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टैगोर के विचार और उर्दू शब्दावली से आरएसएस की शिक्षा संस्थान को ऐतराज

आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक ने कहा, इन किताबों में कई चीजें आधारहीन और दोषपूर्ण हैं

FP Staff Updated On: Jul 24, 2017 03:21 PM IST

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टैगोर के विचार और उर्दू शब्दावली से आरएसएस की शिक्षा संस्थान को ऐतराज

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास ने राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद् (एनसीईआरटी) को अंग्रेजी, उर्दू और अरबी शब्द, क्रांतिकारी कवि पाश की एक कविता, मिर्जा गालिब की शायरी और रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों को स्कूली शिक्षा की किताबों से हटाने समेत कई सुझाव भेजे हैं.

इस न्यास के प्रमुख दीनानाथ बत्रा आरएसएस के शैक्षणिक शाखा विद्या भारती के प्रमुख भी रह चुके हैं. एनसीईआरटी ने हाल ही में लोगों से पाठ्य पुस्तकों में बदलाव से जुड़े सुझाव मांगे थे. न्यास ने एनसीईआरटी को पांच पन्ने में अपने सुझाव भेजे हैं.

पुस्तक में कई चीजें आधारहीन और दोषपूर्ण

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक न्यास के सचिव और आरएसएस के वरिष्ठ प्रचारक रहे अतुल कोठारी ने कहा, 'इन किताबों में कई चीजें आधारहीन और दोषपूर्ण हैं. यह एक ही समुदाय के लोगों को अपमानित करने की कोशिश है. इसमें तुष्टिकरण की झलक भी दिखती है. आप बच्चों को दंगों के बारे में पढ़ाकर उन्हें कैसे प्रेरित करना चाहते हैं. शिवाजी महाराज, महाराणा प्रताप, विवेकानंद और सुभाष चंद्र बोस जैसी महान हस्तियों के लिए कोई जगह नहीं है.'

Nepal - Kathmandu - School children

कोठारी ने कहा, 'हमें ये चीजें आपत्तिजनक लगीं इसलिए हमने अपना सुझाव एनसीईआरटी को भेजा है. हमें आशा है कि ये सुझाव लागू होंगे.

न्यास ने मशहूर चित्रकार मकबूल फिदा हुसैन की आत्मकथा के अंश, मुगल बादशाहों की रहमदिली का जिक्र, बीजेपी को एक हिंदू पार्टी बताना, नेशनल कांफ्रेंस को 'सेकुलर', पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा सिख दंगे पर मांगी गई माफी और गुजरात दंगे में लगभग दो हजार लोग मारे गए थे जैसे वाक्यों को हटाने के सुझाव भी एनसीईआरटी को दिए हैं.

एनसीईआरटी को पांच पन्ने के सुझाव भेजे

न्यास के भेजे पांच पन्ने के सुझाव में एनसीईआरटी की कक्षा 11 की किताब में '1984 में कांग्रेस को मिले भारी बहुमत' का जिक्र होने लेकिन '1977 के चुनाव का ब्योरा' नहीं होने पर भी आपत्ति जताई गई है. क्लास 12 की किताब में जम्मू-कश्मीर की नेशनल कान्फ्रेंस को 'सेकुलर पार्टी' बताने पर भी एतराज जताया गया है.

न्यास चाहता है कि एनसीईआरटी की हिंदी भाषा की पाठ्य पुस्तक में कवि अमीर खुसरो ने 'हिंदू और मुसलमान के बीच विभेद को बढ़ावा दिया था' का पाठ पढ़ाया जाना चाहिए.

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