिए. मिसाल के तौर पर, अगर कोई युवा कस्टमर की होम ब्रांच एक शहर में है और वह रोजगार के मकसद से किसी दूसरे शहर में है तो निश्चित तौर पर वह शख्स कैश ट्रांजैक्शन के लिए होम ब्रांच नहीं जा पाएगा. ऐसी स्थिति में उस पर नॉन-ब्रांच कस्टमर फीस लेना उचित नहीं होगा.

जहां तक मामला हर एटीएम विद्ड्रॉल पर चार्ज लेने का है तो एसबीआई का कदम हर तरह से तर्क से परे है. रूरल इंडिया में लोग अभी भी कैश का इस्तेमाल अपने दैनिक लेनदेन में करते हैं और एटीएम अभी भी नकदी निकासी का मुख्य जरिया बने हुए हैं.

ये कस्टमर्स आमतौर पर कम आय वर्ग से आते हैं और इनमें स्टूडेंट्स भी शामिल हैं जो कि छोटी रकम की निकासी करते हैं ताकि अपनी नकदी की जरूरतों को पूरा कर सकें. ऐसे लोगों से 25 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन चार्ज लेना इस वर्ग पर काफी बुरा असर डालेगा.

अगर आइडिया लोगों को कम कैश का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित करना है तो ऐसा धीरे-धीरे और एक लंबे वक्त में ही मुमकिन हो पाएगा. हर एटीएम कैश विद्ड्रॉल पर अचानक चार्ज लगाने के फैसले से लगता है कि एसबीआई हड़बड़ी में लोगों को अपनी शाखाओं और एटीएम से दूर करना चाहता है.

देश की आबादी का बड़ा हिस्सा अभी भी कैशलेस कामकाज नहीं करता है. ऐसे में आम लोगों के लिए नकदी की निकासी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने का सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है. इस लिहाज से एसबीआई का कदम गलत है और यह आम लोगों पर विपरीत असर डालेगा.

एसबीआई का स्पष्टीकरण

बाद में एसबीआई ने स्पष्टीकरण दिया है कि 25 रुपये प्रति ट्रांजैक्शन चार्ज केवल एसबीआई बडी कस्टमर्स के लिए है और यह सभी कस्टमर्स के लिए नहीं है.

बैंक ने यह भी स्पष्ट किया है कि हर महीने 4 मुफ्त एटीएम विद्ड्रॉल की सीमा केवल बेसिक सेविंग्स डिपॉजिट अकाउंट पर लागू होती है.

सभी सामान्य सेविंग बैंक अकाउंट्स को बैंक ट्रांजैक्शन के अलावा मेट्रो शहरों में 8 फ्री एटीएम ट्रांजैक्शंस (5 एसबीआई एटीएम और 3 अन्य बैंक एटीएम) और नॉन मेट्रो शहरों में 10 फ्री ट्रांजैक्शंस (5 एसबीआई एटीएम और 5 अन्य बैंकों के एटीएम) की सुविधा मिलती रहेगी.

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